ट्रैक्टर और जेसीबी सीज कर के खनन माफिया मदन सिंह नेगी को बचाया

ट्रैक्टर और जेसीबी सीज कर के खनन माफिया मदन सिंह नेगी को बचाया
कासगंज जिले की सीमा में खड़े खनन माफिया के ट्रैक्टर-ट्रॉली।

बदायूं जिला और आसपास की सीमा पर खनन माफिया पूरी तरह हावी हो गया है। अत्याधुनिक मशीनों के द्वारा गंगा के सीने को रात-दिन माफिया चीर रहा है। हालाँकि दो दिन पूर्व पुलिस ने कार्रवाई भी की थी, लेकिन राजनैतिक और आर्थिक दबाव के चलते कार्रवाई की औपचारिकता कर के मामले को दबा दिया गया। माफियाराज के चलते भाजपा सरकार की आम जनता के बीच छवि बेहद खराब हो रही है।

अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार ने तमाम सराहनीय कार्य किये थे, लेकिन खनन माफियाओं के आतंक के नीचे उनके अच्छे कार्य दब गये। गंगा और अन्य नदियों को बर्बाद करने वालों पर जनता भड़क उठी थी। भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनने में खनन माफियाओं के प्रति जनता का गुस्सा भी एक बड़ा कारण रहा है। भाजपा की सरकार बनने पर जनता को लग रहा था कि अब खनन में माफिया राज पूरी तरह समाप्त हो जायेगा। सरकार बनते ही मुरादाबाद के मदन सिंह नेगी को खनन का ठेका दे दिया गया, तो जनता को लगा कि अब सिर्फ नियमानुसार ही कार्य होगा, लेकिन सरकारी ठेका लेने वाला मदन सिंह नेगी भी माफिया ही निकला।

ठेका होते ही मदन सिंह नेगी की जगह-जगह अत्याधुनिक मशीनें जुट गईं और रात-दिन गंगा का सीना चीरने लगीं, यह सब देख कर आम जनता का दिल टूट गया। बिना ठेके के सपा सरकार में खनन करने वाले माफिया सहमे रहते थे, उन्हें अहसास रहता था कि गलत काम कर रहे हैं, पर मदन सिंह नेगी दबंगई के साथ खुलेआम अवैध तरीके से खनन करा रहा है। खनन विभाग पर उसका पूरा शिकंजा है। खनन विभाग के अफसर शिकायत के बावजूद जांच तक करना उचित नहीं समझते।

बदायूं जिले में कई जगह अवैध खनन हो रहा है। जिले की सीमाओं पर भी जगह-जगह मशीनें चल रही हैं। कासगंज जिले के थाना सिकंदरपुर वैश्य क्षेत्र का गाँव नियाजी नगला गंगा के इस बार है, यहाँ एक दर्जन से अधिक जेसीबी रात-दिन अवैध खनन कर रही थीं, साथ ही असंख्य ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर रेत ढोने में जुटे हुए थे, जबकि 30 सितंबर तक खनन पर सरकार ने पूरी तरह रोक लगा रखी है। आम जनता के बीच पुलिस की भी बड़ी फजीहत होने लगी, तो बदायूं जिले की पुलिस ने बुधवार की रात में कासगंज जिले के गाँव नियाजी नगला क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के स्थान पर छापा मारा। पुलिस ने मौके पर मौजूद खनन माफिया के लोगों को घेर लिया। सूत्रों का कहना है कि छापा पड़ते ही उच्चस्तरीय राजनैतिक और आर्थिक दबाव पड़ने लगे, जिससे पुलिस ने दो जेसीबी और दो ट्रैक्टर-ट्रॉली सीज कर के मामला दबा दिया, जबकि मौके पर दो दर्जन से अधिक जेसीबी बताई जा रही थीं, साथ ही 30 सितंबर तक पूरी तरह खनन पर रोक होने के चलते मदन सिंह नेगी के विरुद्ध संबंधित धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, पर पुलिस ने किसी तरह का मुकदमा दर्ज नहीं किया। पुलिस का कहना है कि मुकदमा खनन विभाग के इंस्पेक्टर की ओर से लिखाया जाता है, वे लिखायेंगे, तो दर्ज कर लिया जायेगा।

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