पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद सक्रिय हुई उत्तर प्रदेश सरकार

आम के पेड़ पर लटके दोनों बहनों के शव निहारते दुखी लोगों का फाइल फोटो
आम के पेड़ पर लटके दोनों बहनों के शव निहारते दुखी लोगों का फाइल फोटो
जनपद बदायूं में दुष्कर्म के बाद चचेरी बहनों को मौत के घाट उतारने की घटना में प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के हस्तक्षेप के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी हरकत में आ गये हैं। उन्होंने घटना को गम्भीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस प्रकार की घटनाओं को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने घटना के लिए जिम्मेदार एवं कार्यवाही में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए हैं।
मुख्यमंत्री आज लखनऊ में पुलिस महानिदेशक ए.एल. बनर्जी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जनपद बदायूं में थाना उसैहत क्षेत्र के ग्राम कटरा सादातगंज में दो नाबालिक लड़कियों के साथ हुई घटना की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा इस प्रकरण में जो लोग अभी गिरफ्तार नहीं हुए हैं, उन्हें विशेष टीम गठित कर तत्काल गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि इस घटना को एक नजीर मानते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर इस घटना के दोषियों को शीघ्र सजा दिलाई जाए।
श्री यादव ने प्रभावित बालिकाओं के परिवार को समुचित सुरक्षा मुहैय्या कराने तथा उनके परिवारीजनों को 05-05 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े एवं प्रभावी कदम उठाने के भी निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार-बुधवार रात की घटना को उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के हस्तक्षेप के बाद संज्ञान में लिया है। अब तक पुलिस पूरे मामले को दबाने और सुलझाने के प्रयास में ही जुटी नज़र आ रही थी। पिछले 36 घंटे से सुस्त नज़र आ रही पुलिस ने पीएमओ कार्यालय और गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद आरोपी दोनों सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया है।
उधर बसपा सुप्रीमो मायावती ने घटना की सीबीआई जांच कराने और उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। सूत्रों का कहना है कि पीड़ित परिजनों से मिलने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी भी आ सकते हैं। फिलहाल राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम गाँव में मौजूद है और पीड़ित परिजनों से बात कर रही है। आयोग की सदस्य शाहमिना शफीक, हेमलता खैर और लीगल एडवाइजर सुधा चौधरी ने कहा कि दुर्भाग्य पूर्ण घटना है और इसकी जांच सीबीआई से ही होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष जानकी प्रसाद और सदस्य अशोक पांडेय ने भी मौके पर पहुंच कर पीड़ितों से बात की।
संबंधित खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें लिंक

Leave a Reply