आबिद रजा के भवन को धराशाई करने का आधार भी बतायें सिंचाई मंत्री

आबिद रजा के भवन को धराशाई करने का आधार भी बतायें सिंचाई मंत्री
जाँच रिपोर्ट की छायाप्रति।

बदायूं शहर के उत्तर-पश्चिम में स्थित सोत नदी को कब्जा मुक्त करने का मुद्दा उठता रहा है। गौतम संदेश भी सोत नदी को कब्जा मुक्त करने की बात उठाता रहा है। स्थानीय अफसरों व शासन के निर्देश पर सोत नदी की नपाई होती रही है और हर बार सोत नदी कब्जा मुक्त पाई गई है, ऐसे में सवाल उठता है कि अब सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह सोत नदी को कब्जा मुक्त कराने का बयान किस आधार पर दे रहे हैं।

सोत नदी को कब्जा मुक्त करने का मुद्दा उठता ही रहा है। सोत नदी संभल जिले की सीमा से शुरू होकर गंगा तक जाती है और सभी जगह कब्जाई गई है, लेकिन और कहीं का उल्लेख तक नहीं किया जाता। सोत नदी को कब्जा मुक्त कराने का मुद्दा सिर्फ बदायूं शहर क्षेत्र में ही उठता है। शहर क्षेत्र में भी नदी के किनारे सैकड़ों निर्मित और निर्माणाधीन आवास हैं, लेकिन निशाने पर सिर्फ पूर्व दर्जा राज्यमंत्री आबिद रजा का भवन ही रहता है। हालाँकि सावर्जनिक तौर पर आबिद रजा का नाम कोई नहीं लेता, लेकिन इशारों में निशाने पर आबिद रजा ही रहते हैं। सोत नदी को कब्जा मुक्त कराने को लेकर सबसे तेज गति प्रशासन ने तब पकड़ी, जब सांसद धर्मेन्द्र यादव और आबिद रजा के संबंध खराब हो गये थे। समाजवादी पार्टी से निष्कासित होने के बाद आम जनता को भी लग रहा था कि अब आबिद रजा का भवन धराशाई कर दिया जायेगा, लेकिन जाँच में आबिद रजा का भवन सोत नदी की सीमा से बाहर पाया गया। तहसीलदार ने 8 जुलाई 2016 को भेजी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि आबिद रजा द्वारा सोत नदी पर कब्जा नहीं किया गया है। पुनः रिपोर्ट मांगी गई, तो जाँच के बाद तहसीलदार ने 23 सितंबर 2016 को पुनः रिपोर्ट भेजी, उसमें भी स्पष्ट लिखा है कि अवैध कब्जा नहीं किया गया है।

चुनाव बाद भाजपा सरकार आने पर सोत नदी की फिर जाँच हुई, जिसमें तहसीलदार ने 10 मई 2017 को भेजी रिपोर्ट में लिखा कि नदी अपने दायरे में है और अतिक्रमण नहीं किया गया है, इसके बाद भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री से सोत नदी को मुक्त कराने का आग्रह किया, तो डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर जाँच कराई। कमेटी ने 12 जून 2017 को भेजी रिपोर्ट में पुनः दोहरा दिया कि आबिद रजा का भवन सोत नदी के रकवे से बाहर है।

जाँच रिपोर्ट व नक्शा की छायाप्रति।

उक्त प्रकरण में अब सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह लगातार बयान दे रहे हैं कि पूर्व विधायक का भवन निशाने पर है, जिसे शीघ्र ही धराशाई किया जायेगा। अब सवाल उठता है कि जब तीन-तीन उच्च स्तरीय जाँच होने के बावजूद आबिद रजा का भवन सोत नदी की सीमा से बाहर पाया गया है, तो उसे किस आधार पर धराशाई किया जायेगा। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह को सार्वजनिक रूप से बयान देते समय भवन धराशाई करने का आधार भी स्पष्ट करना चाहिए, क्योंकि उनके बयानों से जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। आरटीआई से मिली जाँच रिपोर्ट में आबिद रजा का भवन सोत नदी की सीमा से पूरी तरह बाहर पाया गया है। रजा भवन में कुछ हिस्सा सोत नदी का बताया जाता है, पर उसके स्वामी आबिद रजा नहीं हैं।

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