ईओ का पद हथियाने वाले भ्रष्ट मुकेश जौहरी ने अर्जित की अकूत संपत्ति

मुकेश जौहरी

ट्यूबवैल ऑपरेटर न सिर्फ ईओ का पद कब्जाये हुए है, बल्कि बदायूं में 12 से ज्यादा वर्षों से जमा हुआ है। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि करोड़ों की नामी-बेनामी संपत्ति अर्जित कर ली है। शिकायतें भी होती हैं, लेकिन उच्च स्तरीय राजनैतिक संबंध और विभागीय भ्रष्टाचार के बल पर कार्रवाई से बचा हुआ है और खुलेआम मौज भी मार रहा है।

मुकेश जौहरी नाम का कथित ईओ है, इस पर नगर पालिका परिषद बिसौली, बिल्सी और फैजगंज बेहटा का कार्यभार है। बदायूं जिले में तैनात हुए इसे 12 वर्षों से ज्यादा हो गये, इसके बारे में बताया जाता है कि बरेली जिले की नगर पंचायत दियोरनियाँ में इसकी नियुक्ति ट्यूबवैल ऑपरेटर के पद पर हुई थी। शातिर दिमाग मुकेश जौहरी ने पहले क्लर्क का कार्यभार लिया और ईओ का तबादला कराने के बाद प्रभारी ईओ बन गया।

शातिर दिमाग मुकेश जौहरी के संबंध में दियोरनियाँ के लोग जानते थे, इसलिए मंडलायुक्त कार्यालय में रिश्वत देकर मुकेश जौहरी ने अपना तबादला ईओ के पद पर नगर पंचायत सिरौली करा लिया, जहां भ्रष्ट हरकतों पर इसकी शिकायत हुई, तो मंडलायुक्त कार्यालय से ही इसने बदायूं जिले की नगर पंचायत फैजगंज बेहटा को अपना तबादला करा लिया, यहाँ इसे 12 वर्षों से अधिक समय हो चुका है। उच्च स्तरीय राजनैतिक संबंधों के बल पर इस पर नगर पालिका परिषद तक का कार्यभार है। हालाँकि इसके विरुद्ध कार्रवाई भी हुई, पर शातिर दिमाग मुकेश जौहरी ने उच्च न्यायालय का फर्जी स्टे ऑर्डर विभाग को दे दिया, जो इलाहाबाद का है और उस पर मोहर लखनऊ न्यायालय की लगी है, जिसे विभाग भी नकार चुका है, लेकिन राजनैतिक संबंधों और भ्रष्टाचार के बल पर कार्रवाई से बचा हुआ है।

सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार के माध्यम से मुकेश जौहरी ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है। फैजगंज बेहटा और बिसौली क्षेत्र में इसने करोड़ों की नामी-बेनामी जमीन खरीद ली है, साथ ही बरेली, नोयडा और लखनऊ में भी इसकी अवैध संपत्तियां बताई जाती हैं, इसकी संपत्तियों और गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच होना अति आवश्यक है, वरना कानून का दुरूपयोग कर इसी तरह भविष्य में भी आनंद लेता रहेगा।

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