धार्मिक मान्यता के विरुद्ध पुलिस ने किशोरी का शव जलवाया

धार्मिक मान्यता के विरुद्ध पुलिस ने किशोरी का शव जलवाया
पीड़ित दलित परिवार से बात करते एससी-एसटी आयोग के मंडल को-आर्डिनेटर सतीश प्रेमी।
पीड़ित दलित परिवार से बात करते एससी-एसटी आयोग के मंडल को-आर्डिनेटर सतीश प्रेमी।

बदायूं के कटरा सआदतगंज में दो बहनों को मार कर पेड़ पर लटकाने की घटना से बदायूं ही नहीं, बल्कि समूचे देश की विश्व भर में छवि खराब हुई, जिसकी भरपाई सालों में होगी, इसके बावजूद बदायूं पुलिस सबक लेने को तैयार नहीं है। बदायूं पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया है। दलित किशोरी की हत्या के प्रकरण में शनिवार को सनसनीखेज खुलासा हुआ कि पुलिस ने धर्म व परंपरा के विरुद्ध जाकर दलित किशोरी के शव को कछला स्थित गंगा घाट पर जलवा दिया, जबकि धार्मिक मान्यता के अनुसार परिजन शव को जमीन में दफन करने के इच्छुक थे।

उल्लेखनीय है कि सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में स्थित मोहल्ला नेकपुर में 23 नंबवर को कई लोगों ने 16 वर्षीय दलित किशोरी का यौन उत्पीड़न किया था। परिजनों का आरोप है कि एक दरिंदे ने किशोरी को गिलास में घोल कर जहर भी पिलाया, जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि पोस्टमार्टम में रेप व जहर की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे कुछ लोग परिजनों के आरोप और कुछ लोग डॉक्टर की रिपोर्ट पर आशंका जता रहे हैं।

उक्त घटना की जांच के लिए शनिवार को एससी-एसटी आयोग के मंडल को-आर्डिनेटर सतीश प्रेमी आये, तो परिजनों ने कई सनसनीखेज खुलासे किये। परिजनों का कहना था कि पुलिस ने मुकदमे में नाम अपने मन से ही लिखे हैं। आरोप है कि मुख्य आरोपी शहर का बड़ा सट्टा किंग है, जिससे पुलिस उसे बचा रही है। परिजनों ने सतीश प्रेमी को यह भी बताया कि पोस्टमार्टम के बाद वे अपनी बेटी के शव को धार्मिक मान्यता और परंपरा के अनुसार जमीन में दफन करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उनसे चर्चा किये बिना स्वयं ही गाड़ी और ईंधन की व्यवस्था कर ली। उन्हें बताये बिना ही शव कछला गंगा घाट पहुंचा दिया और उन्हें ले जाकर अंत्येष्टि करा दी, जबकि हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार कुँवारी कन्याओं को जलाने की परंपरा ही नहीं है। बता दें कि विश्व भर में चर्चित कटरा काण्ड की जांच कर रही सीबीआई ने दोनों बहनों के पोस्टमार्टम पर भी सवाल उठाया था और पुनः पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया था, जिससे डॉक्टर और पुलिस की साँसें थम गई थीं, इस घटना से सबक लेकर सुधरने की जगह पुलिस ने दलित किशोरी का शव इसलिए जलवा दिया कि किसी बड़ी एजेंसी को जांच जाने की स्थिति में सुबूत ही न रहे। सिविल लाइंस एसओ जेपी यादव के थाना क्षेत्र में इस घटना का मुख्य आरोपी बड़े पैमाने पर सट्टा कराता है, ऐसे में स्पष्ट है कि पुलिस उसे लाभ पहुँचाने की मंशा से ही कार्य कर रही है।

सवाल करने पर एससी-एसटी आयोग के मंडल को-आर्डिनेटर सतीश प्रेमी ने घटना को दुर्भाग्य पूर्ण बताते हुए कहा कि कई अहम बातें संज्ञान में आई हैं, लेकिन अभी जांच जारी है, जिससे अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। उन्होंने परिजनों के अलावा पड़ोस के भी कुछ लोगों से एकांत में बात की। इस दौरान आयोग के सदस्य ओमकार सिंह और दयाराम व्यास भी मौजूद रहे।

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