संस्कृत के उत्थान में धन की कमी आड़े नहीं आयेगी: मुख्यमंत्री

संस्कृत के उत्थान में धन की कमी आड़े नहीं आयेगी: मुख्यमंत्री
 

जनेश्वर मिश्र संस्कृत विदुषी सम्मान से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. किश्वर जबीं नसरीन को सम्मानित करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
जनेश्वर मिश्र संस्कृत विदुषी सम्मान से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. किश्वर जबीं नसरीन को सम्मानित करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी लोग सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं। भाषाएं हमारे देश को जोड़ने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सभी भाषाओं को प्रोत्साहन दे रही है।
मुख्यमंत्री ने ये विचार आज लखनऊ स्थित संगीत नाटक आकदमी में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् द्वारा आयोजित जनेश्वर मिश्र संस्कृत विदुषी सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संस्कृत को भाषाओं की जननी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह देवताओं की भाषा है और अत्यंत समृद्ध भी है। उन्होंने कहा कि स्व0 जनेश्वर मिश्र जी की जयन्ती पर उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम अत्यंत सराहनीय है।
श्री यादव ने कहा कि स्व0 मिश्र समाजवादी विचारधारा से ओत-प्रोत व्यक्ति थे और छोटे लोहिया के नाम से मशहूर थे। उन्होंने कहा कि आज उनकी जयंती के अवसर पर हम सभी उनके व्यक्तित्व एवं उनकी विचारधारा से प्रेरणा ले रहे हैं। उन्होंने सदैव गरीबों, वंचितों, शोषितों, अल्पसंख्यकों तथा समाज के दबे-कुचले लोगों के उत्थान के लिए तथा समाज से गैर बराबरी समाप्त करने के लिए प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी जयन्ती पर आयोजित यह कार्यक्रम उनके व्यक्तित्व के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि समाजवाद आज देश की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को सेक्युलर लोगों की सख्त जरूरत है।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने इस वर्ष से आरम्भ किए जा रहे जनेश्वर मिश्र संस्कृत विदुषी सम्मान से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. किश्वर जबीं नसरीन को सम्मानित किया। प्रो. नसरीन को पुरस्कार स्वरूप 1,51,000 रुपये नगद, प्रशस्ति पत्र तथा अंगवस्त्रम् देकर सम्मानित किया गया। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके उपरान्त उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् के अध्यक्ष शंकर सुहैल द्वारा स्व0 जनेश्वर मिश्र पर निर्मित एक लघुचित्र का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् की तरफ से शाल उढ़ाकर तथा बुके भेंटकर सम्मानित भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत की गयी नृत्य नाटिका ‘आम्रपाली’ का भी अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि स्व0 जनेश्वर मिश्र की जयन्ती पर जनेश्वर मिश्र संस्कृत विदुषी सम्मान समारोह के साथ-साथ 5 व 6 अगस्त को नृत्य नाटिका ‘आम्रपाली’, ‘दूतवाक्यम्’ नाटक एवं लोक गायन का भी आयोजन किया जा रहा है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् के अध्यक्ष शंकर सुहैल ने भी विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि ये सम्मान समारोह अब प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा। उन्होंने संस्कृत संस्थानम् के कार्यकलापों पर प्रकाश भी डाला तथा संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम के दौरान राजनैतिक पेंशन मंत्री राजेन्द्र चौधरी, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्यमंत्री अभिषेक मिश्र के अतिरिक्त प्रदेश मंत्रिमण्डल के कई सदस्य मौजूद थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संस्कृत भाषा के प्रेमी तथा गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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