सांसद की चापलूसी में जुटे बाबू ने रुकवा दी सरस्वती वंदना

सांसद की चापलूसी में जुटे बाबू ने रुकवा दी सरस्वती वंदना
चापलूसी करता बाबू अक्षत अशेष और नजर अंदाज करते सांसद धर्मेन्द्र यादव।
चापलूसी करता बाबू अक्षत अशेष और नजर अंदाज करते सांसद धर्मेन्द्र यादव।
बदायूं के लोकप्रिय सांसद धर्मेन्द्र यादव का सबसे बड़ा गुण यह है कि वह बदनाम और चापलूस किस्म के व्यक्ति से दूरी बना कर रखते हैं। चापलूसी के बल पर स्वयं की ब्रांडिंग करने के लिए दास कॉलेज का बाबू अक्षत अशेष बदायूं में बदनाम है। सांसद धर्मेन्द्र यादव इससे दूरी बना कर रखते रहे हैं, तो उनकी आलोचना करने लगा। बदायूं की राजनैतिक स्थितियों में परिवर्तन हुआ, तो गिरगिट से भी तीव्र गति से रंग बदल गया और खुल कर सांसद की चापलूसी में जुट गया। 3 सितंबर को आयोजित किये गये कार्यक्रम में भी कुछ क्षणों के लिए मंच पर गया और सांसद के कान में कुछ कहते हुए देखा गया, इस दौरान सैकड़ों लोगों के बीच हास्य का पात्र बन गया।
ज्ञात हुआ कि शिक्षक दिवस पर बदायूं क्लब में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सांसद को आमंत्रित करने गया था। अव्यवस्थाओं के बीच आयोजित किये गये कार्यक्रम में सांसद पहुंचे तो, लेकिन उन्होंने बाबू को भाव नहीं दिया, जबकि बाबू चापलूसी की हद पार कर गया और सांसद के पहुंचते ही बीच में सरस्वती वंदना गा रही छात्राओं को रोक दिया, इस पर सांसद का मन और ज्यादा खराब हो गया। भले ही बाबू सही, लेकिन इसे इतना तो ज्ञान होना ही चाहिए था कि शिक्षकों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों के बीच में सरस्वती वंदना का क्या महत्व होता है?
शिक्षक का सम्मान करते समय भाव-भिवोर हो गये सांसद धर्मेन्द्र यादव।
शिक्षक का सम्मान करते समय भाव-भिवोर हो गये सांसद धर्मेन्द्र यादव।
बाबू अक्षत अशेष का ध्यान पूरी तरह सांसद को आकर्षित करने में लगा हुआ था, सो वह भूल ही गया कि मंच पर अतिथियों से कम कुर्सियां हैं। सांसद के साथ पहुंचे डीसीबी के चेयरमैन ब्रजेश यादव व अन्य सभी जनप्रतिनिधि बैठ गये, लेकिन मौलाना यासीन उस्मानी कुर्सी न होने के कारण खड़े रहे, तो अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अशोक कुमार श्रीवास्तव खड़े हो गये और अपनी जगह उन्होंने मौलाना यासीन उस्मानी को बैठा दिया, इसके बाद एक व्यक्ति ने एडीएम को सामने से उठा कर कुर्सी दी, जिस पर वह बैठे, लेकिन इस अव्यवस्था के लिए क्षमा मांगने की जगह बाबू उस समय माइक पर सांसद की चापलूसी करने में जुटा रहा।
खैर, शिक्षक सम्मान समारोह शुरू हुआ, जिसके मुख्य अतिथि सांसद धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि अच्छे कार्य करने वालों का सम्मान करने से समाज के और लोगों को अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जनपद का विकास करने के प्रति वह निरन्तर प्रयासरत हैं, इससे पूर्व जनपद शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा हुआ था, अब यहां सरकारी इंटर तथा डिग्री कॉलेजों की कोई कमी नहीं है।
प्रदेश के राज्य श्रम संविदा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष, राज्यमंत्री मौलाना यासीन अली उस्मानी ने कहा कि देश तथा समाज का उज्जवल भविष्य अच्छे शिक्षकों पर टिका है। उन्होंने कहा कि समाजिक व्यवस्था के साथ धार्मिक ग्रन्थों में भी गुरू का दर्जा बड़ा सम्मानीय बताया गया है, इसलिए शिक्षक का पेशा बहुत पवित्र पेशा है।
एडीएम (प्रशासन) को कुर्सी उठा कर देता एक व्यक्ति।
एडीएम (प्रशासन) को कुर्सी उठा कर देता एक व्यक्ति।
समारोह में शिक्षक सुरेश चन्द्र सक्सेना, आचार्य सरनाम सिंह, डाक्टर अजमत उल्ला खां, अनवार उददीन, हरिश चन्द्र सक्सेना, आचार्य राधेश्याम अवस्थी, अनिरूद्ध शर्मा को शॉल ओढ़ाकर तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी, चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी, शेखूपुर के विधायक आशीष यादव, प्रदेश के खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रदीप यादव, सांसद के प्रतिनिधि अवधेश यादव, सुरेश पाल सिंह चौहान, नगर मजिस्ट्रेट अजय कुमार श्रीवास्तव सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारीगण मौजूद रहे।
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