स्वामी शुकदेवानंद ट्रस्ट से चिन्मयानंद आउट

– ट्रस्टियों ने जबरन लिया त्याग पत्र

– इसी ट्रस्ट के अधीन हैं परमार्थ आश्रम

– आश्रम की प्रतिष्ठा बचाने को उठाया कदम

कृष्ण पाल सिंह उर्फ़ कथित संत चिन्मयानंद स्वामी शुकदेवानंद ट्रस्ट का मैनेजिंग ट्रस्टी नहीं रहा, इस ट्रस्ट के द्वारा ही परमार्थ निकेतन ऋषिकेश और परमार्थ आश्रम हरिद्वार संचालित किये जाते हैं। ट्रस्टियों ने दबाव देकर कथित संत चिन्मयानंद से त्यागपत्र ले लिया था, लेकिन लोगों को इस खबर की भनक तक नहीं लगने दी गई।

कृष्ण पाल सिंह उर्फ़ चिन्मयानंद
कृष्ण पाल सिंह उर्फ़ चिन्मयानंद

उल्लेखनीय है कि कथित संत चिन्मयानंद वर्षों से गेरुआ वस्त्रों की आड़ में भोली और नाबालिग लड़कियों का शोषण करता रहा है। यहाँ विशेष ध्यान देने की बात यह है कि यह कथित संत अधिकाँश लड़कियों से पहले सात्विक रिश्ता बनाता है और बाद में अपने मायाजाल में फांस कर शारीरिक शोषण शुरू कर देता है और कुछ वर्षों के बाद ऐसी लड़कियों का विवाह अपने ही अधीन काम करने वाले लड़कों से करा देता है, साथ में नौकरी व घर आदि देकर हमेशा-हमेशा के लिए मुंह बंद कर देता है, इसके अलावा कथित संत चिन्मयानंद के पद और प्रतिष्ठा से भयभीत लड़कियां इसके विरुद्ध बोलने की कल्पना तक नहीं कर पाती होंगी। अब तक तमाम लड़कियों को ठग चुके इस कथित संत चिन्मयानंद ने ऐसे ही एक लड़की को अपने जाल में फांस लिया था। उसे साध्वी बनने के लिए प्रेरित कर परिजनों से उसके संबंध-विच्छेद करा दिए थे और फिर उसका भी शारीरिक और मानसिक शोषण शुरू कर दिया था। इस कथित संत के चंगुल में फंसी उस लड़की ने वर्षों शोषण झेला, लेकिन उस लड़की ने पतित परिवेश में रहने के बावजूद खुद को साध्वी के रूप में स्थापित कर लिया। उस लड़की को संत समाज साध्वी के रूप में ही सम्मान देने लगा था और इसी कारण धोखा होने के बावजूद वह मौन थी, पर इस कथित संत चिन्मयानंद के कुकर्म निरंतर जारी थे। नई-नई लड़कियों को फांस कर वही सब उनके साथ भी करने का प्रयास कर रहा था, तो उस लड़की ने संकल्प लिया कि उसके साथ भले ही जो हुआ, पर अब किसी और के साथ ऐसा नहीं होने देगी।

कथित संत चिन्मयानंद के विरुद्ध इस लड़की ने ही 30 नवंबर 2011 को शाहजहांपुर की सदर कोतवाली में मुकदमा लिखाते हुए इस कथित संत के कुकर्मों का खुलासा किया, तो लोग स्तब्ध रह गए, लेकिन कथित संत चिन्मयानंद ने पद-पैसा और प्रतिष्ठा का दुरुपयोग कर इस लड़की को भी तोड़ने का प्रयास किया, पर अभी तक सफल नहीं हुआ है। यह प्रकरण फिलहाल हाईकोर्ट इलाहाबाद में विचाराधीन है, लेकिन इस कथित संत का दुनिया के सामने असली चेहरा आ जाने के बाद स्वामी शुकदेवानंद ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने दबाव देकर इससे मैनेजिंग ट्रस्टी के दायित्व से इस्तीफा ले लिया और मंजूर कर इसे बाहर का रास्ता भी दिखा दिया।

स्वामी शुकदेवानंद ट्रस्ट के द्वारा ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन और हरिद्वार स्थित परमार्थ आश्रम संचालित किये जाते हैं। इस कथित संत ने पद, पैसा और प्रतिष्ठा इन्हीं आश्रमों की प्रतिष्ठा का दुरूपयोग कर प्राप्त की है, पर अब इसकी अय्याशी का प्रमुख अड्डा शाहजहांपुर स्थित मुमुक्षु आश्रम और वृन्दावन स्थित परमार्थ निकुंज बन गए हैं, अब यह कथित संत इन्हीं दोनों स्थानों पर कुकर्म करता है, क्योंकि इन दोनों स्थानों पर इसे रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है, साथ ही इन दोनों स्थानों की प्रबंध समितियों में इसके खुद के ही चमचे हैं, जिनकी हैसियत कुछ भी कहने की नहीं हैं, लेकिन यहाँ सवाल यह भी उठता है कि विश्व हिन्दू परिषद् जैसे प्रतिष्ठित संगठन और भारतीय जनता पार्टी की इस धूर्त संत को साथ रखने की क्या मजबूरी हो सकती है?

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