रोमियो इंस्पेक्टर संत प्रसाद उपाध्याय के सह-आरोपी मुंशी सूरज पाल को बचाया

रोमियो इंस्पेक्टर संत प्रसाद उपाध्याय के सह-आरोपी मुंशी सूरज पाल को बचाया
मुंशी सूरज पाल

बदायूं जिले की कोतवाली बिसौली में तैनात मुंशी सूरज पाल पीड़ित लड़की द्वारा की गई शिकायत में इंस्पेक्टर संत प्रसाद उपाध्याय के साथ आरोपी है, लेकिन उसके विरुद्ध अभी तक कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि उसके विरुद्ध भी तत्काल प्रभाव से कार्रवाई होनी चाहिए थी। पीड़ित को आशंका है कि वह जाँच प्रभावित कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गाँव बावेपुर निवासी एक सभ्रांत परिवार में 5 फरवरी को बारात आने वाली थी, जिसकी तैयारी को लेकर घर के सामने ग्राम समाज की जमीन पर सफाई कराई जा रही थी, इस जमीन पर गाँव के ही एक व्यक्ति ने अवैध कब्जा कर रखा है, उसने पुलिस से शिकायत दी। मौके पर पहुंची पुलिस ट्रैक्टर ड्राईवर को पकड़ ले गई। गृह स्वामी के बेटे-बेटी बरेली में भी रहते हैं, जिन्हें घटना के संबंध में जानकारी हुई, तो बेटी ने गूगल से इंस्पेक्टर बिसौली का नंबर सर्च कर फोन पर आग्रह कर दिया कि झूठी शिकायत पर गैर कानूनी कार्रवाई न करें। इंस्पेक्टर संत प्रसाद उपाध्याय ने ड्राईवर को तो तत्काल छोड़ दिया, लेकिन वे लड़की को सीयूजी नंबर पर ही चल रहे वाट्सएप पर अमर्यादित भाषा में मैसेज करने लगे।

लड़की ने आपत्ति की, तो भी इंस्पेक्टर ने वाट्सएप पर मैसेज करने बंद नहीं किये। एसएसपी से शिकायत करने की चेतावनी दी, तो चेतावनी को भी उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया। झल्ला कर लड़की ने नंबर ब्लॉक कर दिया, इस पर संत प्रसाद उपाध्याय चिढ़ गये और गाँव के दूसरे पक्ष से कह कर पीड़ित के घर पर फायरिंग करवा दी, साथ ही लड़की के पिता को उल्टा गिरफ्तार कर लिया और प्रताड़ित करने के बाद उनका शांति भंग करने की आशंका में चालान कर दिया। फोन कर के लड़की पर पुनः दबाव बनाया कि वह मिले और बात करे। हालात बिगड़ने पर पीड़ित लड़की भाई के साथ बरेली जोन के आईजी से मिलने गई, तो उसे एक सिपाही ने नहीं मिलने दिया। पीड़ित लड़की भाई के साथ दौड़ते हुए डीआईजी रेंज आशुतोष कुमार के पास पहुंची, तो प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संत प्रसाद उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर जाँच के आदेश दे दिए। मुकदमा भी दर्ज किया जायेगा।

उक्त शिकायत में पीड़ित लड़की का यह भी आरोप है कि मुंशी सूरज पाल ने गैर कानूनी कृत्य में इंस्पेक्टर संत प्रसाद उपाध्याय का साथ दिया, उसके पिता को थाने में बंद कर रात भर प्रताड़ित किया। इंस्पेक्टर के साथ मुंशी सूरज पाल के विरुद्ध भी तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन उसे बचा दिया गया है। पीड़ित को आशंका है कि सूरजपाल जाँच प्रभावित कर सकता है।

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