खसरे में भी दर्ज है माफियाओं द्वारा कब्जाया जा रहा तालाब

खसरे की नकल।
खसरे की नकल।

बदायूं जिला प्रशासन रिकॉर्ड के अनुसार भी झूठा साबित हो रहा है दातागंज तिराहे के पास बेखौफ भू-माफियाओं द्वारा कब्जाया जा रहा प्राचीन चंदोखर तालाब खसरे में तालाब ही दर्ज है। बदायूं के अधिकांश लोग चाहते हैं कि राजा महीपाल द्वारा बनवाये गये चन्द्र सरोवर को प्रशासन अपने कब्जे में ले और इसका सौन्दर्यकरण कराये। 

उल्लेखनीय है कि दातागंज तिराहे के पास कई एकड़ क्षेत्र में फैला विशाल प्राचीन तालाब था, जिसमें आधे शहर का गंदा पानी गिरता रहा है, इस तालाब को बेखौफ भू-माफियाओं द्वारा खुलेआम कब्जाया जा रहा है। माफियाओं ने शहर के गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की, जिससे आधे शहर का पानी जाम हो गया। मोहल्ला नई सराय के लोगों के घरों में पानी उल्टा घुसने लगा, तो त्राहि-त्राहि कर उठे लोग प्रशासनिक अफसरों से शिकायत करने गये, लेकिन दबाव के चलते माफियाओं के विरुद्ध कोई अफसर शिकायत तक सुनने को तैयार नहीं हुआ, इसके बाद परेशान लोगों ने प्रशासन और माफियाओं के विरुद्ध आंदोलन चलाया, तो परेशान नागरिकों के विरुद्ध ही मुकदमा दर्ज करा दिया गया और पुलिस से पूरे इलाके में दहशत कायम करा दी गई। प्रशासन और दबंग माफियाओं के विरुद्ध अब कोई बोलने तक को तैयार नहीं है दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह जीवनयापन करने वाले लोग अब सिर्फ ईश्वर से किसी चमत्कार की आस लगाये बैठे हैं

खसरे की नकल।
खसरे की नकल।

दिनदहाड़े तालाब की हत्या करने के मुददे को गौतम संदेश ने उठाया, तो जिलाधिकारी ने प्रेस नोट के द्वारा कहा कि वहां कभी तालाब था ही नहीं जिलाधिकारी के दावे को गौतम संदेश इतिहास की पुस्तक के माध्यम से निरस्त कर चुका है दिलकश बदायूंनी द्वारा लिखी गई “इतिहास के आईने में बदायूं” पुस्तक में दातागंज तिराहे के पास कब्जाये जा रहे चंदोखर तालाब का न सिर्फ फोटो है, बल्कि लिखा है कि इस सरोवर का निर्माण राजा महीपाल ने रानी चन्द्रावती के लिए कराया था तालाब गूगल मैप पर भी नजर आ रहा है, लेकिन जिला प्रशासन इन सब प्रमाणों को मानने को तैयार नहीं है

उच्चतम न्यायालय के आदेश की छायाप्रति।
उच्चतम न्यायालय के आदेश की छायाप्रति।
उच्चतम न्यायालय के आदेश की छायाप्रति।
उच्चतम न्यायालय के आदेश की छायाप्रति।
उच्चतम न्यायालय के आदेश की छायाप्रति।
उच्चतम न्यायालय के आदेश की छायाप्रति।
तालाब की मिटटी समतल करते अप्रैल माह में जेसीबी दलदल में फंस गई थी।
तालाब की मिटटी समतल करते अप्रैल माह में जेसीबी दलदल में फंस गई थी।

प्रशासन का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में तालाब दर्ज नहीं है प्रशासन के दावे को गौतम संदेश ने राजस्व विभाग के अभिलेखों में ही खंगाला, तो ज्ञात हुआ कि कुल 8 गाटा नंबरों के बीच तालाब फैला हुआ था, लेकिन रिकॉर्ड में तीन नंबरों में तालाब दर्ज है भू-माफियाओं ने इस गलती का ही लाभ उठाया है, जबकि अन्य नंबरों में भी तालाब ही था

खैर, बात नियम और कानून की ही करें, तो उच्चतम न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश दिया गया है कि बरसात के पानी से तालाब का क्षेत्रफल बढ़ जाये, तो उस बढ़े हुए क्षेत्र को तालाब ही माना जाये, साथ ही तालाब को किसी भी स्थिति में समतल न किया जाये अब इतिहास, अभिलेख और तकनीक से यह सिद्ध हो गया कि वहां तालाब ही था, तो देखते हैं कि प्रशासन अब क्या कार्रवाई करेगा?, यहाँ यह भी बता दें कि तालाब को कब्जाने वाली कंपनी ने बैनामे में अपना पता जिला संभल के कस्बा चन्दौसी का दिया है, लेकिन दर्शाये गये पते पर कंपनी का कोई कार्यालय नहीं है

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