जो राष्ट्र नागरिकों की मृत्यु पर गंभीर नहीं, वह राष्ट्र नहीं

जो राष्ट्र नागरिकों की मृत्यु पर गंभीर नहीं, वह राष्ट्र नहीं
इंडोनेशिया की रेल का शानदार दृश्य।
इंडोनेशिया की रेल का शानदार दृश्य।
विश्व भर की यातायात व्यवस्था में रेल की महत्वपूर्ण भूमिका है विश्व में बहुत बड़ा वर्ग रेल की यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित मानता है जापान की रेल से लोग घड़ी मिला सकते हैं समय पर आने और जाने को लेकर जापान की रेल विश्व प्रसिद्ध हैंरेल का अपना एक इतिहास है, जो अदभुत और रोमांचकारी भी है विश्व में कई रेल मार्ग ऐसे हैं, जो संबंधित देशों की पहचान बन गये हैं, इनमें अमेरिका में स्थित न्यू मैक्सिको के क्युम्बर्स और टॉलटेक सीनिक रेल मार्ग की बात करें, तो 64 मील लंबे इस रेल मार्ग का निर्माण 1880 में किया गया था, यह अमेरिका का सबसे ऊंचा रेल मार्ग है, साथ ही मनोहारी प्राकृतिक दृश्यों के चलते वहां की मुख्य पहचान बना हुआ है। अमेरिका में ही जॉर्ज टाउन लूप रेल मार्ग को धरोहर कहा जाता है, इस मार्ग का मुख्य आकर्षण 100 फुट ऊंचा डेविल्स गेट हाई ब्रिज है। अमेरिका में व्हाइट पास और युकोन मार्ग को भी यादगार कहा जाता है, यह मार्ग 3000 फिट की ऊंचाई तक 20 मील के रास्ते में चढ़ाई करता है और 1901 में बने 110 फिट ऊंचे कप्तान विलियम मूर पुल पर चलना आनन्ददायक होता है।
ऑस्ट्रेलिया का 34 कि.मी. लंबा कुरंड सीनिक रेल मार्ग विश्व की धरोहर माना जाता है, अत्यंत घने वर्षावन से गुजरने के कारण अद्वितीय सौंदर्य के दर्शन कराता है, इस मार्ग पर रेल 15 सुरंगों, 93 मोड़ों और 40 पुलों पर से होकर गुजरती है, इस अदभुत मार्ग का निर्माण 1891 में पूर्ण हुआ था। इंडोनेशिया का एर्गो गेडे रेल मार्ग पर धड़कन थम जाती है, यह मार्ग हरे मैदानों और निर्जन पहाड़ों पर से होकर गुजरता है, साथ ही 200 फिट ऊंचे सिकुरतुग पुल को पार करना सर्वाधिक रोमांचकारी होता है। अर्जेंटीना में साल्ता व ला पोल्वोरिला रेल मार्ग को आसमान पर बना रेलमार्ग (ट्रेन अ लास न्यूब्स) कहा जाता है। एंडीज पर्वत श्रृंखला में फैले 217 कि.मी. लंबे टेढ़े-मेढ़े सफर के दौरान 29 पुल, 21 सुरंग और 13 भयानक खाई आती हैं, इस मार्ग का मुख्य आकर्षण 224 मीटर लंबा और 13,845 फिट ऊँचा पोल्वोरिला सेतु है, यहीं इक्वाडोर में डेविल्स नोज़ रेल मार्ग है, इस 12 कि.मी. लंबे रेल मार्ग को समुद्रतल से 9000 फिट ऊपर बताया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया की रेल का एक मनोरम दृश्य।
ऑस्ट्रेलिया की रेल का एक मनोरम दृश्य।
ब्रिटेन के ल्यंटों और लिंमाउथ क्लिफ रेल मार्ग की यात्रा को 500 फिट ऊंची सीधी चढ़ाई रोमांचकारी बना देती है, इसी तरह तमाम ऐसे रेल मार्ग हैं, जो संबंधित देशों की पहचान बन गये हैं। कहीं बर्फ को हटा कर चलने वाली रेल है, कहीं पानी के अंदर से गुजरने वाली रेल है, कहीं सबसे बड़ी गुफा से गुजरने वाली रेल चलती है, इसी तरह कहीं सबसे लंबा प्लेट फॉर्म है, तो कहीं जमीन के अंदर प्लेट फॉर्म है, ऐसी गौरवान्वित कर देने वाली चीजें भारत में भी हैं
भारतीय रेल के संबंध में विश्व स्तर पर यही छवि है, जो चित्र में दिख रही है।
भारतीय रेल के संबंध में विश्व स्तर पर यही छवि है, जो चित्र में दिख रही है।
भारत में 16 अप्रैल 1853 में रेल की शुरुआत हुई थी, जो अब एकल प्रबंधन के रूप में विश्व की सबसे बड़ी व्यवस्था है, यहाँ की सभी पटरियों को आपस में जोड़ दिया जाये, तो पृथ्वी के आकार से 1.5 गुना ज्यादा लंबी होगी, यह भी गर्व का विषय है कि मृत्यु निश्चित होने के बावजूद आज तक भारत में किसी रेल ड्राईवर रेल ने छलांग नहीं लगाई है। नवापुर रेलवे स्टेशन महाराष्ट्र और गुजरात, दोनों राज्यों में है। मेट्टुपलायम ओट्टी नीलगीरी पैसेंजर रेल इतनी धीरे चलती है कि यात्री चलती रेल में चढ़ और उतर सकते हैं। गोवाहाटी-त्रिवेन्दरम् एक्सप्रेस हमेशा देर से चलती है और इसे सर्वाधिक देरी से चलने वाली रेल माना जाता है डिब्रुगढ़ (असम) से कन्याकुमारी तक 4273 कि.मी. की दूरी तय करने वाली विवेक एक्सप्रेस सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन है। पैलेस ऑन व्हील्स यात्री रेल तो नहीं है, लेकिन यह बेहद चर्चित है।
बी. पी. गौतम
बी. पी. गौतम
भारतीय रेल को देश की लाइफ लाइन माना जाता है, विकास में भी रेल की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन वैश्विक स्तर पर भारतीय रेल को सम्मानित स्थान प्राप्त नहीं है वैश्विक स्तर पर रेल की बात होती है, तो भारतीय रेल के संबंध में कहा जाता है कि भारत की रेल समय से नहीं चलती और उनमें गंदगी के साथ बहुत भीड़ रहती है, यहाँ द्वारों और खिड़कियों पर लटक कर और छत पर बैठ कर यात्रा की जाती है, जिससे यहाँ की रेल यात्रा जान जोखिम में डालने जैसी होती है आंकड़े बताते हैं कि सामान्यतः प्रतिवर्ष 38 से 44 रेल यात्री लटकने और छत पर बैठ कर यात्रा करने के कारण मर जाते हैं, इन आंकड़ों में बड़े रेल हादसे सम्मलित नहीं है रविवार की सुबह पुखरायां स्टेशन पर इंदौर-पटना एक्सप्रेस 19321 की 14 बोगियां पटरी से उतर गईं, जिससे सौ से अधिक निर्दोष यात्री असमय ही काल का शिकार हो गये, ऐसी घटनायें न सिर्फ रेलवे को, बल्कि विश्व में भारत के लिए शर्मसार कर देने वाली हैं जिस राष्ट्र में सामान्य यात्रा भी इतनी जोखिम भरी है, उस राष्ट्र के विकसित होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती जो राष्ट्र अपने नागरिकों की अकारण हुई मृत्यु पर गंभीर नहीं है, वह राष्ट्र होने का अधिकार खो देता है, इसलिए पुखरायां स्टेशन पर हुआ रेल हादसा भारत का अंतिम रेल हादसा होना चाहिए और यही सरकार की चिंता का मापदंड माना जाना चाहिए। सरकार न सिर्फ हादसे रोकने की दिशा में कार्य करे, बल्कि यात्रा को सुविधाजनक और आरामदायक भी बनाये, इस दिशा में सरकार को अपना प्रथम कर्तव्य मान कर कार्य करना चाहिए।

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