लॉबिंग के चलते सपा हाईकमान नहीं कर पा रहा जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति

लॉबिंग के चलते सपा हाईकमान नहीं कर पा रहा जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति

बदायूं जिले में समाजवादी पार्टी की रीढ़ कहे जाने बनवारी सिंह यादव का 8 मार्च को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में निधन हो गया था, वे निधन के समय एमएलसी, दर्जा राज्यमंत्री और सपा के जिलाध्यक्ष का दायित्व संभाले हुए थे, जो अब रिक्त हैं। समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व स्थानीय नेताओं की लॉबिंग के चलते जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति नहीं कर पा रहा है। वरिष्ठता और योग्यता को आधार बनाया जाता, तो जिलाध्यक्ष नियुक्त करने में हाईकमान को समस्या नहीं आनी चाहिए थी। देर होने से कयास लगाये जा रहे हैं कि हाईकमान लॉबिंग करने वाले अयोग्य नेताओं के दबाव के चलते फंस गया है।

बदायूं जिला दो लोकसभा क्षेत्रों के बीच बंटा हुआ है। शेखूपुर और दातागंज विधान सभा क्षेत्र आंवला लोकसभा क्षेत्र के हिस्से में चले जाते हैं, शेष विधान सभा क्षेत्र बदायूं लोकसभा क्षेत्र में हैं, मतलब जिले का ज्यादा भू-भाग और आबादी का बड़ा हिस्सा बदायूं लोकसभा क्षेत्र के हिस्से में आता है, इसलिए जिलाध्यक्ष बदायूं लोकसभा क्षेत्र के दायरे में रहने वाला होना चाहिए। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अपने-अपने विधान सभा क्षेत्रों में ही सीमित रहे हैं, जिला स्तर तक एवं संपूर्ण जिले में प्रभाव रखने वाला कोई प्रत्याशी नहीं है, जबकि जिलाध्यक्ष ऐसा होना चाहिए, जो जिले की चारों दिशाओं से न सिर्फ भली-भांति परिचित हो, बल्कि हर क्षेत्र की जनता के संपर्क में भी रहता हो। जिलाध्यक्ष ऊर्जावान, गंभीर, स्वस्थ और युवा भी होना चाहिए, क्योंकि विपक्ष में रहते हुए ऊर्जा विहीन व्यक्ति पार्टी को रसातल में पहुंचा सकता है।

पदाधिकारियों में जिलाध्यक्ष का दायित्व संभाल पाने योग्य व्यक्ति लगभग नहीं है, क्योंकि दिवंगत बनवारी सिंह यादव का मतलब ही समाजवादी पार्टी था, वे पार्टी के विधान की पूर्ति के लिए पदाधिकारी नियुक्त कर लिया करते थे, ऐसे में शीर्ष नेतृत्व को यह मंथन करने में मुश्किल नहीं होनी चाहिए कि जिला स्तर पर किसने नेतृत्व किया है, कौन सर्वाधिक लोकप्रिय है, कौन युवाओं में लोकप्रिय है, कौन सर्व समाज में लोकप्रिय है, कौन भीड़ जुटा सकता है, कौन पार्टी संभाल सकता है, कौन संपन्न है, कौन संसाधनों से युक्त है, कौन पार्टी के प्रति वफादार है और सबसे बड़ी बात कौन चरित्रवान है?, इस पैमाने को आधार बनाया जाये, तो हाईकमान सही निर्णय ले सकेगा, लेकिन लॉबिंग के अनुसार निर्णय लिया, तो इस दौर में समाजवादी पार्टी जिले से हमेशा के लिए समाप्त भी हो सकती है।

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ओमकार सिंह यादव और ब्रजेश यादव ही हैं सपा जिलाध्यक्ष पद के दावेदार

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