जाते-जाते सफेदपोश को बचा गये कोतवाल और एसएसआई

जाते-जाते सफेदपोश को बचा गये कोतवाल और एसएसआई
पुलिस की शह पर गायब होने के बाद शेष बची प्रतिबंधित लकड़ी।
पुलिस की शह पर गायब होने के बाद शेष बची प्रतिबंधित लकड़ी।

बदायूं जिले की कोतवाली सहसवान से जाते-जाते प्रभारी सब-इंस्पेक्टर और एसएसआई सफेदपोश माफिया को बचा गये। बड़ी तादात में प्रतिबंधित लकड़ी पकड़ी गई थी, जिसमें से दोनों ने मिल कर ज्यादातर लकड़ी गायब करा दी, जिससे अब कार्रवाई नहीं हो पायेगी। लकड़ी में पुलिस विभाग के एक बड़े अफसर का भी हिस्सा बताया जा रहा है, इसीलिए प्रकरण जनता के साथ पुलिस विभाग में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

सोमवार शाम सहसवान में आम और नीम की सैकड़ों कुंतल प्रतिबंधित लकड़ी पकड़ी गई थी। वन विभाग, पुलिस व प्रशासन के अफसर तहरीर तैयार कर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहे थे। एसडीएम ने लकड़ी के पकड़ने की पुष्टि करते हुए कहा था कि मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है, लेकिन सोमवार की देर रात कोतवाली प्रभारी कश्मीर सिंह यादव का फैजगंज बेहटा के लिए तबादला हो गया, साथ ही एसएसआई अरविंद यादव का कोतवाली उझानी तबादला हो गया, तो लकड़ी प्रकरण में हो रही कार्रवाई रोक दी गई।

बताते हैं कि सफेदपोश लकड़ी तस्कर के कश्मीर सिंह यादव और अरविंद यादव से गहरे संबंध हैं और इन दोनों की शह पर ही सफेदपोश अन्य तमाम आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा है, इसी लकड़ी तस्कर के संरक्षण में क्षेत्र में बड़े स्तर पर प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी होती रही है। बताया जा रहा है कि तबादला होने की भनक लगते ही कश्मीर सिंह यादव और अरविंद यादव ने मौके से लकड़ी गायब करा दी। सूत्रों का यह भी कहना है कि शीशम की लकड़ी में पुलिस विभाग के एक अफसर का भी हिस्सा है, जिससे पूरे मामले को दबा दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो ने आज दिल्ली में बैठक बुलाई थी। प्रकरण के तूल पकड़ते ही सफेदपोश बसपा में सम्मिलित होने के लिए रात में ही दिल्ली भाग गया था, जबकि अब तक स्वयं को निर्दलीय बताता रहा है।

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