बदायूं पुलिस की सोच और कार्य प्रणाली में नहीं आ रहा परिवर्तन, लोग आक्रोशित

पुलिस की हिरासत में आरोपी सलमान।

बदायूं जिले की पुलिस की सोच और कार्य प्रणाली में परिवर्तन नहीं आ पा रहा है। एक ही तरह के अपराधों में जाति और धर्म के अनुसार कार्रवाई करती नजर आ रही है पुलिस, जिससे लोग आक्रोशित नजर आ रहे हैं। सत्ता परिवर्तन के बावजूद हालात नहीं बदल पा रहे हैं, जिससे आक्रोशित लोग पुलिस के विरुद्ध ही प्रदर्शन कर सकते हैं।

ताजा प्रकरण कस्बा बिसौली का है, जहां दो नाबालिग लड़कों ने मिल कर बुलंदशहर के विवादित वीडियो के जवाब में वीडियो बना कर वायरल कर दिया था। वीडियो में मुस्लिम समुदाय, मस्जिद आदि का उल्लेख किया गया था, जिस पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न सिर्फ मुकदमा दर्ज कर लिया, बल्कि तत्काल नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने सही किया, लेकिन बिसौली पुलिस ने पाकिस्तानी झंडा फहराने के प्रकरण में इस तरह की तत्परता नहीं दिखाई थी। बता दें कि कस्बा बिसौली में 13 दिसंबर 2016 को निकाले गये जुलुस-ए-मुहम्मदी में फिल्मी डायलॉग पर युवा जोशीले अंदाज में उछलते हुए पाकिस्तान का झंडा लहरा रहे थे, जिसको लेकर बड़ा बवाल हुआ, पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश कुमार शाक्य और वर्तमान के भाजपा विधायक महेश चन्द्र गुप्ता ने प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया था एवं वीएचपी की फायर ब्रांड नेत्री साध्वी प्राची ने भी हस्तक्षेप किया था, तब जाकर पुलिस ने धार्मिक भावनायें भड़काने का मुकदमा दर्ज किया, लेकिन पाकिस्तान का झंडा फहराने के प्रकरण को दबा दिया। पुलिस ने शनिवार को नाबालिगों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की, तो पुराने प्रकरण को लेकर लोग आक्रोशित हो उठे, जिसकी भनक लगते ही पुलिस ने सलमान नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, पर विवेचना में अभी भी पाकिस्तानी झंडे का उल्लेख नहीं किया गया है।

इसी तरह विकास खंड रौली में स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापक असरार अहमद खां ने 5 मार्च 2017 को वाट्सएप पर हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने संबंधी मैसेज किया था, जिस पर तमाम लोगों ने आपत्ति की। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रकरण से अवगत कराया गया, तो उन्होंने असरार अहमद खां से स्पष्टीकरण माँगा, लेकिन हठधर्मिता के चलते आरोपी ने जवाब नहीं दिया, इस पर बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रेम चंद यादव द्वारा निलंबन की कार्रवाई कर दी गई, साथ ही जिलाधिकारी व शिक्षा निदेशक को प्रतिलिपि भी भेज दी गई, लेकिन आरोपी के विरुद्ध थाने में आज तक मुकदमा पंजीकृत नहीं कराया गया है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि आरोपी को बहाल भी कर दिया गया है।

इसी तरह थाना इस्लामनगर में तैनात थानाध्यक्ष राजवीर सिंह यादव जमकर मनमानी करते नजर आ रहे हैं। उझानी कोतवाल ने तो दो दिन पहले लव जेहाद के आरोपी को कोतवाली से ही जमानत पर रिहा कर दिया, इसी तरह के अन्य तमाम प्रकरणों को लेकर लोग कहने लगे हैं कि पुलिस की सोच और कार्य प्रणाली नहीं बदल पा रही है। हालात ऐसे ही बने रहे, तो आक्रोशित लोग कभी भी पुलिस के विरुद्ध ही प्रदर्शन कर सकते हैं।

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