न्यायालय के पत्र को गंभीरता से न लेने वाले सीएमओ फंसे

न्यायालय के पत्र को गंभीरता से न लेने वाले सीएमओ फंसे
सिपाहियों द्वारा यौन शोषण का शिकार किशोरी।
सिपाहियों द्वारा यौन शोषण का शिकार किशोरी।

बदायूं के चर्चित मूसाझाग कांड में चल रही न्यायिक जांच को गंभीरता से न लेना सीएमओ को भारी पड़ सकता है। न्यायालय ने नोटिस जारी कर शनिवार को न्यायालय में हाजिर होने का आदेश जारी किया है।
उल्लेखनीय है कि बदायूं जिले में स्थित मूसाझाग थाना क्षेत्र के गाँव प्रहलादपुर निवासी एक महिला ने 1 जनवरी को एसएसपी को प्रार्थना देकर कहा था कि 31 दिसंबर को उसके पति आँखों का इलाज कराने बरेली गये हुए थे और वह बेटी के साथ घर पर थी। मूसाझाग थाने में तैनात सिपाही अवनीश यादव व सिपाही वीरपाल यादव सिरसा गाँव की ओर से कार से आये और शौच को गई उसकी 14 वर्षीय बेटी को उठा ले गये, साथ ही बाद में उसका यौन शोषण कर छोड़ गये। महिला का आरोप है कि सिपाहियों ने उसकी बेटी के साथ थाने में दुष्कर्म किया। इस प्रकरण में मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया गया है एवं दोनों आरोपी सिपाही जेल जा चुके हैं।
उक्त प्रकरण की न्यायिक जांच भी चल रही है। एसीजेएम द्वितीय राकेश कुमार ने सीएमओ को निर्देश दिए थे कि शुक्रवार को किशोरी का मेडिकल परीक्षण करने वालों डॉक्टर्स को न्यायालय में भेजें, लेकिन आज डॉक्टर्स नहीं आये, साथ ही सीएमओ की ओर से न्यायालय में एक पत्र आया, जिसमें कहा गया था कि डॉक्टर्स को बुलाने के लिए सीएमस से पत्रचार करें, इस पत्र को न्यायालय ने अवमानना के रूप में लेते हुए सीएमओ को नोटिस जारी किया है कि शनिवार को वे न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों, साथ ही सवाल किया है कि उन्हें आरोपियों को बचाने के प्रयास का दोषी क्यूं न माना जाये?

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