फेक निकली तालाब कब्जा रही कंपनी, गूगल पर दर्ज है तालाब

गूगल मैप से लिये गये फोटो में दातागंज तिराहे के पास लाल घेरे के बीच में तालाब नजर आ रहा है। बाईं ओर सोत नदी भी नजर आ रही है, जिसका मौके पर अब अस्तित्व नहीं है, इसी तरह कुछ दिनों बाद तालाब का भी अस्तित्व मिटा दिया जायेगा। हांलाकि प्रशासन अभी भी नहीं मान रहा।
गूगल मैप से लिये गये फोटो में दातागंज तिराहे के पास लाल घेरे के बीच में तालाब नजर आ रहा है। बाईं ओर सोत नदी भी नजर आ रही है, जिसका मौके पर अब अस्तित्व नहीं है, इसी तरह कुछ दिनों बाद तालाब का भी अस्तित्व मिटा दिया जायेगा। हांलाकि प्रशासन अभी भी नहीं मान रहा।

दिनदहाड़े कब्जाये जा रहे प्राचीन चंदोखर तालाब के प्रकरण में एक और खुलासा हुआ है तालाब की जमीन के बैनामे जिस कंपनी के नाम कराये गये हैं, वह सिर्फ कागजों में ही संचालित की जा रही है बैनामे में दर्शाये गये कंपनी के पते पर कार्यालय नहीं है, साथ ही कंपनी के नाम से आसपास के लोग पूरी तरह अनिभिज्ञ नजर आ रहे हैं, वहीं प्रशासन तालाब मानने को तैयार नहीं है, पर गूगल मैप आज भी मौके पर तालाब दर्शा रहा है

उल्लेखनीय है कि बदायूं में दातागंज तिराहे के पास एक प्राचीन तालाब को बचाने का जनता अभियान चला रही है कई एकड़ में फैला चंदोखर नाम का विशाल प्राचीन तालाब था, जिसे बेखौफ भू-माफियाओं द्वारा खुलेआम कब्जाया जा रहा है। उक्त तालाब ऐतिहासिक दृष्टि से धरोहर माना जाता है, इस तालाब में सैकड़ों तरह के जीवों की प्रजातियाँ सुरक्षित थीं, जिन्हें मौत के घाट उतार दिया गया है, साथ ही आर्य सभ्यता से जुड़े प्राचीन सागर ताल और इस तालाब पर प्रवास करने के लिए कई लुप्त होती प्रजातियों के हजारों पक्षी प्रतिवर्ष प्रवास करने आते रहे हैं। बताते हैं कि 1177 ई. में रानी चन्द्राबलि ने इस तालाब का निर्माण कराया था, जिसे चन्द्रसरोवर के नाम से जाना जाता था, इस प्राचीन तालाब पर भू-माफियाओं की नजर पड़ गई और अप्रैल के प्रथम सप्ताह से कब्जा करना शुरू कर दिया। कई जेसीबी, सैकड़ों डंपर और ट्रैक्टर-ट्राली रात-दिन अवैध खनन कर मिटटी लाने में जुटे हुए हैं, जो लगातार मिटटी को समतल भी कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इस तालाब को बचाने का अभियान चला रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि यहाँ कभी कोई तालाब था ही नहीं, साथ ही उक्त जमीन किसानों के नाम है, जिस पर खेती होती है। मौके की स्थिति प्रशासन को दिख ही नहीं रही है। छेड़छाड़ के शिकार अभिलेख को प्रशासन सही मान रहा है, जबकि गूगल मैप आज भी दातागंज तिराहे के पास तालाब दर्शा रहा है। मैप में सोत नदी भी स्पष्ट नजर आ रही है। भू-माफियाओं और जिला प्रशासन के दायरे में होता, तो वह गूगल मैप भी अब तक बदलवा चुका होता।

तालाब की मिटटी समतल करते अप्रैल माह में जेसीबी दलदल में फंस गई थी।
तालाब की मिटटी समतल करते अप्रैल माह में जेसीबी दलदल में फंस गई थी।

प्रशासन के दावे को अभिलेखों में भी परखा गया, तो ज्ञात हुआ कि तालाब की जमीन के बैनामे एक कंपनी और मुरादाबाद के एक व्यक्ति के नाम हो चुके हैं। अंतिम बैनामा 18 मई 2015 को कराया गया है। कंपनी जिला संभल के कस्बा चंदौसी स्थित मोहल्ला विकास नगर के नाम पर रजिस्टर्ड बताई जा रही है। विकास नगर में जाकर कंपनी के संबंध में जानकारी ली गई, तो सनसनीखेज खुलासा हुआ। बैनामे में दर्शाये गये पते पर विकास नगर में कोई कार्यालय नहीं है, साथ ही मोहल्ले के लोग कंपनी के नाम से पूरी तरह अनिभिज्ञ नजर आये। सूत्रों का कहना है कि कंपनी बदायूं के भू-माफियाओं द्वारा ही रजिस्टर्ड कराई गई है। चंदौसी का पता योजना के तहत दिया गया है, ताकि विवाद की स्थिति में लोग आसानी से कंपनी के बारे में जानकारी हासिल न कर सकें। पांच अरब कीमत की इस जमीन को कब्जाने के लिए माफियाओं ने बड़ी योजना बनाई होगी, उसी योजना के तहत पूरा सिस्टम माफियाओं के साथ आकर खड़ा हो गया है, लेकिन अब इस प्रकरण में परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। अभी कई सनसनीखेज खुलासे होंगे, जिनका जवाब प्रशासन को देना ही पड़ेगा। यहाँ यह भी बता दें कि इसी स्थान को प्रशासन ने मुख्यमंत्री की जनसभा के लिए चयनित किया है। मुख्यमंत्री 23 मई को बदायूं आ रहे हैं।

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