भाजपा के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर भी नहीं हुआ आंदोलन

भाजपा के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर भी नहीं हुआ आंदोलन
लखनऊ में सोमवार को प्रदर्शन करते बदायूं भाजयुमो जिलाध्यक्ष कुलदीप वार्ष्णेय का फाइल फोटो
लखनऊ में सोमवार को प्रदर्शन करते बदायूं भाजयुमो जिलाध्यक्ष कुलदीप वार्ष्णेय का फाइल फोटो

बदायूं जिले में भारतीय जनता पार्टी के नाम पर मुट्ठी भर नेता ही थे, लेकिन अब लगता है कि वो भी नहीं रहे, तभी प्रांतीय आह्वान पर होने वाला आंदोलन बदायूं में औपचारिकता के लिए भी नहीं हुआ, जिसकी प्रदेश स्तर तक व्यापक चर्चा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि बदायूं जिले के हर विधान सभा क्षेत्र से दर्जन-दर्जन भर टिकिट के दावेदार हैं, जो अभी से विधान सभा क्षेत्रों में भ्रमण भी करते नज़र आ रहे हैं, ऐसे दावेदारों ने भी प्रदेश नेतृत्व के आह्वान को हवा में उड़ा दिया।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में व्याप्त विभिन्न अव्यवस्थाओं को लेकर भाजयुमो ने लखनऊ में सोमवार को प्रदर्शन किया। विधान भवन का घेराव करते समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाईं, आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार की, जिसमें तमाम कार्यकर्ता घायल भी हो गये, जिन्हें बाद में अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस कार्यवाही से उग्र प्रांतीय नेतृत्व ने मंगलवार को प्रत्येक जिला मुख्यालय पर आंदोलन करने का आह्वान किया था, लेकिन बदायूं जिले में भाजपाइयों ने प्रदर्शन नहीं किया, जबकि लखनऊ में पुलिस की ज्यादतियों में शिकार होने वालों में बदायूं के भाजयुमो जिलाध्यक्ष कुलदीप वार्ष्णेय सहित अन्य कई कार्यकर्ता प्रमुख रहे हैं, ऐसे में बदायूं में और भी बड़ा आन्दोलन होना चाहिए था।

लखनऊ में सोमवार को पुलिस द्वारा भाजयुमो कार्यकर्ताओं को पीटने का फाइल फोटो
लखनऊ में सोमवार को पुलिस द्वारा भाजयुमो कार्यकर्ताओं को पीटने का फाइल फोटो

असलियत में बदायूं जिले में जमीनी कार्यकर्ता के रूप में भाजयुमो जिलाध्यक्ष कुलदीप वार्ष्णेय और भाजपा जिला उपाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता ही हैं। कुलदीप वार्ष्णेय स्वयं लखनऊ में थे और राजीव कुमार गुप्ता जिले से बाहर हैं, जिससे बदायूं में गतिविधियाँ शून्य हो गईं, जबकि जिले भर में टिकिट के इतने दावेदार हैं कि नेतृत्व को उनमें से सही प्रत्याशी चुनने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। बदायूं में आन्दोलन न होने की प्रांतीय नेतृत्व तक चर्चा पहुंच गई है, जिससे माना जा रहा है कि अब नाम के पदाधिकारियों पर शीघ्र ही कार्रवाई हो सकती है।

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