गुन्नौर क्षेत्र की जनता के लिए देवता समान हैं सपा सुप्रीमो

 

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव

एक किसान की भैंस चुरा कर पिता-पुत्र ले जा रहे हैं और डेढ़-दो किलोमीटर के अंतर से भैंस स्वामी कुछ परिचितों के साथ भैंस खोजता हुआ चोरों का लगातार पीछा कर रहा है। भैंस और चोरों के पद चिन्हों के सहारे भैंस स्वामी लगातार चोरों की ओर बढ़ रहा है। चोर अपने घर पहुँच कर भैंस को खूंटे से बाँध कर चारपाई पर बैठ ही पाते हैं, तभी भैंस स्वामी पहुँच जाता हैं। दोनों एक-दूसरे से पहले से ही परिचित हैं, सो देखते ही चोर कहता है कि “पंडित पायें लागैं।” हालाँकि शुद्ध वाक्य पाँव लांगौं है, पर इस इलाके में ऐसे ही बोलते हैं। जवाब में भैंस स्वामी, पंडित जी बनावटी ख़ुशी का इजहार करते हुए जोर से आशीर्वाद देते हैं, “खुश रहो, खुश रहो चौधरी, खुश रहो।” और आशीर्वाद देते हुए चोर के पास पहुँच जाते हैं, साथ ही चोर के बिना कहे ही चारपाई के सिरहाने बैठ जाते हैं। कुछ देर के मौन के बाद चोर बोलता है कि, “पंडित आज सवेरे-सवेरे ई कैसे आये गये इतै कौ”?

सामने खूंटे पर बंधी अपनी भैंस से नज़र हटा कर पंडित कहते हैं कि, “का बता बैं, बड़ी पिरेसानी में फंस गये हैं आज। रात बालकन्ने सांकर (कुंडी) खुली छोड़ दई, सो काऊ टाइम भैसिया घर से बाहर निकर गई। पूरी रात है गई ढूंत-ढूंत, हमई पायें देखत भये यहाँ तक चले आये। जहां आये के देखी तो चैन पर गओ कै अपने चौधरी ने ही बाँध लई। भगवान की किरपा ई ये, जो भैंसिया काऊ चोर के हाथ नाये लागी।” इतना सुन कर चोर (चौधरी) बोला, “का कै रयो ये पंडित, जो भैंसिया, जे तो मझले छोरा के जैमा (टीका) में वाके ससुराल वारे दै गये, सो है, त्याहरी बुद्धि खराब है गई ये पंडित, जो हमाई भैंसिया को अपनी बताये रये हौ।” इतना सुन कर पंडित का गला सूख गया। पंडित के साथ दो लोग और थे, उनके तो कुछ कहने की स्थिति ही नहीं थी। इस वार्तालाप के बीच मुर्गा बोल गया और लोग इधर-उधर निकलने लगे। सड़क किनारे ही चारपाई पर बैठे पंडित और चोर के पास भी एक-एक कर कई लोग आकर जमा हो गये। पंडित पायें लागैं के अभिवादन के साथ सब आकर पास ही खड़े हो गये। सब इधर-उधर की बातें कर रहे थे, तभी चोर ने ही टॉपिक बदलते हुए कहा कि जे पंडित, जा भैंसिया (इशारा करते हुए) को अपनी बताये रये यें। इतना सुनते ही हुजूम में से एक बोला कि जे भैंसिया तौ इन्ये घरई की ये। दूसरा बोला- नाय, जे बड्डे के ब्याह में मिली। कोई और कुछ बोलता उससे पहले चोर ही बोल पड़ा कि नाय भईया जे मझले के जेमा वारी ये। चोर और पंडित की कई घंटे तक दलीलें चलीं, पर निष्कर्ष कुछ नहीं निकला। अंत में कुछ लोग बोले कि पंडित इतै आवौ। पंडित उठ कर बुलाने वाले के साथ एक कोने में चले गये, तो उसने पंडित से कहा कि देखौ अब मठा घोटन से तौ कछु मिलेगौ नाए, जासे फैसला कर लेयो। पंडित बोले कि कैसो फैसला। जे ई फैसला के भैंसिया तौ आपई की ये, लेकन जाऊ ने पूरी रात महनत करी ये, तौ वो कोई उल्लू थोरई ये, जो वाये कछु नाये मिलेगौ। पंडित बोले कि आपई बताये देयौ के का फैसला है, सोई मान लेवेंगे। यह बात पूरे समूह को बताई गई कि पंडित फैसले को तैयार है। फिर समूह के बीच लाकर पंडित से पूछा गया कि भैंस कितने की है। पंडित ने बताया की बारह हजार की, तो फैसला हुआ कि पंडित छः हजार रूपये देकर भैंस ले जायें। पंडित रुपया लाकर देने का वादा कर चले आये। दो-तीन दिन बाद जाकर पैसे दिए और अपनी भैंस ले आये। यह किसी काल्पनिक कहानी का अंश नहीं, बल्कि गुन्नौर विधान सभा क्षेत्र के एक गाँव बंदरई में घटी सच्ची घटना है। जी हाँ, यह वही गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र है, जिसका प्रतिनिधित्व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव कर चुके हैं। यह विधानसभा क्षेत्र अब तक बदायूं जिले का अंग था, लेकिन अब नये जिले संभल का हिस्सा है।

यूं तो बदायूं जिला ही अति पिछड़ा माना जाता था, लेकिन वर्ष 2004 से पहले गुन्नौर विधान सभा क्षेत्र के हालात और भी बुरे थे। बंजर जमीन और लाल रेत के टीलों के कारण इस क्षेत्र को भूढ़ इलाका कहा जाता था। इस क्षेत्र में खेती से किसान को खुद के पेट भरने लायक भी अन्न नहीं मिलता था, जिससे पूरे इलाके में गरीबी का ही राज था। जहां के लोग दाने-दाने को मोहताज हों, वहां बाकी सब अव्यवस्थायें होना स्वाभाविक ही हैं। इस क्षेत्र में स्कूल, सड़क, नलकूप, हैंडपंप, अस्पताल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नाम मात्र को भी नहीं थीं। घर के नाम पर चार लकड़ियों के ऊपर पड़े घास-फूंस से बने छप्पर के नीचे ही लोग खानाबदोशों जैसी जिन्दगी गुजारने को मजबूर थे, ऐसे हालातों के चलते ही बड़ी संख्या में लोगों ने अपराध का रास्ता चुन लिया था, जो आसपास के क्षेत्रों में जाकर चोरियां करते थे। लूट, राहजनी और डकैती जैसे अपराध ने धंधे का रूप ले लिया था। अपराधियों का खौफ इतना था कि इस इलाके में पुलिस जाने से थर्राती थी और कभी पहुँचती भी थी, तो पुलिस से खुलेआम झड़प होती थी, जिससे इस इलाके में अपराधियों का अपना राज चलता था, लेकिन वर्ष 2004 के बाद तस्वीर बिल्कुल बदल गई। अब इस इलाके को देख कर लगता ही नहीं कि यह वही क्षेत्र है। ऐसा बदलाव कहानियों में होता है। तीन घंटे की फिल्म में भी ऐसे ही चमत्कार होते हैं। आज इस इलाके में हुए विकास कार्य देख कर किसी को भी चमत्कार जैसा ही लगेगा। इस इलाके में अब सब कुछ है। हर गाँव में स्कूल है। हर गाँव में पेयजल की व्यवस्था है। हर गाँव में सिंचाई की व्यवस्था है। हर गाँव में बिजली है। हर गाँव में सड़क है। चिकित्सा की व्यवस्था है। उच्च शिक्षा की व्यवस्था है। वही बंजर जमीन सिंचाई की व्यवस्था होते ही अब सोना उगल रही है। हर गाँव में पक्के घर ही नहीं हैं, बल्कि दो और तीन-चार मंजिला इमारतें नज़र आ रही हैं। अधिकाँश घरों में बाइक और ट्रैक्टर दिख रहे हैं। महिलाओं तक के हाथ में मोबाइल दिख रहे हैं। सबसे पिछड़ा गुन्नौर विधान सभा क्षेत्र आज आसपास के सभी विधान सभा क्षेत्रों से ज्यादा खुशहाल नज़र आ रहा है और यह सब एक अकेले मुलायम सिंह यादव की देन है।

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव वर्ष 2004 में मुख्यमंत्री रहते हुए गुन्नौर विधान सभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़े थे, जिसमें उन्हें रिकॉर्ड एक लाख 84 हजार वोट मिले थे। इस क्षेत्र से जुड़ने के बाद सपा सुप्रीमो को वास्तविक जानकारी हुई, तो उन्होंने विशेष रूप से अभियान चला कर इस पूरे इलाके को संत्रप्त कराया दिया था। इस इलाके के विकास के लिए उन्होंने खजाने का मुंह ही इधर खोल दिया था, जिसको लेकर विरोधी उनकी उस समय आलोचना भी करते थे। इसके अलावा सपा सुप्रीमो को यह जानकारी हुई कि इस क्षेत्र के लोग अवैध हथियार रखने के शौकीन हैं, तो उन्होंने विशाल जनसभा के दौरान गुन्नौर में मंच से यह आह्वान किया कि सब लोग कट्टा (तमंचा) फेंक दें और मंच से ही जिलाधिकारी को निर्देश दिए थे कि इस इलाके से जितने भी आवेदन आयें, उन सबको शस्त्र लाइसेंस जारी कर दें, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने शस्त्र लाइसेंस भी लिए।

बी.पी. गौतम
बी.पी. गौतम

सपा सुप्रीमो के बाद संभल लोकसभा क्षेत्र से प्रो. रामगोपाल यादव सांसद बने, तो उन्होंने भी सपा सुपीमो का क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी। लोकसभा क्षेत्रों का परिसीमन होने के बाद गुन्नौर विधान सभा क्षेत्र संभल से हट कर बदायूं लोकसभा क्षेत्र का अंग हो गया है, जहाँ से वर्तमान सांसद सपा सुप्रीमो के भतीजे धर्मेन्द्र यादव हैं, जो इस इलाके में लगातार विकास कार्य करा रहे हैं। पिछड़े जिले बदायूं में अभूतपूर्व विकास कार्य कराने का श्रेय सपा सुप्रीमो को ही जाता है। बदायूं के लोग भी उस अतुलनीय योगदान का बदला चुकाते रहे हैं, इसीलिए बदायूं को सपा का गढ़ कहा जाने लगा है। वैसे तो सपा सुप्रीमो के चाहने वाले बदायूं जिले के हर गाँव और हर घर में हैं, लेकिन गुन्नौर क्षेत्र की जनता के लिए तो वह अवतार पुरुष के समान हैं, तभी गुन्नौर क्षेत्र के लोग उन्हें देवता जैसा सम्मान देते हैं।

 

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