सीबीआई जांच का दायरा बढ़ा तो फंस सकते हैं गंगा के दुश्मन

सीबीआई जांच का दायरा बढ़ा तो फंस सकते हैं गंगा के दुश्मन

बदायूं जिला बालू के अवैध खनन को लेकर न सिर्फ प्रदेश बल्कि, राष्ट्रीय स्तर पर कुख्यात है। अवैध खनन लंबे समय से हो रहा है लेकिन, समाजवादी पार्टी की सरकार में राष्ट्रीय स्तर के माफियाओं ने दस्तक दे दी थी। सत्ताधारी माफियाओं की गोद में खेल रहे थे, जिससे बेखौफ माफिया रात-दिन खुलेआम गंगा के सीने को चीरते रहते थे। हजारों डंपर रात-दिन एनसीआर को रवाना होते थे पर, अफसर माफिया के डंपर देख कर मुंह मोड़ लेते थे। सीबीआई की जाँच का दायरा बढ़ा तो, बदायूं जिले से अरबों की संपदा हजम कर चुके लोग बच नहीं पायेंगे।

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समाजवादी पार्टी की सरकार में बुलंदशहर की सीमा से लेकर शाहजहाँपुर की सीमा तक खुलेआम गंगा का सीना चीरा जा रहा था लेकिन, उझानी कोतवाली क्षेत्र में कछला के पास गंगा में माफिया का सबसे बड़ा प्वाइंट था, यहाँ रात-दिन कई जेसीबी निरंतर चलती रहती थीं। लाइन लगा कर सैकड़ों डंपर खड़े रहते थे, जिन्हें भर कर खुलेआम मेट्रो सिटी में भेजा जाता था।

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चौंकाने वाली बात यह है कि सपा सरकार में ही बारिश के मौसम से पहले कछला से मुजरिया दिशा को जाने वाले मार्ग के किनारे पर रेत का पहाड़ खड़ा कर दिया गया था। इतनी बड़ी मात्रा में रेत जमा किया गया था कि बारिश का मौसम खत्म होने के बाद भी डंपर वहां से रेत ढोते रहे पर, पुलिस-प्रशासन कुछ नहीं कर पाया।

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अब सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि सीबीआई की जाँच के दायरे में बदायूं के अपराधी भी आने चाहिए। उस समय के एसडीएम, तहसीलदार, कानून-गो, लेखपाल, खनन विभाग के अफसर, थानाध्यक्ष, सीओ, एएसपी, एसएसपी, एडीएम और डीएम से पूछताछ होनी चाहिए। उस समय के अफसरों के बयानों से ही स्पष्ट हो जायेगा कि किस सफेदपोश के दबाव में अवैध खनन किया जा रहा था।

बात वर्तमान की करें तो, भाजपा सरकार में बहुत बड़े स्तर पर तो नहीं पर, अवैध खनन निरंतर जारी है। 5 फरवरी 2018 को थाना मूसाझाग क्षेत्र में माफिया के ट्रैक्टर-ट्रॉली ने पिकअप को रौंद दिया था, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई थी, उस रात एक दलाल के साथ पुलिस-प्रशासन के अफसर मुशायरा सुनते रहे थे, घटना के बावजूद माफियाओं के विरुद्ध अभियान नहीं चलाया गया। भाजपा सरकार में भी उझानी, सहसवान, जरीफनगर, इस्लामनगर, फैजगंज बेहटा, बिसौली, कादरचौक, अलापुर, दातागंज और हजरतपुर थाना पुलिस की मिलीभगत से अवैध खनन हो रहा है। गंगा के अलावा रामगंगा, सोत, महाबा और अरिल नदियाँ माफियाओं के निशाने पर हैं।

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