डी-9 गैंग के सरगना देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह ने जेल से ही उड़ा रखी है नींद

डॉक्टर के पास पहुंचा पत्र और लिफाफा, इंसेट में ऊपर चंदन सिंह और नीचे डॉ. शशिकांत दीक्षित।

बदायूं जिले में ऐसा कोई अपराधी नहीं है, जिससे जनता डरती हो और जो पुलिस के लिए सिर दर्द हो, लेकिन बदायूं कारगार में बंद अपराधियों ने पुलिस की धड़कन बढ़ा रखी है। प्रदेश के कुख्यात माफिया डॉन के चलते बदायूं कारागार चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल फिलहाल पूर्वांचल के कुख्यात अपराधी चंदन सिंह ने पुलिस की नींद उड़ा रखी है। एसटीएफ भी बदायूं में डेरा डाले हुए है और संदिग्धों को तलाशने में जुटी है।

बदायूं स्थित जेल की क्षमता 529 बंदी/कैदी रखने की है, लेकिन यहाँ सामान्यतः 2100 के आसपास बंदी और कैदी रहते हैं। 529 बंदियों के सापेक्ष 50 बंदी रक्षक होने चाहिए, पर बंदी रक्षक भी सिर्फ 29 ही हैं, ऐसे हालातों में यहाँ कुख्यात अपराधी भी भेज दिए गये हैं। चंदन सिंह पुलिस हिरासत से दो बार भाग चुका है, इसका नेटवर्क भी अंतर्राज्जीय स्तर का है। बाराबंकी जेल से गोरखपुर के व्यापारियों से रंगदारी मांगने की पुष्टि होने पर और जेलर को बम से उड़ाने की धमकी देने के बाद चंदन को पहले लखनऊ और बाद में अप्रैल 2016 में बदायूं जेल में भेजा गया था। बदायूं से आगरा में उपचार के लिए भेजा गया चंदन सिंह 30 मई 2016 को भाग गया था। एसटीएफ ने चंदन को 4 मई 2017 को पुनः गिरफ्तार कर लिया और 6 मई 2017 को बदायूं जेल में लाकर बंद कर दिया, तब से चंदन यहीं है, इससे पहले 12 अगस्त 2013 को गोरखपुर से देवरिया लौट रहा चंदन सिंह ट्रेन से कूदकर भाग गया था, जिसके बाद बाराबंकी जिले की पुलिस ने 17 जुलाई 2014 को गिरफ्तार किया था।

अब चंदन गोरखपुर के डॉक्टर शशिकांत दीक्षित से बीस लाख रूपये मांगने के लिए पुनः चर्चा में है। डॉक्टर के पास रजिस्टर्ड पत्र पहुंचा है, जिसे आगरा से पोस्ट किया गया है एवं प्रेषक की जगह बदायूं आवास विकास कॉलोनी सोनू सिंह लिखा है। घबराये डॉक्टर ने पुलिस से शिकायत कर दी है। पुलिस ने पीड़ित को सुरक्षा मुहैया करा दी है एवं पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है। पत्र की सत्यता भी पुलिस जांच रही है। रंगदारी मांगने के बाद एसटीएफ भी सक्रिय हो गई है। सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ बदायूं में डेरा डाले हुए है और गहन जाँच-पड़ताल कर रही है, साथ ही संदिग्धों पर भी नजर रखे हुए है, क्योंकि डॉक्टर से रकम बदायूं जेल में लाने को कहा गया है।

यह भी बता दें कि गोरखपुर जिले में स्थित चिलुआताल क्षेत्र के गाँव कुसहरा का मूल निवासी देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह राजनीति में सक्रिय होने को आतुर था, वह क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) भी रहा है, पर गाँव में बिजली का खंबा लगाने को लेकर विवाद हुआ, तो अति के अहंकार में और अपनी दबंगई कायम करने के उद्देश्य से वर्ष- 2006 में दुकानदार प्रेम सागर सिंह की हत्या कर दी, यहीं से चंदन अपराध के दल-दल में घुसता चला गया।

नाम चंदन है, लेकिन यह आग उगलता है, इसके निशाने पर डॉक्टर, कोचिंग सेंटर संचालक, बड़े व्यापारी, ठेकेदार, इंजीनियर और चेयरमैन आ चुके हैं, इनमें से कईयों को पुलिस सुरक्षा मुहैया करा चुकी है, इसके अलावा व्यापारी तारक जायसवाल ने रंगदारी का विरोध किया, तो अपने गुर्गों से फायरिंग करा दी, लेकिन गलती से किसी और दुकान पर हमला हो गया, जिसमें दो लोग मारे गये। उरूवा में भी एक व्यापारी पर विरोध करने के बाद फायरिंग कराई, तो एक अधिवक्ता को गोली लग गई, जिनकी मौत हो गई। 13 नवम्बर 2012 में दीपावली के दिन चंदन ने डोहरिया बाजार में सरेआम संतोष की हत्या कर दी थी, साथ ही बिहार के दबंग नेता कृष्णा शाही पर वर्ष- 2014 में चंदन ने हमला बोला था, ऐसी जघन्य वारदातों के चलते धनाढ्य वर्ग और व्यापारी वर्ग चंदन के नाम से ही कांपने लगा है।

पुलिस रिकॉर्ड में चंदन डी-9 गैंग का सरगना है, इसके गैंग में भाई नंदन सिंह सहित कुल 18 सदस्य हैं, जिनमें अन्य के नाम दीपक मिश्रा, जय प्रकाश, आशीष सिंह, रूदल, राजन सिंह, विश्वजीत उर्फ विजइया , अजीत सिंह, अजय कुमार पाण्डेय, पिंकू उर्फ राणा सिंह, अभय सिंह उर्फ गोलू, राजू सिंह उर्फ डॉक्टर, संदीप सिंह, उपेन्द्र सिंह और सोलंकी यादव हैं, इनमें से अधिकाँश जेल में ही हैं और एक अप्पू की मौत हो चुकी है। फिलहाल चंदन पर लूट, हत्या और रंगदारी वसूलने जैसे पचास मुकदमा दर्ज हैं, साथ ही पचास हजार का इनामी रहा है, इसीलिए जेल से भी इसका खौफ बरकरार है, जिसे खत्म करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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