पदच्युत होने के भय से मुलायम-शिवपाल का समर्पण, अखिलेश बने सर्वमान्य नेता

अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पदच्युत होने के भय से अखिलेश यादव के समक्ष समर्पण कर दिया। हालात विपरीत होने के चलते शिवपाल सिंह यादव ने भी मौन धारण कर लिया है। अखिलेश यादव ने प्रो. रामगोपाल यादव द्वारा बुलाया गया प्रतिनिधि सम्मेलन कार्यकर्ता सम्मेलन में बदलवा दिया है, जिसमें रविवार को सब मिल कर हुंकार भरेंगे और मिशन- 2017 को फतेह करने का संकल्प दोहरायेंगे।

समाजवादी पार्टी में चल रही बर्चस्व की जंग शुक्रवार को भयानक दौर में पहुंच गई थी। अखिलेश ने विरोध की सीमा पार करते हुए न सिर्फ समानांतर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी, बल्कि प्रो. रामगोपाल यादव ने 1 जनवरी को आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन बुला लिया था, जिसके बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश और रामगोपाल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया और फिर कुछ घंटे बाद ही दोनों को सपा से छः वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था।

समाजवादी पार्टी के विधायकों और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अखिलेश यादव का बहुमत है, जिससे निलंबन का उन पर कोई असर नहीं हुआ, साथ ही 1 जनवरी के प्रतिनिधि सम्मेलन में अखिलेश का राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर अनुमोदन भी आसानी से हो जाता, इसका अहसास सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को हो गया, तो उनके रवैये में बदलाव आ गया।

मुलायम सिंह यादव

शिवपाल सिंह यादव भी हथियार डालने को मजबूर हो गये। हालाँकि सुलह कराने में लालू प्रसाद यादव और आजम खां ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन सुलह की बात मुलायम-शिवपाल की समझ में इसीलिए आ गई कि हालात पूरी तरह उनके विपरीत हैं।

शिवपाल सिंह यादव

असलियत में मुलायम को उदारता और चतुरता पर, शिवपाल को बाहुबल पर और अमर सिंह को अपने षड्यंत्रों पर गर्व है, जिसे अखिलेश ने उसी अंदाज में चूर-चूर कर दिया। अखिलेश ने मुलायम को उदारता और चतुरता से तोड़ा, शिवपाल को बाहुबल और अमर सिंह को उन्हीं के तरीके से ठिकाने लगा दिया। अखिलेश शांत नहीं बैठे थे, वे इन सबको फांसने के लिए निरंतर जाल फैला रहे थे, जिसमें गलतियाँ करते ही सब फंस गये। अब समाजवादी पार्टी के सर्वमान्य नेता अखिलेश हैं, जिसमें अब किसी को कोई संकोच नहीं रह गया है। अखिलेश को नेता स्वीकार करते ही रविवार को लखनऊ में बुलाया गया प्रतिनिधि सम्मेलन कार्यकर्ता सम्मेलन में बदल दिया गया है, जिसमें सार्वजनिक रूप से सभी अखिलेश का नेतृत्व स्वीकार करते नजर आयेंगे और मिशन- 2017 को फतेह करने का संकल्प दोहरायेंगे।

संबंधित खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें लिंक

मुलायम ने की बड़ी गलती, अखिलेश बनेंगे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष

Leave a Reply

Your email address will not be published.