झूठा भी है गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज वाला डॉ. कफील

डॉ. कफील के स्वा घोषणा पत्र की छायाप्रति एवं निजी अस्पताल के पोस्टर।

गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में हुए जघन्य हत्या कांड का असली गुनहगार डॉ. कफील अहमद ही है, लेकिन राजनीति, प्रशासन, विभाग और मीडिया में गहरी पैठ होने के चलते कफील अहमद ने पूरे कांड से साफ बचने की रणनीति तैयार कर ली। चहेते पत्रकारों के सहारे स्वयं को नायक घोषित करवा लिया, ताकि सरकार भी दबाव में आ जाये, जबकि इस कांड से अलग भी कफील अहमद की छवि बेहद खराब बताई जाती है।

प्रथम जाँच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने वाइस प्रिंसिपल और सुपरिंटेंडेंट के साथ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील अहमद को बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक्‍स विभाग के नोडल अधिकारी पद से हटा दिया गया है, लेकिन कफील अहमद की जिस तरह की कार्यप्रणाली बताई जा रही है, उसके अनुसार यह सजा बेहद कम है। कफील अहमद को सेवा मुक्त होने से भी कोई अंतर नहीं पड़ने वाला, क्योंकि पत्नी शबिस्ता खान के नाम पर नहर रोड रुस्तमपुर में पहले ही एसी निजी अस्पताल खोल चुका है, इस अस्पताल में ही अधिकांश समय गुजरता है कफील का, जबकि स्वा घोषणा पत्र में कफील अहमद शपथ ले चुका है कि वह निजी प्रैक्टिस नहीं करेगा। खरीद कमेटी में भी कफील अहमद सदस्य है, साथ ही कहा जाता है कि इसके निजी अस्पताल में ऑक्सीजन के अलावा कई जरूरी सामान बीआरबी मेडिकल कॉलेज से ही जाते रहे हैं।

इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में परीक्षा के दौरान अपने चहेते को उत्तीर्ण कराने के उद्देश्य से किसी और को परीक्षा में बैठा दिया था, इस प्रकरण में भी कफील अहमद फंसा हुआ है, साथ ही निजी अस्पताल में एक औरत को नौकरी देने के बदले यौन उत्पीड़न करने का आरोप झेल रहा है। शक्तिशाली होने के चलते पीड़ित महिला का पुलिस ने मुकदमा तक दर्ज नहीं किया। पीड़ित ने न्यायालय की मदद से मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन पुलिस ने फिर भी कफील पर शिकंजा नहीं कसा, ऐसे व्यक्ति को जो सजा दी जाये, वह कम ही साबित होगी।

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