खाद के अभाव में मुर्झा गईं अखिलेश सरकार की योजनायें

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।

किसान के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह का नाम स्वतः जुड़ा नजर आता है, उन्हें किसानों के मसीहा के रूप में जाना जाता है, लेकिन उनके बाद किसान हितैषी के रूप में कोई दूसरा नाम राजनेताओं में शीर्ष पर नजर आता है, तो वो दूसरा नाम निःसंदेह समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव का ही है। मुलायम सिंह यादव के व्यक्तित्व पर चौधरी चरण सिंह की छाया शूरू से ही रही है, इसके अलावा समाजवादी पार्टी का डीएनए जनता दल से संबंधित है, जिसे किसान हितैषी दल माना जाता था, इसीलिए अल्प समय में ही गाँव-गाँव जनता दल छाने में सफल रहा। किसान हितैषी दल होने के कारण ही भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत जनता दल के साथ खड़े हो गये। राजनैतिक हालात बदले, तो मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी बना ली। बाद में वे मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिससे मुलायम सिंह यादव की छवि किसान हितैषी राजनेता के रूप में मजबूत होती रही। उस परंपरा को उनके बेटे व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी निभाते नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार किसान, गाँव और गरीब के हित में कई सराहनीय निर्णय ले चुकी है और कई कल्याणकारी योजनायें व कार्यक्रम चला रही है।

किसानों की प्रथम समस्या खेतों की सिंचाई को लेकर ही रहती है, जिससे उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को पूरी तरह मुक्त कर रखा है। किसानों को राजकीय नलकूपों और नहरों से सिंचाई करने की पूरी छूट दी जा चुकी है, जिससे लगभग 55 लाख किसान लाभान्वित हो रहे हैं, इस योजना के चलते किसानों का करीब 500 करोड़ रुपया बचेगा। उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक के 50 हजार तक के कर्जदार किसानों का ऋण माफ कर दिया गया है, जिससे किसानों को करीब 1779 करोड़ रूपये का लाभ हुआ है। कृषक दुर्घटना बीमा के तहत आश्रित को 5 लाख रूपये दिए जाते हैं, अब तक करीब 922 करोड़ रूपये किसानों के आश्रितों को दिए जा चुके हैं। किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के उददेश्य से ही कामधेनु व मिनी कामधेनु योजनायें चल रही हैं।

पिछली बसपा सरकार में किसानों की भूमि अधिग्रहण को लेकर बड़ा बवाल रहा, लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की किसान हितैषी सोच के चलते किसान मायूस तक नजर नहीं आ रहे। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस- वे के किनारे लगभग 28700 किसानों की 2700 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है और बदले में किसानों को संतोषजनक रकम दी जा चुकी है। इसी तरह गाँव की बात करें, तो डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र विकास योजना के तहत 18 विभागों के माध्यम से 36 कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं, जिससे चयनित गाँव पूरी तरह संतृप्त किये जा रहे हैं। जनेश्वर मिश्र ग्राम विकास योजना के तहत चयनित गाँव में 40 लाख रूपये खर्च कर सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। लोहिया ग्रामीण आवास योजना के तहत वित्तीय वर्ष- 2012-13 में 42567 हजार, वर्ष- 2013-14 में 41905 हजार आवास स्वीकृत किये गये, साथ ही वर्ष- 2015-16 में 1 लाख आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है। समाजवादी पेंशन योजना के तहत गाँव के गरीब तबके के लोगों को 500 रूपये प्रतिमाह दिए जाने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि अभी पेंशन मिलनी शुरू नहीं हुई है, लेकिन प्रक्रिया अंतिम दौर में है, जिससे प्रदेश के करीब 40 लाख परिवार लाभान्वित होंगे। इस सबके अलावा भी गाँव, गरीब और मजदूर वर्ग के हित में कई योजनायें चल रही हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (श्रम विभाग) के तत्वधान में श्रमिकों के हित में चलाई जा रही योजना बेहद सराहनीय है। कौशल विकास मिशन भी जमीनी स्तर पर विकास करने वाला कार्यक्रम है। वुमेन पॉवर लाइन के तहत 1090 नंबर पर फोन करने की सुविधा ने प्रदेश की महिलाओं का आत्म विश्वास बढ़ाया है, इस योजना के तहत करीब 3 लाख महिलायें लाभान्वित हो चुकी हैं। लैपटॉप वितरण योजना तो शुरुआत से ही उत्तर प्रदेश की सर्वाधिक चर्चित योजनाओं में से एक है, जिससे आज गाँव के उन युवाओं के हाथों में भी लैपटॉप नजर आ रहे हैं, जिनके लिए लैपटॉप सपना सरीखा था।

उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वाधिक क्रांतिकारी योजनाओं में से एक है समाजवादी एंबुलेंस सेवा। इस योजना के तहत 108 नंबर के द्वारा कभी भी, कहीं भी और कोई भी एंबुलेंस मुफ्त में बुला सकता है, जो तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक पहुंचाती है, इसी तरह 102 नंबर की सुविधा गर्भवती महिलाओं को दी गई है, जो मुफ्त में जिला महिला अस्पताल पहुंचाती है, इस सुविधा के चलते मृत्यु दर में बड़ी संख्या में कमी आई है। अब तक 48 लाख से भी ज्यादा महिला-पुरुष इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। स्वास्थ्य और चिकित्सा की ही बात की जाये, तो गंभीर और असाध्य रोगियों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। गरीब तबके के लोगों से जांच तक के रुपये नहीं लिए जाते, साथ ही विधायकों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपने क्षेत्र के किसी भी बीमार व्यक्ति पर पांच लाख रूपये निधि से खर्च कर सकते हैं एवं लखनऊ में उच्च स्तरीय कैंसर इंस्टीटयूट की स्थापना की जा रही है, इसके अलावा बांदा, सहारनपुर, जौनपुर, चंदौली, बदायूं, कन्नौज, जालौन और आजमगढ़ में मेडिकल कॉलेज बनाये जा रहे हैं, जिनके बनने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ा लाभ होगा।

बी.पी.गौतम
बी.पी.गौतम

अखिलेश यादव की सरकार बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं, मजदूरों, किसानों और गरीबों के साथ समाज के हर वर्ग के हित में कई कल्याणकारी योजनायें संचालित कर रही है, इसके बावजूद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी सरकार की प्रशंसा की तुलना में आलोचना अधिक होती नजर आ रही है, जिसके अखिलेश यादव को गंभीरता से कारण खोजने होंगे। प्रथम कारण तो यही है कि तमाम कल्याणकारी योजनाओं व कार्यक्रमों के माध्यमों से अधिकतम 40-50 प्रतिशत किसान लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन खाद की समस्या से 100 प्रतिशत किसान जूझ रहे हैं। अखिलेश यादव खपत के अनुपात में खाद उपलब्ध नहीं करा पाये और न ही खाद की कालाबाजारी रोक पाये, जिससे हालात लगातार भयावह बने हुए हैं। उनकी आलोचना का दूसरा बड़ा कारण यह है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सत्ता सुख में मस्त हैं। समाजवादी आंदोलन कहीं नजर नहीं आ रहा। आंदोलन से हट कर सिर्फ सत्ता की ही बात की जाये, तो सत्ता बनाये रखने की दिशा में भी कार्यकर्ता कार्य करते नजर नहीं आ रहे। प्रशासनिक ढांचे के जरिये कोई दल और नेता लोकप्रियता प्राप्त नहीं कर सकता। गाँव में जन-जन तक अपने दल की नीतियों को कार्यकर्ता ही पहुंचाते हैं, जो दूर तक नजर नहीं आ रहे। सरकार द्वारा जनहित में किये गये कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रीय करना होगा, वरना एक बुराई सभी अच्छाईयों पर भारी पड़ती रहेगी।

श्रमिक को सैनिक बना रहे हैं अखिलेश यादव

One Response to "खाद के अभाव में मुर्झा गईं अखिलेश सरकार की योजनायें"

  1. click here   March 1, 2015 at 8:48 PM

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