डीपी यादव ने बेटों के साथ बेटी भारती को भी बनाया अपराधी, सीएम से गुहार

फर्जी तरीके से जमीन हथिया कर स्थापित की गई यदु चीनी मिल का 18 मई 2010 को पूजन करता डीपी यादव का परिवार।

धनबली और बाहुबली के रूप में कुख्यात डीपी यादव भले ही सलाखों के पीछे पहुंच गया हो, लेकिन उसकी पकड़ अभी भी कमजोर नहीं पड़ी है। धन-संपत्ति को लेकर जागृत हुई डीपी यादव की भूख भी कम नहीं हो रही है, वह दिन-प्रतिदिन सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती ही जा रही है, जिसके चलते डीपी यादव अपने बच्चों को भी अपराध की दुनिया में घसीटने को मजबूर करता नजर आ रहा है, जबकि बड़ा बेटा विकास यादव पहले से ही जेल में कैद है। प्रशासनिक कार्रवाई हुई, तो डीपी यादव के दूसरे बेटे कुनाल यादव के साथ छोटी बेटी भारती यादव और अन्य तमाम रिश्तेदार भी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।

जी हाँ, डीपी यादव ने धोखाधड़ी में बेटी भारती यादव तक को संलिप्त कर लिया है। प्रकरण बदायूं जिले के थाना इस्लामनगर क्षेत्र में स्थित गाँव करियामई का है, यहाँ 3. 6370 हेक्टेयर विवादित भूमि भारती यादव और रिश्तेदार यतेन्द्र राव के नाम करा दी। बैनामे के समय भूमि पर सूरजमुखी नाम की महिला का कब्जा था और भूमि पर गन्ने की फसल खड़ी थी, लेकिन बसपा सरकार में डीपी यादव ने सभी नियम-कानूनों को दरकिनार करते हुए जमीन कब्जा ली। पीड़ित फर्जी बैनामे के विरुद्ध मुकदमा लड़ती रही और पुलिस-प्रशासन से मदद की निरंतर गुहार भी लगाती रही, लेकिन डीपी यादव के सामने उसकी न किसी ने बसपा सरकार में सुनी और न ही सपा सरकार में, इस बीच वह विभिन्न स्तरों पर बैनामे को फर्जी करार दिलाने में सफल हुई, तो यतेन्द्र राव उच्च न्यायालय से स्टे ले आया, जिसके आधार पर भूमि आज तक कब्जाये हुए है। बैनामे पर न्यायालय में सुनवाई चल रही है, जिस पर निर्णय जब भी आये, फिलहाल सवाल यह है कि सूरजमुखी से दबंगई के बल पर कब्जा लेने वाले भारती यादव और यतेन्द्र राव के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सत्ता परिवर्तन के चलते पीड़ित के मन में एक बार फिर न्याय की आस जगी है, उसने मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर कब्जा वापस दिलाने की गुहार लगाई है।

डीपी यादव के शातिर दिमाग का दूसरा कमाल यदु शुगर मिल है, इस चीनी मिल की कहानी सुनने भर से लोग दंग रह जाते हैं। डीपी यादव ने वर्ष- 1991 में 1- संजीव कुमार 2- जयप्रकाश 3- सत्यपाल 4- देवेन्द्र 5- राकेश 6- लोकेश 7- नरेश कुमार 8- विजय 9- जितेन्द्र 10- सत्तार 11- सतेन्द्र 12-विक्रांत 13- बीना 14- सरिता 15- विजय कुमार 16- मंजीद 17- विकास 18- कुनाल 19- रमेश 20- राजेन्द्र 21- नरेश 22- भूदेव 23- नवरत्न 24- दीपक 25- विवेक पुत्र श्री कमल राज 26- भारत 27- पवन 28- विजय 29- विवेक पुत्र श्री मदन लाल 30- अरुण 31- मनोज 32- धर्मेन्द्र 33- अभिषेक के नाम बिसौली तहसील क्षेत्र के गांव सुजानपुर में पट्टे आवंटित कराये, यह सभी डीपी यादव के सगे रिश्तेदार हैं, इनमें विकास और कुनाल नाम के बेटे हैं, बाकी भतीजे व रिश्तेदार एवं नौकर हैं। विकास जेल चला गया, तो उसकी जगह दूसरा विकास नाम का व्यक्ति दर्शा दिया, इन सभी को गाँव सुजानपुर का ही मूल निवासी दर्शाया गया है, जबकि असलियत यह है कि इनमें से ज्यादातर ने गाँव देखा भी नहीं होगा।

डीपी यादव द्वारा कराये गये फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, तो छानबीन की गयी, लेकिन पट्टों से संबंधित कोई रिकॉर्ड कहीं नहीं मिला। राजस्व अभिलेखागार की ओर से 30 मई 2011 को स्पष्ट रिपोर्ट लगाई गयी कि पट्टों से संबंधित कोई रिकॉर्ड उसके पास नहीं है। आश्चर्य की बात तो यह है कि बाद में फाइल प्रकट हो गयी, लेकिन उससे भी बड़े आश्चर्य की बात यह है कि पट्टे आवंटित करने वाले लेखपाल और तहसीलदार जीवित ही नहीं हैं, वहीं संबंधित एसडीएम सेवानिवृत हो गये हैं। जानकारी करने पर पता चला कि डीपी यादव ने सेटिंग के चलते फर्जी पत्रावली तैयार कराई। लेखपाल रमेश और तहसीलदार चिंतामणी के कार्यकाल के पट्टे दर्शाये गये, जिनका निधन हो चुका है, ऐसे में वह गवाही नहीं दे सकते।

खैर, उक्त जमीन खसरे में खार के रूप में दर्ज है, जिसका श्रेणी परिवर्तन कराया ही नहीं जा सकता, साथ ही पट्टेदार संपन्न हैं और जिले के भी नहीं हैं, यह सच आम जनता जानती है एवं रिकॉर्ड में भी सब कुछ स्पष्ट है, इसके बावजूद शिकायतों पर भी उक्त फर्जीवाड़े में कार्रवाई नहीं हुई, इस सबके बीच 33 पट्टेदारों में से एक कुनाल यादव ने बाकी 32 पट्टेदारों से जमीन खरीद ली, इस भूमि पर अब डीपी यादव की यदु शुगर मिल है और डीपी यादव का छोटा बेटा कुनाल मिल का निदेशक है, जो बैंक से ऋण लेकर और गन्ना किसानों का रुपया हजम कर के मस्ती कर रहा है।

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शातिर दिमाग व्यक्ति का नाम है डीपी यादव

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