पीसी शर्मा ने भाजपा जिलाध्यक्ष की खुलेआम फजीहत की

कार्यालय के उद्घाटन के समय बैठे सांसद धर्मेन्द्र कश्यप, पीसी शर्मा, बीएल वर्मा, राजीव कुमार सिंह, राजीव गुप्ता, कुलदीप वार्ष्णेय, राम सेवक सिंह पटेल, दीप माला गोयल और अन्य तमाम कार्यकर्ता।
कार्यालय के उद्घाटन के समय बैठे सांसद धर्मेन्द्र कश्यप, पीसी शर्मा, बीएल वर्मा, राजीव कुमार सिंह, राजीव गुप्ता, कुलदीप वार्ष्णेय, राम सेवक सिंह पटेल, दीप माला गोयल और अन्य तमाम कार्यकर्ता।

बदायूं नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के लिए उप चुनाव हो रहा है। आज भाजपा प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन हुआ, जिसमें भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम स्वरूप पाठक की खुलेआम काफी फजीहत हो गई। माइक अपने हाथ में लेकर पीसी शर्मा ने खुलेआम कड़ी आलोचना ही नहीं की, बल्कि तीखे प्रहार करते हुए कई गंभीर आरोप भी लगाये।

बताते हैं कि पीसी शर्मा भी अध्यक्ष पद के लिए टिकट के दावेदार थे, लेकिन जिला स्तर से उनका नाम पैनल में भेजा ही नहीं गया। बाद में विरोध हुआ, तो पुनः नाम भेजा गया, लेकिन बरेली शहर के विधायक राजेश अग्रवाल की सिफारिश के चलते दीपमाला गोयल को टिकट दे दिया गया, इस सबसे पीसी शर्मा बेहद आक्रोशित थे। अपना नाम न भेजने को लेकर वे जिलाध्यक्ष प्रेम स्वरूप पाठक को पहले भी आक्रोश जता चुके थे, लेकिन आज भाजपा प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के समय आगे बढ़ कर उन्होंने माइक पकड़ लिया और बोलने लगे। बताते हैं कि उन्होंने जिलाध्यक्ष पर भाजपा को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा समर्थित जद यू प्रत्याशी डीके भारद्वाज चुनाव लड़े, तब वे सपा प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव से मिल गये थे, ऐसे कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने जिलाध्यक्ष की जमकर फजीहत की। बाद में बरेली क्षेत्र के अध्यक्ष बीएल वर्मा ने हस्तक्षेप कर मामला शांत करने का प्रयास किया, लेकिन पीसी शर्मा बोलते रहे। बताते हैं कि बाद में जिलाध्यक्ष प्रेम स्वरूप पाठक के छोटे बेटे बबलू पाठक मौके पर आ गये, तो पीसी शर्मा टाल गये, जिससे कार्यक्रम अखाड़ा बनने से बच गया।

बता दें कि पीसी शर्मा चर्चित ठेकेदार हैं। अपने गाँव कठौली के चर्चित प्रधान रहे हैं। उझानी विकास क्षेत्र से भाई की पत्नी को ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ाने को लेकर राजनैतिक चर्चाओं में आये और फिर कल्याण सिंह की पार्टी से बिल्सी विधान सभा क्षेत्र से विधान सभा चुनाव लड़े और भाजपा प्रत्याशी से तीन गुना वोट हासिल कर अपनी धमक कायम की। कल्याण सिंह की पार्टी का भाजपा में विलय हो गया, तो वे भी भाजपा में आ गये। यह भी बता दें कि बसपा सरकार में बाहुबलि विधायक डीपी यादव और शक्तिशाली विधायक योगेन्द्र सागर से भी भिड़ गये थे, जिससे उन्हें करोड़ों का नुकसान ही नहीं उठाना पड़ा, बल्कि फर्जी मुकदमे के चलते जेल भी जाना पड़ा।

भाजपा प्रत्याशी के कार्यालय के उद्घाटन के चलते लगा जाम

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