छोटे अफसरों पर कार्रवाई कर घटना को दबाने का प्रयास

छोटे अफसरों पर कार्रवाई कर घटना को दबाने का प्रयास
बदायूं जिले के उझानी कोतवाली क्षेत्र में दिल्ली हाइवे के किनारे स्थित खोखे में चल रही सरकारी शराब की दुकान।
बदायूं जिले के उझानी कोतवाली क्षेत्र में दिल्ली हाइवे के किनारे स्थित खोखे में चल रही सरकारी शराब की दुकान।

उत्तर प्रदेश में लखनऊ से बाहर के हालात बदतर हैं ही, लखनऊ भी सुरक्षित नहीं है। सोमवार को मलिहाबाद क्षेत्र में जहरीली शराब के चलते कई लोगों की जान जा चुकी है और सौ से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।

घटना रविवार रात की है, जिसकी जानकारी प्रशासन को सोमवार सुबह को तब हुई, जब लोग तड़प-तड़प कर मर रहे थे। बताया जा रहा है कि रविवार को दतली गांव में भुइयां देवी मंदिर के मैदान में क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया था, जिसे देखने लोग आये थे और फिर लोगों ने यहाँ बनी शराब पी। घटना के बाद एक धंधेबाज जुगनू को पकड़ लिया गया है, साथ ही आक्रोशित लोगों ने जुगनू के मकान में शाम को आग भी लगा दी। बताते हैं कि जहरीले कैमिकल से बनी शराब पीने से अब तक लखनऊ और उन्नाव जिले के बीस लोग दम तोड़ चुके हैं और सौ से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।

उधर आबकारी आयुक्त अनिल गर्ग ने बताया कि जहरीली शराब की घटना के प्रकरण की जांच के लिए संयुक्त आबकारी आयुक्त वाराणसी को जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्होंने बताया कि कार्य में शिथिलता बरतने के आरोप में उक्त क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक वाणी विनायक मिश्रा, प्रधान सिपाही श्याम नारायन मिश्रा तथा सिपाही रजनीश कुमार, संजीव कुमार अग्निहोत्री, विनोद कुमार मौर्य, सुमन देवी तथा सीता को तात्कालिक प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। जिला आबकारी अधिकारी लखनऊ लाल बहादुर यादव के विरूद्ध कार्यवाही करने हेतु शासन को संदर्भित किया गया है। उन्होंने बताया कि लखनऊ थाना मलिहाबाद की कार्य प्रणाली की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लखनऊ द्वारा निर्धारित की जायेगी।

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार मलिहाबाद के क्षेत्राधिकारी श्यामाकांत त्रिपाठी, इंंस्पेक्टर अमर सिंह रघुवंशी, उपनिरीक्षक और तीन आरक्षी निलंबित कर दिये गये हैं। इसके अलावा मृतक आश्रितों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है और बीमार व्यक्तियों का मुफ्त इलाज कराया जायेगा, लेकिन यहाँ सवाल यह उठता है कि आबकारी विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है, तो उन्होंने स्वयं जिम्मेदारी लेते हुए आबकारी आयुक्त के विरुद्ध कार्रवाई क्यूं नहीं की?

शराब का अवैध धंधा प्रदेश भर में चल रहा है, जिसे बंद कराने से पहले वैध धंधे को भी सही करना पड़ेगा। सरकारी दुकानों के हालात भी अवैध धंधेबाजों जैसे ही हैं। बदायूं जिले में तो शराब की दुकानें खोखों में चल रही हैं, लेकिन शिकायत के बावजूद कार्रवाई तो दूर की बात, कोई जाँच तक करने को तैयार नहीं है।

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