आईएएस अफसर बी. चन्द्रकला ने शासन को बताया भ्रष्ट

फेसबुक पर लगा कवर पेज।
फेसबुक पर लगा कवर पेज।

प्रत्येक व्यक्ति को ईमानदार होना चाहिए और सर्वोत्तम आदर्श आचरण करना चाहिए। व्यक्ति पर कोई अहम दायित्व है, तो आचरण का और भी अधिक ध्यान रखना चाहिए, लेकिन स्वयं के ईमानदार होने का आशय यह नहीं है कि बाकी सब बेईमान हैं, पर जिलाधिकारी जैसे अति महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन करने वाली चर्चित आईएएस अफसर बी. चन्द्रकला के व्यवहार से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनकी दृष्टि में बाकी सब बेईमान हैं। जी हाँ, उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर शासन को भ्रष्ट करार दिया है।

फेसबुक पर बी. चन्द्रकला नाम से एक पेज है, जिसे वे पब्लिक फिगर के रूप में संचालित कर रही हैं। 18, 159 लोगों ने इस पेज को लाइक कर रखा है, यहाँ पहला सवाल तो यही उठ रहा है कि आईएएस अफसर पब्लिक फिगर कैसे हो सकता है?

शासन पर गंभीर टिप्पणी करते हुए शेयर की गई पोस्ट।
शासन पर गंभीर टिप्पणी करते हुए शेयर की गई पोस्ट।

खैर, इस पेज पर 19-20 जनवरी की रात में एक पोस्ट शेयर की गई है, जिसमें फोटो भी है। फोटो में वे एक पुलिस वाले को कुछ समझाती नजर आ रही हैं, वे पुलिस वाले से क्या कह रही हैं, यह बात उन्होंने फोटो के साथ शेयर की है, जिसमें लिखा है कि “ऐ इंस्पेक्टर साहब… ज्यादा मंत्री जी, मंत्री जी रोना बंद करिये… आप यहां जमीनों पर अवैध कब्जे कराने में माफियों की मदद कर रहे हैं… और हमको कानून सिखा रहे हैं … 2 ही मिनटों में सारे कायदे कानून अंदर डाल देंगे… बी. चंद्रकला नाम है हमारा… तुम्हारी तरह शासन की दलाल नहीं हूं मैं… !

आईएएस अफसर बी. चन्द्रकला।
आईएएस अफसर बी. चन्द्रकला।

उक्त भाषा एक आईएएस अफसर की नहीं होनी चाहिए। हो सकता है कि संबंधित पुलिस अफसर भ्रष्ट हो और अनैतिक कार्य कर रहा हो, लेकिन वे शासन पर टिप्पणी कैसे कर सकती हैं? उन्होंने पोस्ट में स्पष्ट लिखा है कि तुम्हारी तरह शासन की दलाल नहीं हूँ, इससे स्पष्ट है कि शासन भ्रष्ट है और वहां दलाल हावी हैं।

शासन के संबंध में सार्वजनिक रूप से आईएएस बी. चन्द्रकला को ऐसा कुछ भी लिखने का अधिकार नहीं है। शायद, चर्चा में आने के लिए वे ऐसा कर रही हों, स्वयं को जनता के बीच और अधिक लोकप्रिय होने के लिए कर रही हों और अगर, ऐसा ही है, तो यह गंभीर विषय है। इससे व्यवस्था चौपट होने का भय है। अगर, बी. चन्द्रकला के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे अन्य अफसरों के बीच गलत सन्देश जायेगा। जनप्रतिनिधियों और शासन का महत्व घट जायेगा, इसलिए दुस्साहस पर यहीं रोक लगानी होगी।

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