रामदेव ने व्यायाम को योग और योग को बना दिया धंधा

योग की मुद्रा में बाबा रामदेव।
योग की मुद्रा में बाबा रामदेव।

किरन कांत

योग की चर्चा दुनिया भर में चल रही है। भारत में तो योग विवाद का ही विषय बन गया है, जिस पर जमकर राजनीति की जा रही है। योग पर चर्चा होती है, तो बाबा रामदेव भी चर्चा में आ ही जाते हैं, इसलिए बाबा रामदेव की ही बात करते हैं। योग से जनमानस को कितना लाभ हुआ है, यह तो वही जाने, पर व्यायाम को योग का नाम देने से बाबा रामदेव को अवश्य बड़ा लाभ हुआ है। गाँवों और तीर्थ स्थलों पर भटकते रहने वाले असंख्य आम साधुओं की तरह ही कभी बाबा रामदेव की आर्थिक स्थिति थी, वे सिर पर घास ढोकर लाते थे, साथ ही जर्जर साईकिल से चलते नजर आते थे, वो भी उनकी निजी नहीं थी, वे बाबा रामदेव आज अकूत संपदा के स्वामी हैं, उनकी चल-अचल संपत्ति का आज अनुमान लगा पाना भी मुश्किल है, इससे भी बड़े आश्चर्य की बात यह है कि यह सब उन्हें एक मात्र योग से प्राप्त हुआ है।

जी हाँ, बाबा रामदेव के पास आज कितनी संपदा है, इसका अनुमान लगा पाना भी कठिन है, पर ज्ञात संपदा की बात करें, तो  उनका प्रमुख संस्थान है दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट, जिसके पास एक हजार करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति बताई जाती है। बाबा रामदेव का दूसरा प्रमुख संस्थान है पंतजलि योग पीठ, पांच सौ बीघा जमीन पर बने इस संस्थान की आर्थिक स्थिति 500 करोड़ से भी ज्यादा की है। पंतजलि योग पीठ फेज- 2 के पास एक हजार बीघा से भी ज्यादा जमीन है, जिसमें करीब 700 करोड़ रूपये का निवेश हो चुका है। आयुर्वेद दवाओं का निर्माण करने वाली दिव्य फार्मेसी का वार्षिक टर्न-ओवर 200 करोड़ से भी ज्यादा का बताया जाता है। हरिद्वार-रुड़की मार्ग पर स्थित दिव्य नर्सरी 150 बीघा जमीन पर बनी है और इसकी कीमत भी करीब 75 करोड़ के आसपास है। पंतजलि आयुर्वेदिक महाविद्यालय और पतंजलि विश्वविद्यालय भी करोड़ो की कीमत के हैं। औंरगाबाद- हरिद्वार में स्थित योग ग्राम की कीमत करीब 100 करोड़ रूपये की है। बहादुरपुर गाँव में स्थित पंतजलि गौशाला की कीमत भी करोड़ो में है। ग्राम पदार्था स्थित पंतजलि फूड पार्क में पिछले दिनों गोलीबारी हुई, यह देश का सबसे बड़ा फूड पार्क है और इसमें 500 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया गया है, इसके लिए 50 करोड़ रूपये का अनुदान भारत सरकार ने भी दिया है। आरोग्यम, मल्टी स्टोरीज मेगा हाउसिंग प्रोजेक्ट में भी करोड़ों का निवेश हो चुका है। हर्बल उत्पाद बनाने वाली पंतजलि आयुर्वेद में करोड़ों का निवेश है। दाना-पानी नाम से एक संस्थान है, जिसमें भी रामदेव का ही करोड़ों का निवेश बताया जाता है। इस संस्थान को योगी फार्मेसी के मालिक अविनाश और उनका परिवार चलाता है, जिस पर दो दशक पहले शेयर घोटाले में लिप्त होने का आरोप लग चुका है। इसके अलावा बाबा रामदेव ने कई देशों में भी पंतजलि योग पीठ की स्थापना की है, अमेरिका स्थित नासा के शहर ह्यूस्टन में भी बाबा की एक कंपनी है, जिनमें करोड़ों का निवेश हो चुका है। बाबा रामदेव ने 5 साल पहले स्कॉटलैंड में करीब 15 करोड़ रूपये की कीमत का एक आईलैंड खरीदा था। यह वो संपत्ति है, जिसके बारे में ज्ञात है, इसके अलावा भी बाबा के पास खरबों की चल-अचल संपत्ति है, जिसके बारे में वे स्वयं जानते हैं, अथवा उनके बहुत खास लोग।

गुमनाम, साधारण से और सम्मान विहीन रामदेव को योग गुरु बाबा रामदेव बनने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगा है। हरियाणा के रहने वाले बाबा रामदेव हरिद्वार कैसे पहुंचे, इसको लेकर भी कई तरह की अप्रमाणित कहानियाँ हैं, लेकिन यह नजारा अधिकाँश लोगों ने स्वयं देखा है कि दुबले-पतले, काले और मामूली कीमत के सफेद कपड़े पहनने वाले 15-16 साल पहले बाबा रामदेव जंगल में घास छीलते थे और सिर पर लाद कर आश्रम लाते थे। जर्जर साईकिल से चलते थे, जो उनकी अपनी नहीं, बल्कि आश्रम की थी। बताते तो यह भी हैं कि उस वक्त उन पर एक चोरी का भी आरोप लगा था, लेकिन उसमें मुकदमा नहीं लिखाया गया था। पुलिस से मिल कर निपटारा करा दिया गया था, लेकिन इस घटना का किसी के पास कोई प्रमाण नहीं है। तमाम उतार-चढ़ाव के बीच धीरे-धीरे समय का पहिया चलता रहा, फिर योग और आयुर्वेद के सिद्ध पुरुष कहे जाने वाले गुरु शंकरदेव अचानक गायब हो गये, जिनको लेकर तमाम तरह की चर्चायें होती रही हैं।

योग की मुद्राओं में बाबा रामदेव।
योग की मुद्राओं में बाबा रामदेव।

गुरु शंकरदेव के रहस्यमयी अंदाज़ में गायब हो जाने के बाद रामदेव का प्रभाव बढ़ने लगा। कुछ दिनों बाद वे योग की छोटी-छोटी कक्षायें लगाने लगे, जिनमें लोग आने लगे, तो फिर वे प्रति व्यक्ति 30-40 रूपये वसूलने लगे, यहाँ से जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने कब रामदेव को विश्व विख्यात योग गुरु बना दिया, इसकी अनुभूति बाबा रामदेव को भी बहुत बाद में हो पाई होगी। उस वक्त पूरी कक्षा से जितनी आमदनी नहीं होती थी, उससे ज्यादा आज उनकी कक्षा में सबसे पीछे बैठने वाला एक व्यक्ति दे देता है। बाबा रामदेव की कक्षा में आज आगे बैठने की आर्थिक स्थिति तो आम आदमी की है ही नहीं। उस वक्त वे जिस कोठरी में रहते, खाते और सोते थे, उससे ज्यादा जगह आज उनकी गाड़ी खड़ी करने को चाहिए। कहीं जाने के लिए जर्जर साईकिल मिलने पर चहक उठने वाले रामदेव आज बुलेट प्रूफ गाड़ियों के स्वामी हैं, उनके इशारे पर हवाई जहाज सामने आकर खड़े हो जाते हैं। गुमनाम रामदेव की नजर देख कर आज सरकारें नियम-कानून में परिवर्तन कर देती हैं। सम्मान विहीन रामदेव के समक्ष देश के अधिकाँश नेता दंडवत प्रणाम करते नजर आते रहे हैं। आज रामदेव ही नहीं, बल्कि उनके संस्थान भी अत्याधुनिक सुरक्षा कवच के दायरे में रहते हैं। इस सबके बीच शुरुआत में उनकी मदद करने वाले लोग उन पर कई तरह के आरोप लगाते रहे हैं, उनके भक्त रह चुके लोगों का ही कहना है कि बाबा रामदेव स्वार्थी और अति महत्वाकांक्षी हैं, जो स्वार्थ सिद्ध होने के बाद किनारा कर जाते हैं। उन पर लगे आरोप तब सही प्रतीत हुए, जब ख्याति के रथ पर सवार बाबा रामदेव राजनीति में आने को आतुर नजर आने लगे। देश पर शासन करने की आतुरता में ही बाबा रामदेव यूपीए की पिछली केंद्र सरकार से उलझ गये और उतावलेपन में ही सरकार से गोपनीय समझौता कर बैठे, जिसके बाद उनकी बड़ी फजीहत ही नहीं हुई, बल्कि वे सलवार-सूट पहन कर दिल्ली से छुप कर भाग गये थे।

खैर, जो भी हो, बाबा रामदेव आज स्वयं में एक ब्रांड है, जो सिर्फ योग से बना है। वेद और शास्त्रों में योग की महिमा अपरंपार बताई गई है और रामदेव को देख कर लगता है कि वाकई, योग की महिमा अपरंपार ही है।

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