चौथे चरण में भी हुआ बवाल, एक जगह होगा पुनर्मतदान

चौथे चरण में मतदान करते मतदाता।
चौथे चरण में मतदान करते मतदाता।
बदायूं जिले में अफसरों की लापरवाही के चलते चुनाव मजाक बन गये हैं। पिछले चरणों की तरह ही आज भी जगह-जगह जमकर बवाल हुआ, लेकिन प्रशासन ने सिर्फ एक जगह री-पोल कराने के आदेश दिए हैं। बाकी स्थानों पर हुए बवाल की पुलिस रिपोर्ट तक दर्ज करने को तैयार नहीं है।
चौथे चरण के तहत आज ब्लॉक बिसौली, वजीरगंज, आसफपुर एवं अम्बियापुर क्षेत्र में चुनाव हुए। 73.4 प्रतिशत मतदाताओं ने 359 मतदान केन्द्रों तथा 723 मतदेय स्थलों के द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चतुर्थ चरण की मतदान प्रक्रिया का बरेली जोन के आईजी बी.एस. मीणा ने बिसौली, वजीरगंज में स्थलीय निरीक्षण किया। चुनाव प्रेक्षक अजय कुमार सिंह ने भी निर्वाचन क्षेत्रों का भ्रमण कर मतदान प्रक्रिया पर नजर रखी। जिलाधिकारी शम्भूनाथ, एसएसपी सौमित्र यादव ने संयुक्त रूप से ग्राम सैंडोला, महोरी, दफतरा, दफतोरी, संग्रामपुर व कालूपुर सहित तमाम मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया। मुख्य विकास अधिकारी प्रताप सिंह भदौरिया, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राजेन्द्र प्रसाद यादव भी भ्रमणशील रहे एवं अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अशोक कुमार श्रीवास्तव तथा एसपी (सिटी) अनिल कुमार ने ग्राम सैंडोला के मतदान केन्द्र पर काफी देर रूक कर मतदान की स्थिति को देखा, इसके बावजूद कई जगह बवाल हो गया, क्योंकि जिले भर में यह सन्देश जा चुका है कि जिला निर्वाचन अधिकारी शंभूनाथ पूरी तरह लापरवाह हैं और कुछ भी होने पर कोई कार्रवाई नहीं करते। हालाँकि तेजतर्रार प्रेक्षक अजय कुमार सिंह ने आज एक बूथ पर पुनर्मतदान कराने के निर्देश दिए हैं। ब्लॉक आसफपुर क्षेत्र के गाँव बीधा नगला में बूथ नम्बर 16 पर पुनर्मतदान मतदान कराया जाएगा।
उधर गाँव बेहटा पाठक में जमकर बवाल हुआ। कई लोग घायल भी हुये हैं। मतदान पूरी तरह प्रभावित होने का समाचार है, पर जिला निर्वाचन अधिकारी शंभूनाथ ने यहाँ हुए बवाल को गंभीर नहीं माना, इसके अलावा अन्य कई जगह भी बवाल होने की सूचनायें हैं, पर पुलिस पीड़ित पक्ष की रिपोर्ट तक लिखने को तैयार नहीं है। बता दें कि बदायूं जिले में पूरी चुनाव प्रक्रिया मजाक बन कर रह गई है। नामांकन पत्र खारिज करने, गलत चुनाव चिन्ह आवंटित करने से लेकर मतदान में लापरवाही बरतने के आरोप सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी शंभूनाथ पर लग चुके हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने भी कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे शंभूनाथ के साथ अन्य सभी लापरवाह अफसरों के हौसले बुलंद होते चले गये।

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