किसान तिलहनी फसलों की कीट रोगों से रक्षा करें

किसान तिलहनी फसलों की कीट रोगों से रक्षा करें

किसान तिलहनी फसलों की कीट रोगों से रक्षा करें

तिलहनी फसलों में सरसों के नाशीजीवों के प्राकृतिक शत्रुओं जैसे इन्द्रगोप भृंग, क्राइसोपा, सिरीफेड आदि का फसल वातावरण में संरक्षण करना चाहिए। नाशीजीवों व उनके प्राकृतिक शत्रुओं की संख्या 2:1 का अनुपात होना चाहिए। यदि नाशीजीवों की संख्या प्राकृतिक शत्रुओं से अधिक है, तो डाइमिथोएट 30 ई.सी. 1 लीटर या मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल. 1.0 लीटर प्रति हे. की दर से छिड़काव करें।
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार माहू, चित्रित बग एवं पत्ती सुरंगक कीट के नियंत्रण हेतु डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. अथवा मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 प्रतिशत ई.सी. अथवा क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. की 1.0 ली. अथवा मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत एस.एल. की 500 मिली./हे. की दर से लगभग 600-750 ली. पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। एजाडिरेक्टिन (नीम आयल) 0.15 प्रतिशत ई.सी., 2.5 ली./हे. की दर से भी प्रयोग किया जा सकता है।
राई-सरसों में अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा, सफेद गेरूई एवं तुलासिता रोग के नियंत्रण हेतु मैंकोजेब 75 डब्लू.पी. की 2 किग्रा. अथवा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू.पी. की 2 किग्रा. अथवा जिरम 80 प्रतिशत डब्लू.पी. की 2 किग्रा. अथवा काॅपर आक्सीक्लाराईड 50 प्रतिशत डब्लू.पी. की 3 किग्रा. मात्रा प्रति हे. लगभग 600-750 ली. पानी में घोलकर छिड़काव करें।

टमाटर, मिर्च एवं बैंगन की बुवाई 15 जनवरी से तैयारी करें
टमाटर, मिर्च तथा बैंगन के बसंत व ग्रीष्म कालीन फसल की रोपाई 15 जनवरी से करने के लिए खेत की तैयारी करें। प्याज की रोपाई पूर्ण करें। टमाटर तथा मिर्च में पछेती झुलसा से बचाव हेतु मैंकोजेब 2.0 ग्रा./ली. पानी में तथा माहू से बचाव के लिए डाईमेथोएट 1.0 मिली./ली. पानी में घोलकर छिड़काव करें।
उ0प्र0 कृषि अनुसंधान परिषद के सभागार में आयोजित 22वीं बैठक में फसल सतर्कता समूह के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार आलू में माहू का कुप्रभाव दिखाई पड़ने पर प्रति हे. 1.0 लीटर रोगोर/मेटासिस्टाॅक या डाइमिथोएट 30 ई.सी. या मिथाइल डमेटाॅन 25 ई.सी. को 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। पिछले सप्ताह में बारिश होने के कारण आर्द्रता बनी रहेगी, जो कि पछेती झुलसा के लिए अनुकूल है, अतः पछेती झुलसा रोग पर नियंत्रण पाने के लिये मैंकोजेब प्रति हे. 2 किग्रा. मात्रा का छिड़काव करें।

मण्डियों में 179 इलेक्ट्रानिक वजन तौलने की मशीनें लगी
उत्तर प्रदेश में किसान मण्डी परिषद द्वारा किसानों को मण्डियों में सही तौल व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न जनपदों की 95 मण्डियों/उप मण्डियों में 179 इलेक्ट्रानिक वे-ब्रिजेज की स्थापना कर दी गई है। इसके अतिरिक्त 67 वे ब्रिजेज की स्थापना का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जाना प्रस्तावित है।
किसान मण्डी भवन से प्राप्त जानकारी के अनुसार इलेक्ट्रानिक वे-ब्रिजेज से कृषि उत्पादन का सही वजन होने के कारण किसनों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है, जिससे वे उत्साहित है।
समर्थन मूल्य योजना के खरीद केन्द्रों पर भी इलेक्ट्रानिक पेइंग मशीन किसनों को सही तौल के उद्देश्य से उपलब्ध कराई जा रही है।
मण्डी परिषद द्वारा कृषि क्षेत्र में शोधार्थियों को छात्रवृत्ति
उत्तर प्रदेश में मण्डी परिषद द्वारा कृषि क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए शोधार्थियों को छात्रवृत्ति 6 हजार रूपये एवं स्नातक एवं स्नात्कोत्तर स्तर पर छात्र/छात्राओं को 3-3 हजार रूपये प्रतिमाह उपलब्ध कराई जा रही है।
राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद से प्राप्त जानकारी के अनुसार 24 कृषि महाविद्यालयों तथा 5 कृषि विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को स्नातक एवं स्नात्कोत्तर स्तर पर 3 हजार रूपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जा रही है।
कृषि क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मण्डी परिषद द्वारा 03 कृषि विश्वविद्यालयों एवं 02 कृषि संस्थानों में 25-25 शोधार्थियों को 06 हजार रूपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जा रही हैं इस व्यवस्था से कृषि क्षेत्र में छात्र/छात्राओं को शोध करने के प्रवृत्ति बढे़गी।

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