साक्षात्कार: हम को चौपट विरासत मिली है: मुख्तार अब्बास

साक्षात्कार: हम को चौपट विरासत मिली है: मुख्तार अब्बास
भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी
भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी

भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी और उनकी पत्नी सीमा धर्मनिरपेक्षता का उज्जवलंत उदाहरण हैं, जिनके घर में दीवाली या ईद, हर त्योहार चरम उत्साह से मनाया जाता है। शबे बरात के उपलक्ष्य में सीमा के हाथों बनाए गए सूजी के हलवे का आनंद लेते हुए हमने मुख्तार अब्बास नकवी से बात की। पेश है प्रांरभ से संगठन में जुड़े रहकर कदम बकदम आगे बढ़ने वाले और कई दशकों से भाजपा के मुस्लिम फेस के रूप में पहचाने जाने वाले नेता से बातचीत के अंश:

पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपने के पश्चात मुख्तार अब्बास नकवी घर लौटे, तो हम उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रतीक्षा क्या कर रहे थे, बल्कि नकवी साहब की पत्नी सीमा के हाथों बने लजीज सूजी के हलवे का आनंद ले रहे थे।

गत 16 मई को भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, तो मुख्तार अब्बास नकवी ने ट्वीट किया थाः ‘जज्बे और जनादेश को सलाम’। नकवी साहब के आते ही इसी ट्वीट को पृष्ठभूमि बनाते हुए हमने उन पर प्रश्नों की झड़ी लगा दी, जिसका उन्होंने अपने चिर-परिचित शांत स्वभाव में उत्तर दिया।

सवाल- “कांग्रेस के राज से त्रस्त और नरेंद्र मोदी की एक कर्मठ और विकासशील व्यक्ति की छवि के कारण भाजपा सत्ता में तो आ गई, परन्तु अब जनता की बढ़ी आकांक्षाओं पर कैसे पूरा उतरने का विचार है?”

जवाब- ‘‘विरासत में सियासत का जो परंपरागत तरीका है, वह तो हम करेंगे नहीं,’’। ‘‘हमें चौपट विरासत मिली है। महंगाई की विरासत, घोटालों की विरासत, कुशासन की विरासत! इसी कारण हम सत्ता में आए हैं। हमको इसे ठीक करना है। इसके लिए एक सकारात्मक सोच और संकल्प के साथ हमने जो कार्य प्रारंभ किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाएंगे। महंगाई बहुत बड़ा चैलेंज अवश्य है, परन्तु इस पर अंकुश लगाए रखने पर हमने काम शुरू कर दिया है। बेरोजगारी भी बड़ा चैलेंज है। देश का माहौल यदि ठीक रहेगा, तो सारी समस्याओं का समाधान निकल सकेगा। ऐसा नहीं है कि पहले कुछ काम नहीं हुआ है। परन्तु देश का माहौल ठीक नहीं था। उस खराब माहौल को हम पटरी पर लाएंगे।’’

सवाल- ‘‘क्या यह सही है कि इस बार पहले के मुकाबले अधिक मुसलमानों ने भाजपा को वोट दिया,?’’

जवाब- ‘‘हमारा मानना है हमें करीब 20 प्रतिशत कामयाबी मिली। मुसलमानों ने मेरिट-डीमेरिट पर करीब 20 प्रतिशत तक वोट दिया। 80 प्रतिशत मुसलमानों ने भाजपा को वोट नहीं दिया। अब चुनाव हो चुका है और हमने सरकार बना ली है। अब मुद्दा यह नहीं है कि मुसलमानों ने 16 प्रतिशत वोट दिया या 20 प्रतिशत वोट दिया। देश को चलाने के लिए अब हमें मुसलमानों में विश्वास और भरोसा पैदा करना होगा। जैसा कि मैंने संसद में क्हा, मुसलमानों की सब से बड़ी समस्या उनके साथ भेदभाव, गरीबी और बेरोजगारी हैं। इसके अतिरिक्त गरीबों की जो भी समस्याएं होती हैं, वह सब समस्याएं भी हैं। परन्तु सब से बड़ी समस्या वह डर है, जो उनके मन में बिठा दिया गया है। कौन कब उन्हें आतंकवादी बना कर जेल में डाल दे, कौन उन्हें देश द्रोही बना दे, यह डर उन्हें खाए जाता है। हम इसको दूर करेंगे। हम इसको वोट से जोड़ कर नहीं देखते। देश के इतने बड़े तबके में यदि डर है और वह प्रगति की मुख्यधारा से कटा है, तो यह देश के हित में नहीं है। हमें इसको दूर करना होगा।’’

‘‘मुसलमानों के साथ जुड़ी बड़ी समस्याएं आर्थिक सामाजिक और शैक्षिक हैं। परन्तु उनका राजनीतिक सशक्तीकरण भी एक बड़ा मुद्दा है। किसी भी लोकतंत्र में यह आवश्यक होता है कि कोई गुट इससे अछूता न रह जाए। न्यायपालिका, नौकरशाही, पुलिस और प्रशासन में उनकी उपस्तिथि कम से कम होती गई है। इस बार तो लोकसभा में भी उनकी उपस्थिति में कमी आई है। राजनीतिक सशक्तीकरण के नाम पर लोगों ने बहुत कुछ क्हा, परन्तु इस क्षेत्र में अब तक कुछ हो नहीं पाया। हमारा मानना है कि जब तक हम इतने बड़े समाज को प्रगति की मुख्यधारा में नहीं लाएंगे, देश की तरक्की बाधित रहेगी।’’

सवाल- “कांग्रेस का बेसुरा ट्यून कैसे जारी है?”

जवाब- ‘‘हम ने जिन्दगी में बहुत सारे उतार चढ़ाव देखे हैं। हम 2 से 282 सांसद हो गए। कांग्रेस पार्टी 200 से 40 पर आकर खड़ी हो गई। ऐसा कितनी ही बार हुआ है। लेकिन कांग्रेस में लीडरशिप और दृष्टि का जो अभाव है, वह उसे हानि पहुंचा रहा है। इतने खराब हालात होने के बावजूद वह चिंतन नहीं कर पा रहे हैं कि यह सब कैसे हो गया। मुद्दे केवल महंगाई, बेरोजगारी आदि नहीं हैं। मुद्दा यह है कि कांग्रेस अवाम से जुड़ नहीं पाई। उदाहरण के रूप में मुसलमानों को पेश किया जा सकता है। वे भाजपा को वोट नहीं दिया करते थे, परन्तु कांग्रेस के तो वे स्वाभाविक वोटर थे। वह भी कांग्रेस से छिटक गए। कांग्रेस न तो उनसे कनेक्ट कर पाई, न ही समस्या को समझ पाई।’’

‘‘ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के राज में अच्छे काम नहीं हुए। लेकिन वह लोगों तक पहुंच ही नहीं पाए। पालिसी बना देना, उस पर पैसे बहा देना अलग चीज है और वह लाभ लोगों तक पहुंचे यह अलग। सरकार अपना इकबाल समाप्त कर चुकी थी। पालिसी बनती थी, परन्तु सत्ता के इर्द गिर्द बैठे लोगों के बीच ही बन्दरबाँट होकर समाप्त हो जाती थी। अवाम उन पालिसियों से अछूते ही रहे। यही कारण है कि वे अपने को ठगा-ठगा सा महसूस कर रहे थे।’’

अजीज हैदर/आर. एन. आई. न्यूज नेटवर्क

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