जानवरों के बीच फंसी एक महिला का दर्द महसूस कीजिये

जानवरों के बीच फंसी एक महिला का दर्द महसूस कीजिये
असहाय महिला का तमाशा देखते लोग और फोटो खींचते छायाकार।
असहाय महिला का तमाशा देखते लोग और फोटो खींचते छायाकार।

मंगल पर बसने के प्रयास में जुटा इंसान स्वयं को बड़ा प्रगतिशील मानने लगा है, जबकि मानवीय दृष्टि से देखा जाये, तो इंसानों का एक बड़ा वर्ग जानवर सरीखा हो गया है। जानवर रुपी इंसानों की बस्ती में अभी कुछ देर पहले एक ऐसी ही घटना सामने आई, जिसे देख कर मौके पर मौजूद लोगों को भले ही कुछ न हुआ हो, पर आप को पढ़ कर स्वयं के इंसान होने पर लज्जा आने लगेगी।

बदायूं शहर में ही पंडित जी के पेट्रोल पंप के बराबर वाली गली से निजी नर्सिंग होम की ओर जाते समय गाँव बसंत नगर निवासी एक महिला को इतनी तेज प्रसव पीड़ा हुई कि वह जमीन पर ही ढेर हो गई। उसके साथ आये लाचार परिजन उसे तरह-तरह से सांत्वना देते रहे। चीख सुन कर लोग घरों से निकल आये और राहगीर खड़े होकर तमाशा देखने लगे। कुछ जागरूक लोगों ने मीडिया कर्मियों को भी फोन कर दिया। मौके पर पहुंचे छायाकारों ने तमाम फोटो लिए, लेकिन एक व्यक्ति ने भी उस महिला को अपने घर में नहीं लिया। किसी ने एंबुलेंस को नहीं बुलाया। बाद में सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची, तो पुलिस ने ही व्यवस्था कर महिला को अस्पताल पहुंचाया।

देश और प्रदेश में चाहे जिसका शासन हो, साथ ही स्थानीय प्रशासन में चाहे जो अफसर हो और चाहे जो कर्मचारी हो, ऐसे इंसानों के समाज को कोई भी कैसे सुधार कर सकता है?, जिस समाज की यह सोच बन गई हो कि उनका कोई दायित्व नहीं है और सब कुछ शासन-प्रशासन को ही करना है, उस समाज का भला स्वयं ईश्वर भी नहीं कर सकता। खैर, जानवर रुपी इंसानों के बीच दर्द से चीखने वाली एक महिला का दर्द आप भी महसूस कीजिये और संकल्प लीजिये कि आपके सामने कभी ऐसा दृश्य घटित हुआ, तो इन इंसानों जैसा व्यवहार नहीं करेंगे, बल्कि मानवीय धर्म का पालन करेंगे।

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