ड्यूटी न करने वाले बाबू अक्षत ने मंडलायुक्त का नाम बदला

ड्यूटी न करने वाले बाबू अक्षत ने मंडलायुक्त का नाम बदला
ड्यूटी छोड़ कर गुरुवार को एक निजी स्कूल में फीता काटता बाबू अक्षत अशेष।
ड्यूटी छोड़ कर गुरुवार को एक निजी स्कूल में फीता काटता बाबू अक्षत अशेष।

बदायूं के एनएमएन दास कॉलेज में तैनात बाबू अक्षत अशेष सुधरने को तैयार नहीं है। गुरूवार को भी ड्यूटी पर न जाकर निजी कार्यक्रमों में भाग लेता रहा। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वयं को वरिष्ठ साहित्यकार और प्रोफेसर बता कर लोगों पर रौब जमाने वाले बाबू अक्षत को मंडलायुक्त का नाम हिंदी में शुद्ध लिखना नहीं आया, जिससे शहर में बड़ी फजीहत हो रही है। उधर कॉलेज से गायब रहने वाले अक्षत के विरुद्ध कार्रवाई करने की जगह प्राचार्य ने अक्षत का कार्य करने के लिए मौखिक रूप से कॉलेज में एक लड़का रख लिया है।

शहर के बाहर उझानी मार्ग पर स्थित एक निजी स्कूल में दास कॉलेज का बाबू अक्षत अशेष ड्यूटी छोड़ कर मेहमान के रूप में पहुंच गया और स्कूल प्रबंधन ने बच्चों के समक्ष इसे आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया, साथ ही ड्यूटी से फरार अक्षत ने भी बच्चों से आदर्श के मार्ग पर चलने को कहा। हिंदी में बात करने और हिंदी को बढ़ावा देने का आह्वान किया, वहीं उसने वहां एक निमंत्रण पत्र भी दिया, जिसमें 17 सितंबर को एक कार्यक्रम आयोजित कराने के संबंध में लिखा है, जिसके अध्यक्ष मंडलायुक्त प्रमांशु बनाये गये हैं, लेकिन निमंत्रण पत्र में उनका नाम प्रभांशु लिखा हुआ नजर आ रहा है। सवाल यह है कि साहित्यकारों, अफसरों और नेताओं को बुला कर उनके साथ फोटो शेषन कराने से आगे अक्षत क्यों नहीं सोचता?, हालांकि कई बार प्रिंट में गड़बड़ी हो जाती है, लेकिन ऐसी गड़बड़ियाँ तब होती थीं, जब कंप्यूटर नहीं थे। अब डिजायन तक लोग सामने बैठ कर कराते हैं। बैठ कर बनवाना संभव न हो, तो मेल और वाट्सएप पर मंगवा कर जांचते हैं। चूँकि अक्षत का ध्यान स्वयं की ब्रांडिंग पर रहता है, इसलिए उसने कार्ड पर ध्यान ही नहीं दिया। अगर, भूल से प्रिंट हो भी गया, तो पेन से नाम संशोधित किया जा सकता था, लेकिन बाबू स्तर के व्यक्ति में इतनी अक्ल होती ही नहीं, जो उसे इस तरह की गलती दिख जाये।

यही है, वो निमंत्रण पत्र, जिसमें मंडलायुक्त का नाम प्रभांशु लिखा है।
यही है, वो निमंत्रण पत्र, जिसमें मंडलायुक्त का नाम प्रभांशु लिखा है।

उधर कॉलेज से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अक्षत के न जाने से कार्यालय में कार्य लंबित है। दुखी प्राचार्य ने अक्षत के विरुद्ध कार्रवाई करने की जगह मौखिक रूप से एक लड़का रख लिया है, जो अक्षत का कार्य करता है। सवाल यह है कि कार्यालय में तमाम गोपनीय कागज रहते हैं, वे गायब हो गये, तो जिम्मेदारी किस की होगी? सवाल यह भी है कि बाहरी छात्रों के कैंपस में प्रवेश को लेकर कॉलेज में पिछले दिनों बवाल हुआ, ऐसे में बाहरी कर्मचारी कैसे रख लिया? फर्जी कर्मचारी ने किसी छात्र-छात्रा से अभद्रता कर दी, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?

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