अपराधों, घोटालों के साथ छिछोरी हरकतें भी करते रहे हैं आबिद

तहसील सदर के प्रांगण में खड़ा बेकार वाटर कूलर, जो आबिद रजा सिर्फ प्रचार कर रहा है।
तहसील सदर के प्रांगण में खड़ा बेकार वाटर कूलर, जो आबिद रजा का सिर्फ प्रचार कर रहा है।

बदायूं सदर क्षेत्र के समाजवादी पार्टी से निष्कासित किये जा चुके बढ़बोले विधायक आबिद रजा शातिर अपराधी रहे हैं, पुलिस उनकी हिस्ट्रीशीट खोल चुकी है, उनका नाम सदर कोतवाली में लटकी दुराचारियों की सूची में आज भी 70वें नंबर पर लिखा नजर आ रहा है, उन पर घोटालों के आरोप लग रहे हैं, उन पर जमीनें कब्जाने के आरोप लग रहे हैं, उन पर कब्रिस्तान और सोत नदी कब्जाने का आरोप लग रहा है, उन पर अवैध तरीकों से हजारों करोड़ की चल-अचल संपत्ति अर्जित करने का आरोप लग रहा है। पुराने करनामों को छोड़ दिया जाये, तो वर्तमान में भी उन पर तमाम गंभीर लग रहे हैं, उन पर विधायक निधि तक को बेचने का आरोप है, इस सबके बीच वे स्वयं को नैतिक मार्ग पर चलने वाला आदर्श व्यक्ति मनवाने की जिद पर अड़े हुए हैं।

कथित आदर्शवादी आबिद रजा के अपराधों और घोटालों से हट कर बात करते हैं, क्योंकि उनके द्वारा किये गये कुकृत्य आम जनता के संज्ञान में हैं ही। आबिद तमाम ऐसी छिछोरी हरकतें भी करते रहे हैं, जिनकी चर्चा करते हुए लोग हंस-हंस कर लोट-पोट हो जाते हैं। प्रथम बार विधायक चुने जाने के बावजूद सपा सरकार में मंत्री बनने का दबाव बनाते रहे, इस बीच बरेली के आबिद खान को दर्जा राज्यमंत्री बनाने की खबर आई, तो आबिद रजा ने जानकारी किये बिना अपने आवास पर हजारों रूपये की मिठाई बाँट दी और घंटों तक बधाई स्वीकार करते रहे, तभी स्पष्ट हुआ कि आबिद रजा नहीं, बल्कि आबिद खान को दर्जा राज्यमंत्री बनाया गया है, तो जनता के बीच से उठ कर अंदर कमरे में चले गये, जिससे बड़ी फजीहत हुई थी।

फजीहत को आधार बना कर अड़ गये, तो नगर विकास मंत्री आजम खान ने आबिद रजा को उत्तर प्रदेश वक्फ विकास निगम का अध्यक्ष बनवा दिया, इस दायित्व को उन्होंने कैबिनेट मंत्री की तरह सेलिब्रेट किया। 11 जनवरी 2014 को लखनऊ से बदायूं आये, तो जमकर जश्न मनाया गया, उनके गुर्गों ने लालबत्ती की गरिमा को तार-तार कर दिया, कोई लालबत्ती को किस कर रहा था, तो किसी ने लालबत्ती को सिर पर रख बैंड-बाजों की धुन पर डांस किया, जिसकी शहर में व्यापक स्तर पर चर्चा होती रही।

विधायकों को विकास कार्य कराने के लिए प्रति वर्ष डेढ़ करोड़ रूपये मिलते हैं। आरोप है कि आबिद रजा डेढ़ करोड़ की निधि 65 लाख रूपये में बेचते रहे हैं। उनकी निधि से क्षेत्र में वाटर कूलर लगाये गये हैं, जिनका स्टीमेट कई गुना है। वाटर कूलर नगर पालिका परिषद द्वारा भी लगवाये गये हैं। पालिका की अध्यक्ष उनकी पत्नी फात्मा रजा ही हैं। ध्यान देने की बात यह है कि वाटर कूलर दो-चार महीने भी ठीक नहीं रहे, अधिकाँश कूलर ऐसे ही खड़े हैं, लेकिन आबिद रजा का व्यक्तिगत प्रचार जमकर करते नजर आ रहे हैं। कूलर से बड़ा उनका फोटो लगा है, साथ ही आदर्शवादी आबिद ने अपने नाम के साथ दर्जा राज्यमंत्री नहीं, बल्कि सिर्फ राज्यमंत्री लिखवाया है।

हास्यास्पद बात तो यह है कि आबिद के घर के द्वार पर भी सिर्फ राज्यमंत्री ही लिखा हुआ है। यहाँ यह भी बता दें कि आदर्शवादी आबिद ने सरकार बनने के बाद विरोधी गुट के एक कोटेदार को रिश्वत देने को बुलवाया और रूपये लेते हुए उसका वीडियो बनवा लिया, जिसे दिखाते हुए उन्होंने क्षेत्र में अपनी दहशत कायम करने का प्रयास किया, साथ ही मीडिया में जमकर बयानबाजी की, वही कोटेदार आज उनका सर्वाधिक चहेतों में से एक है और उसकी पत्नी ब्लॉक प्रमुख है, जिसे जिताने के लिए आबिद ने सभी मर्यादायें तोड़ दी थीं, इसी तरह कस्बा वजीरगंज के चर्चित ठेकेदार अरविंद वार्ष्णेय की उन्होंने शिकायत की। शिकायत के बाद वह उनकी शरण में आ गया, फिर उसकी पत्नी को भी मर्यादा तोड़ कर ब्लॉक प्रमुख बनवाया, इस बीच शिकायत पर हुई जांच में सभी दोषी पाये गये और मुकदमा दर्ज हो गया, तो बेशर्मी की सीमा पार करते हुए आबिद ने उस पर भी प्रेसवार्ता आयोजित कर स्वयं को नायक बनाने का प्रयास किया। आबिद के ऐसे तमाम किस्से हैं, जिनकी चर्चा लोग चटखारे ले-लेकर करते नजर आते हैं, इसके बावजूद आबिद पर स्वयं को आदर्शवादी घोषित करने का ऐसा भूत सवार हुआ है कि सब कुछ छोड़ कर रात-दिन अपना ही गुणगान करते रहते हैं।

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