जमीन कब्जाने, अपरहरण, अफीम और देह व्यापार का भी धंधा करता है नूरुद्दीन

गुंडा पालिकाध्यक्ष नूरुद्दीन

बदायूं जिले में स्थित सहसवान के पालिकाध्यक्ष नूरुद्दीन की गुंडई सपा सरकार में चरम पर थी। नूरुद्दीन पर जमीन हथियाने, भ्रष्टाचार करने, विवादित बयान देने और पत्रकारों का शोषण करने तक के आरोप लगे, लेकिन राजनैतिक पहुंच के चलते नूरुद्दीन का कुछ नहीं हुआ। अब पीड़ित लोग सामने आने लगे हैं, लेकिन हर गलत काम में स्थानीय पुलिस साझीदार है, सो पुलिस नूरुद्दीन की अभी भी मदद करती नजर आ रही है। हाल ही में दबंग नूरुद्दीन एक भू-खंड पर कब्जा कर रहा था, जिसे सूचना मिलने पर जिलाधिकारी ने रुकवाया था। अब एक पीड़ित दलित सामने आया है, जिसे बंधक बना कर नूरुद्दीन ने फिरौती तक वसूली थी, पर शिकायत के बावजूद पुलिस ने कुछ नहीं किया।

जिला संभल की कोतवाली गुन्नौर क्षेत्र के गाँव सैमल करनपुर के दलित नत्थूराम पुत्र मदनलाल का कहना है कि वह ईंट भट्टों पर लेवर सप्लाई करने का कार्य करता है आरोप है कि 2 अक्टूबर 2014 को गाँव खैरपुर खैराती स्थित भट्टे के लिए नूरुद्दीन और जमाल खान ने लेवर देने को कहा था पीड़ित ने 10 अक्टूबर 2014 तक लेवर दे दी, जिसने जून 2015 तक कार्य किया आरोप है कि भुगतान देने में नूरुद्दीन और जमाल खान आनाकानी करने लगे, साथ ही कुछ भुगतान देकर लेवर को भगा दिया और पीड़ित को भट्टे पर ही बंधक बना लिया, इस दौरान जमाल ने जातिसूचक गालियां देते हुए पीड़ित की बेरहमी से मार लगाई नूरुद्दीन ने जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि तूने लेवर को ज्यादा रूपये दिला दिए, जो तेरे माँ-बाप से वसूल किये जायेंगे, सरकार मेरी गुलाम है, मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता

आरोप है कि पीड़ित को पांच दिन भट्टे पर भूखा-प्यासा बांध कर रखा, उसके बाद मूंह में कपड़ा ठूंस कर गाड़ी से सहसवान लाया गया और फिर उसे शस्त्र लाइसेंस वाली दुकान में बंद कर दिया गया, जहाँ उसे 15 दिन बंधक बना कर रखा गया, इस दौरान उसने गोदाम में अफीम के पैकेट देखे, जिन्हें अच्छे पैकेटों में पैक किया जा रहा था एवं नाबालिग लड़कियाँ और औरतें भी आती थीं, जिनका यौन शोषण किया जाता था। आरोप है कि 27 जुलाई 2015 को नूरुद्दीन ने प्रार्थी के पिता के पास दो बदमाश भेजे, जिन्होंने एक लाख फिरौती देने को कहा। पीड़ित के पिता और ससुर ने किसी तरह एक लाख रूपये जुटाये और भट्टे पर जाकर नूरुद्दीन को दिए, जिसके बाद पीड़ित को मुक्त किया गया। मुक्त होने के बाद पीड़ित पुलिस से निरंतर शिकायत कर रहा है, लेकिन पुलिस ने नूरुद्दीन और जमाल के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। हार कर पीड़ित न्यायालय की शरण में गया है। धारा- 156 (3) के अंतर्गत दिए गये प्रार्थना पत्र को न्यायालय ने स्वीकार करते हुए पुलिस से रिपोर्ट मांगी है, जिस पर अगली सुनवाई 30 मई को होगी।

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