मेडिकल कॉलेज में संविदा पर रख लिया बर्खास्त डॉक्टर

राजकीय मेडिकल कॉलेज का द्वार।
राजकीय मेडिकल कॉलेज का द्वार।

बदायूं में बना राजकीय मेडिकल कॉलेज सांसद धर्मेन्द्र यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की विशेष प्राथमिकता में सम्मलित है। मुख्य सचिव अलोक रंजन स्वयं एक-एक कार्य की समीक्षा करते हैं, साथ ही सचिव स्तर के अफसर लगातार दौरे करते रहते हैं, इसके बावजूद कॉलेज में मानक और नियमों की सार्वजनिक रूप से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

जनपद बदायूं के गुनौरा वाजिदपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज का सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सांसद धर्मेन्द्र यादव ने 20 दिसंबर 2013 को शिलान्यास किया था, उस वक्त एक वर्ष में कॉलेज का शुभारंभ करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अभी तक कार्य चल रहा है। हालाँकि ओपीडी का शुभारंभ कर दिया गया है, जिसका उद्घाटन सांसद धर्मेन्द्र यादव ने 20 अक्टूबर 2015 को किया था, लेकिन उद्घाटन के बाद भी कॉलेज में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी भी सेवा नहीं दी जा रही है। डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, वार्ड ब्यॉय आदि नहीं हैं। जिला अस्पताल से डॉक्टर व अन्य स्टाफ संबंद्ध कर कॉलेज के शुभारंभ होने की औपचारिकता निभाई जा रही है, जिससे जिला अस्पताल भी स्टाफ की कमी से जूझने लगा है। कुछ कर्मी संविदा पर भी रखे गये हैं, जिसमें आश्चर्य की बात यह है कि शासन द्वारा बर्खास्त किये गये एक डॉक्टर महेंद्र कुमार वर्मा को भी संविदा पर नियुक्त कर लिया गया है, यहाँ सवाल उठता है कि जब महेंद्र कुमार वर्मा कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टर थे, तो उन्हें शासन ने बर्खास्त क्यूं किया और अगर, नकारा हैं, तो उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज में किस आधार पर नियुक्त कर दिया गया? सूत्रों का कहना है कि महेंद्र कुमार वर्मा वर्षों से ड्यूटी पर जा ही नहीं रहे थे, तब शासन ने बर्खास्तगी की कार्रवाई की थी। सवाल यह भी उठता है कि शासन से मोटा वेतन, भत्ता और अन्य तमाम सुविधायें लेने वाला व्यक्ति सरकारी नौकरी नहीं कर पाया, तो वही व्यक्ति संविदा पर आधे वेतन में कार्य करने को तैयार क्यूं हो गया? सूत्र बताते हैं कि महेंद्र कुमार वर्मा का शहर में वर्मा हॉस्पीटल के नाम से निजी अस्पताल है, जिसमें मरीजों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने सेटिंग कर कॉलेज में नियुक्ति पा ली है। कॉलेज में ऐसी ही सैकड़ों अनियमिततायें हैं, जिस पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है।

कॉलेज का भवन भी मानक के अनुरूप नहीं बनाया गया है। निर्माण सामग्री की मौके से चोरी हुई, साथ ही पहले से ही कम मात्रा में सामग्री मंगाई गई, जिससे भवन की दीवारें व लिंटर मानक के अनुरूप मजबूत नहीं हैं एवं खुदाई और ठुकाई में भी भ्रष्टाचार व लापरवाही बरती गई है, यहाँ सवाल यह उठता है कि सांसद धर्मेन्द्र यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की विशेष प्राथमिकता वाले कॉलेज में अनियमितता बरतने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई क्यूं नहीं हो पा रही है?

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