शराब माफिया का इंटर कॉलेज बना अय्याशी का अड्डा

शराब माफिया का इंटर कॉलेज बना अय्याशी का अड्डा
शराब माफिया का इंटर कॉलेज बना अय्याशी का अड्डा

बदायूं शहर में एक शराब माफिया का निजी इंटर कॉलेज अय्याशी का अड्डा बन गया है, लेकिन पुलिस-प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। हालात इतने भयावह होते जा रहे हैं कि अध्यापिकाओं के परिजन व छात्राओं के अभिवावक सामूहिक रूप से कॉलेज से दूरी बनाने का मन बना रहे हैं।

बदायूं जिले के एक कुख्यात शराब माफिया ने मान-सम्मान पाने के उददेश्य से सीबीएसई बोर्ड से मान्यता लेकर शहर में कॉलेज खोला। बदायूं शहर में अच्छे शिक्षण संस्थान की कमी के चलते शुरुआत में अच्छे लोग कॉलेज से जुड़ गये। अच्छे परिवारों की लड़कियाँ अध्यापक बन गईं एवं अध्यापिकाओं के प्रयास के चलते कॉलेज में अच्छे परिवारों की लड़कियों के भी एडमिशन होते चले गये, लेकिन शराब माफिया की नीयत का खुलासा शीघ्र ही हो गया। शुरू में पत्नी को मालिक बताया गया, लेकिन शराब माफिया खुद भी कॉलेज में ऑफिस बना कर बैठता है, साथ ही अपने पुराने तमाम गुर्गों को भी कॉलेज में नौकरी दे रखी है, जो खुलेआम गुंडई करते हैं। अध्यापिकाओं और छात्राओं को घूरते हैं, साथ ही द्विअर्थी संवाद करने का प्रयास करते हैं। कोई आपत्ति कर दे, तो अपमान करते हैं।

शराब माफिया खुद भी महिला अध्यापिकाओं को कार्यालय में बुला कर द्विअर्थी संवाद करता है, जिससे तंग आकर कई भली महिलायें नौकरी छोड़ चुकी हैं। शिक्षा जगत में यह बात दूर-दूर तक फैल गई है, जिससे अब कोई अच्छी प्रधानाचार्य और अध्यापक कॉलेज में नौकरी करने को तैयार नहीं है। बात शहर में भी आम होती जा रही है, जिससे अभिवावकों के घर तक पहुंच गई है।

कॉलेज का शराब माफिया शहर का कुख्यात भू-माफिया भी है। माफियागीरी का पूरा धंधा कॉलेज के कार्यालय में बैठ कर ही संचालित करता है, जिससे कॉलेज में शैक्षिक वातावरण भी नहीं बचा है। चारों तरफ गुंडे और माफिया ही टहलते नजर आते हैं, जिससे अधिकांश अभिवावक अपनी बेटियों को इस बदनाम हो चुके कॉलेज से निकाल कर दूसरे कॉलेज में भेजने का मन बना रहे हैं, साथ ही अच्छे परिवारों की अध्यापिकायें भी कॉलेज से नौकरी छोड़ने का मन बना चुकी हैं। घटिया माहौल से तंग आकर कई अध्यापक व अध्यापिकायें नौकरी छोड़ भी चुके हैं। कॉलेज में जो अध्यापक व अध्यापिकायें बचे हैं, उनमें से अधिकाँश योग्य नहीं हैं। पीजीटी और टीईटी मानकों के विरुद्ध हैं, इसीलिए वे कम वेतन और घटिया माहौल में नौकरी करने को मजबूर हैं।

इसके अलावा कॉलेज को भी शराब माफिया ने लूट का जरिया बना लिया है। मनमाने ढंग से फीस वसूल रहा है। तमाम खर्चों और आयोजनों के नाम पर छात्र-छात्राओं से वसूली की जाती है एवं कमीशनखोरी भी खुलेआम कर रहा है। ड्रेस व पुस्तकें पचास गुना दाम पर बेच रहा है। शातिर दिमाग शराब माफिया कई बड़े नेताओं व अफसरों की चमचागीरी करता है, जिनके दबाव में पुलिस व प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। हालात ऐसे ही बने रहे, तो कॉलेज में कभी भी बड़ी वारदात घटित हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस व प्रशासन की ही होगी। कॉलेज परिसर के घटिया माहौल एवं भ्रष्टाचार को लेकर कई सामाजिक व राजनैतिक संगठन बड़ा आंदोलन करने का भी मन बना रहे हैं, साथ ही केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिख कर कॉलेज परिसर में शराब माफिया और उसके गुर्गों के द्वारा किये जा रहे कुकृत्यों के संबंध में अवगत करायेंगे।

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