अमर शहीद की विधवा वंशज ने बेटी की शादी को मांगी आर्थिक सहायता

लाल घेरे में एकाउंट नंबर है, जिसमें कोई भी रूपये जमा करा सकता है।

स्वतंत्रता संग्राम की जब और जहाँ बात चलती है, वहां ठाकुर रोशन सिंह के नाम का उल्लेख अवश्य होता है, उनके नाम को बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है, लेकिन जिस लोकतंत्र के लिए वह यह कहते हुए “जिंदगी जिंदा-दिली को जान ये रोशन, वरना कितने ही यहाँ रोज फना होते हैं” खुशी-खुशी फांसी पर झूल गये, उस तंत्र में उनके वंशजों के हिस्से में मुट्ठी भर भी सुख नहीं आया। कहा तो यह जाता है कि “शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वाले का यही बाकी निशाँ होगा”, लेकिन शहीद के वंशजों की जेब में इतने पैसे भी नहीं हैं, जो उस मेले में ललचाते अपने बच्चों को एक पत्ता चाट भी खरीद कर खिला सकें।

जी हाँ, अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के वंशजों का ऐसा ही हाल है, उनके दिवंगत प्रपौत्र की पत्नी रचना सिंह मजदूरी कर बच्चों का लालन-पालन करती रही है, लेकिन अब बेटी युवा हो गई है, जिसके हाथ पीले करने लायक उसके पास रूपये नहीं हैं। शाहजहाँपुर के कुछ भले लोगों की मदद से रचना सिंह का बैंक ऑफ बड़ौदा की विकास भवन स्थित शाखा में एकाउंट खुलवा दिया गया है और लोगों से आह्वान किया गया है कि स्वेच्छा और श्रद्धा के अनुसार आर्थिक सहायता करें। इच्छुक व्यक्ति रचना सिंह के एकाउंट नंबर- 35930100010772 में रूपये जमा करा सकते हैं।

सामान्य वारदातों में मरे लोगों को राजनैतिक लाभ के लिए सरकारी नौकरी और बड़ी आर्थिक सहायता दे दी जाती है, लेकिन जिस के पूर्वज ने नौकरी और रुपया बर्बाद करने लायक बनाया, वह एक-एक रोटी के लिए तरस रहे हैं, आम इंसान से भी बदतर जीवन जी रहे हैं। प्रचंड राष्ट्रवादी नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और प्रचंड समाजवादी अखिलेश यादव मुख्यमंत्री हैं, लेकिन दोनों के लिए ही अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के वंशज राजनैतिक लाभ नहीं दिला सकते, इसलिए वे भी बेखबर बने हुए हैं, इसीलिए उनसे अपील भी नहीं की गई, इस देश के आम आदमी की आत्मा आज भी जागृत है, सो आम आदमी से ही आर्थिक सहायता का आह्वान किया गया है, इसे राजनेताओं के गाल पर तमाचा भी कहा जा सकता है। यहाँ यह भी बता दें कि रचना सिंह उस समय चर्चा में आई थीं, जब थाना सिंधौली क्षेत्र के गाँव पैना में दबंगों ने उसके दिवंगत पति की जमीन पर कब्जा कर लिया था और रचना सिंह को बेरहमी से पीट कर घर में आग लगा दी थी।

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