सिंचाई मंत्री के दौरे पर उठा भ्रष्टाचार का मुद्दा, बाढ़ को लेकर सीएस का निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई मंत्री (यांत्रिक) धर्मपाल सिंह दौरे पर हैं, वहीं मुख्य सचिव राजीव कुमार ने लखनऊ में बैठक कर अफसरों को बाढ़ से निपटने के दिशा-निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि बाढ़ क्षेत्र में किसी प्रकार की कोई हानि नहीं होनी चाहिए, इसके निपटने के लिए विशेष प्रबंध तैयार रखें। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में बिजली, रास्ता, खाद्यान्न, दवाई आदि की आवश्यक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोई भी अधिकारी अक्टूबर तक छुट्टी नहीं लेगा।
शनिवार को सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह की अध्यक्षता में बदायूं स्थित विकास भवन के सभाकक्ष में बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों की समीक्षा की गई। तत्पश्चात उन्होंने सहसवान तहसील के ग्राम धापड़ स्थित तटबंध का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने पशु चिकित्साधिकारी से जानकारी ली, तो उन्होंने बताया कि 29 बाढ़ चौकियों पर सारी व्यवस्था कर ली गई है और पशुओं का टीकाकरण भी हो चुका है। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि जहां-जहां बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक रोग तथा सांप काटने की दवाई समय-समय मच्छरों से बचाव हेतु फॉगिंग कराई जाए। लोक निर्माण विभाग से कहा कि अति संवेदनशील बाढ़ वाला जनपद है बदायूं, जो सड़कें बाढ़ के पानी में बह जायें, उन्हें तुरन्त चलने योग्य बनवाएं। विद्युत विभाग को निर्देशित किया है कि मानक के अनुरूप बाढ़ क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि इस देश की अर्थ व्यवस्था है, इसलिए अधिकारी जिम्मेदारी से अपना दायित्व निभाएं और शासन की मंशा है कि बाढ़ से किसी प्रकार की हानि नहीं होनी चाहिए।
मंत्री ने गांव टोटपुर करसरी में सबको राहत सामग्री बांटने के लिए कहा है और उनको बांध के दूसरी तरफ जहां जल भराव नहीं होता है, वहां पर ज़मीन आवंटित कर बसाने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम, खण्ड विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि इनको तत्काल बसाने की कार्यवाही की जाए। मौके पर जाकर देखा सामान्य स्थिति पाई गई। सभी लोग बच्चों तथा जानवरों के साथ सही से रह रहे हैं। दौरे के दौरान भाजपा पदाधिकारियों व आम जनता ने भष्टाचार का मुद्दा उठाया, जिसे राज्यमंत्री नजर अंदाज कर गये, साथ ही जवाब दिया कि अब काम दिख रहा है, यह क्या कम है। बदायूं जिले में गंगा, रामगंगा, सोत, महावा, अरिल आदि नदियाँ गुज़रती हैं, इनसे वर्षा ऋतु में 95 गांव प्रभावित होते हैं। तोतापुर बझांगी, मैंगरा, रघुपुर, सोन सिवारक, चौकीदार की मढैया, परौठी, वीरसहाय नगला, परशुराम नगला/गिरधारी, खागी नगला, भमरौलिया, अहमदनगर बिछौरा, कल्लू मढैया, असमय रफतपुर, कमलू नगला, बल्ले नगला, जटा सहित 16 गांव है, जहां सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित बन्धों के अन्दर स्थित हैं। नदी में बहुत अधिक जल प्रवाह होने के कारण इन गांवों की आबादी प्रभावित होती है, जिन्हें प्रशासन द्वारा चिन्हित स्थानों पर विस्थापित किया जाता है।
बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र की जानकारी लेते मंत्री धर्मपाल सिंह।

उधर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में बाढ़ से प्रभावित जनपदों में निरन्तर अनुश्रवण कर आवश्यक व्यवस्थायें समय से सुनिश्चित करायें। मुख्य सचिव आज लखनऊ में शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में बाढ़ से प्रभावित जनपदों में प्रभावित लोगों की मदद हेतु विभागारवार किये जा रहे कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों एवं पशुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने देने के लिये आवश्यक पर्याप्त खाद्य सामग्री एवं चारे की व्यवस्था प्रत्येक दशा में सुनिश्चित होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि दैवीय आपदा से प्रभावित जनपदों के लिये प्रभावित लोगों को आवश्यक सुविधायें समय से उपलब्ध कराने हेतु धन की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है कि सम्बन्धित अधिकारी प्रभावित लोगों को बेहतर सहायता समय से उपलब्ध करायें।

राजीव कुमार ने सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं अभियंताओं को निर्देश दिये कि रेन कटने अथवा अन्य किसी कारण से अब कोई बांध टूटने न पाये। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अभियंताओं को बांधों की निरन्तर निगरानी सुनिश्चित कराकर आवश्यक व्यवस्थायें समय से सुनिश्चित करानी होगी। उन्होंने कहा कि मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कैम्प कर अपने विभाग से सम्बन्धित आवश्यक व्यवस्थायें समय से सुनिश्चित करायें, ताकि कोई अप्रिय घटना घटित न होने पाये। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि सिंचाई विभाग के अनुभवी एवं तकनीकी अभियंताओं की स्पेशल टास्क फोर्स गठित की जाये, जिसके माध्यम से भविष्य में बांध न टूटने के लिये तकनीकी अवश्य व्यवस्थायें समय से सुनिश्चित करा ली जायें। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बंधों की निगरानी कराने हेतु अनुभवी अभियंताओं को कैम्प करना होगा। उन्होंने कहा कि जो बंधे टूट गये हैं, उनकी मरम्मत तत्काल कराया जाना सुनिश्चित किया जाये।

मुख्य सचिव ने कहा कि सिंचाई विभाग नेपाल तथा भारत में स्थित बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति की जानकारी करते हुये वर्षा की विद्यमान तथा संभावित स्थिति के अनुसार तटबंधों की निरन्तर समीक्षा सुनिश्चित कर आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित करा ली जायें। उन्होंने कहा कि पशु शिविरों में पशुओं के टीकाकरण, औषधि, भूसा तथा अन्य व्यवस्थाओं का निरन्तर पर्यवेक्षण सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ जिलाधिकारी द्वारा किया जाये। उन्होंने कहा कि सम्यक व्यवस्था न होने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की जिम्मेदारी नियत की जाये।
राजीव कुमार ने यह भी निर्देश दिये कि जिला स्तर पर 24 घंटे संचालित कण्ट्रोल रूम के माध्यम से जनपद की सूचनायें लखनऊ में स्थापित राहत कण्ट्रोल रूम के दूरभाष नं0-0522- 2237515, फैक्स नं0- 2238084 तथा ई-मेल पर नियमित रूप से उपलब्ध करायी जाये। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित जनपदों में उपलब्ध करायी जा रही सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में मीडिया के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाये, ताकि प्रभावित लोग अधिक से अधिक लाभान्वित हो सकें। बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चन्द्रा, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रशान्त त्रिवेदी, प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद निवेदिता शुक्ला वर्मा, सचिव राजस्व रंजन कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण एवं वरिष्ठ अभियंतागण उपस्थित थे।

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