सज्जाद के सामने बौने साबित हुए विधायक, सीडीओ, डीएम और मुख्यमंत्री

पिछले दिनों तहसील स्तरीय कर्मियों द्वारा सोत नदी पर ऐसे नाटक किया गया।

बदायूं की सोत नदी को कब्जा मुक्त कराने को लेकर विधायक महेश चंद्र गुप्ता के आग्रह पर मुख्यमंत्री द्वारा डीएम को कड़ा आदेश दिया गया था, लेकिन लेखपाल सज्जाद के आगे सब बौने साबित हो रहे हैं। सोत नदी को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया एक बार फिर ठंडी पड़ गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि बिल्सी और बिसौली क्षेत्र में सोत नदी की चौड़ाई 52 मीटर तक है, लेकिन बदायूं क्षेत्र में 7 फुट बताई जा रही है, सब कुछ सामने होते हुए भी दोषी कर्मियों के विरुद्ध अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

उल्लेखनीय है कि बदायूं शहर के उत्तर-दक्षिण से होकर गुजर रही सोत नदी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, इस अपराध में लेखपाल सज्जाद की मुख्य भूमिका रही है। सज्जाद की रिपोर्ट के विरुद्ध जाकर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। तहसील स्तर से रिकॉर्ड भी गायब है, अथवा हेरा-फेरी करा दी गई है, जिसमें भी मुख्य भूमिका लेखपाल सज्जाद की ही बताई जा रही है। सपा सरकार में निवर्तमान जिलाधिकारी पवन कुमार ने जांच कराई थी, तब तहसील कर्मियों द्वारा रिपोर्ट दी गई कि नदी पर कब्जा नहीं किया गया है, उसका 7 फुट क्षेत्रफल सुरक्षित है, इस फर्जी रिपोर्ट के विरुद्ध कोई कुछ नहीं कर पा रहा है, जबकि सभी अफसर जानते हैं कि नदी 7 फुट से ज्यादा चौड़ी थी। नदी को लेकर गौतम संदेश ने पड़ताल की, तो बिल्सी तहसील और बिसौली तहसील क्षेत्र में सोत नदी की चौड़ाई 42 से 58 मीटर तक बताई गई, इसी को सही माना जाये और कम से कम को ही माना जाये, तो बदायूं क्षेत्र में भी नदी की चौड़ाई 42 मीटर होनी चाहिए, लेकिन तहसील कर्मी सिर्फ 7 फुट ही बता रहे हैं, जो हास्यास्पद भी है।

भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने सोत नदी को कब्जा मुक्त कराने को लेकर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से आग्रह किया था, जिस पर उन्होंने तत्काल जिलाधिकारी अनीता श्रीवास्तव से फोन पर बात की और सोत नदी को विधिवत कब्जा मुक्त कराने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री के आदेश के क्रम में जिलाधिकारी ने भी सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित कर सोत नदी को कब्जा मुक्त कराने का आदेश दे दिया, लेकिन सीडीओ लेखपाल सज्जाद द्वारा फैलाये गये मकड़जाल में ही उलझ कर गये हैं। सीडीओ के दिशा-निर्देशन में एक-दो दिन कर्मचारियों ने सोत नदी पर जाकर नाटक किया, वह भी अब बंद हो चुका है, जिससे लोग कहने लगे हैं कि लेखपाल सज्जाद के सामने सीडीओ, डीएम, विधायक और मुख्यमंत्री तक बौने साबित हो रहे हैं। असलियत में सोत को कब्जा मुक्त कराने से पहले रिकॉर्ड को खुर्द-बुर्द करने की जाँच होनी चाहिये और फिर दोषी कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना चाहिए, उसके बाद ही सोत नदी कब्जा मुक्त हो सकेगी।

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