अपराधियों पर अंकुश लगाने को बनेगा क्राइम ब्रांच: मुख्य सचिव

अपराधियों पर अंकुश लगाने को बनेगा क्राइम ब्रांच: मुख्य सचिव
मुख्य सचिव आलोक रंजन
मुख्य सचिव आलोक रंजन
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने निर्देश दिये हैं कि गंभीर अपराधों में त्वरित कार्यवाही कर अपराधों एवं अपराधियों पर अंकुश लगाने हेतु प्रदेश के समस्त जनपदों में क्राइम ब्रांच का गठन किया जाय। क्राइम ब्रांच द्वारा अत्यंत गंभीर प्रवृत्ति के अपराध जैसे-हत्या जिसका स्थानीय पुलिस द्वारा खुलासा न किया जा रहा हो, साइबर क्राइम, अपहरण, डकैती, लूट आदि जैसे मामलों का अन्वेषण गुण-दोष के आधार पर विश्लेषण एवं परीक्षण क्राइम ब्रांच द्वारा किया जायेगा। क्राइम ब्रांच जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नियंत्रण में ही कार्य करेगा। क्राइम ब्रांच में अपर पुलिस अधीक्षक, क्राइम की तैनाती होने के साथ-साथ ब्रांच का कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय अथवा पुलिस लाईन में खोला जायेगा। उन्होंने कहा कि रिक्त 5,389 रैंकर उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस विभागीय पदोन्नति चयन प्रक्रिया 30 नवम्बर तक, 3,698 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस एवं 312 प्लाटून कमाण्डर पी0ए0सी0 के रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया आगामी 31 दिसम्बर तथा 35,500 पुलिस आरक्षी, 4,033 आरक्षी पी0ए0सी0 एवं 2,077 फायरमैन के पदों की चयन की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ आगामी मार्च, 2015 तक अवश्य पूर्ण कर अन्तिम परिणाम घोषित करा दिये जायें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 06 जिलों में अत्याधुनिक पुलिस कण्ट्रोल रूम स्थापना के लक्ष्य के अनुसार जनपद कानपुर में प्रारम्भ हो जाने के फलस्वरूप जनपद लखनऊ में माह अक्टूबर, जनपद गाजि़याबाद में माह नवम्बर तथा जनपद इलाहाबाद में आगामी 15 अक्टूबर से अवश्य स्थापित कराकर चालू करा दिया जाय। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक थानों में इण्टरनेट की सुविधा यथा-शीघ्र उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्यवाही शीघ्रातिशीघ्र प्रारम्भ करा ली जाय। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने हेतु आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने में कोई संकोच न किया जाय। उन्होंने कहा कि अपराधियों को संरक्षण देने वालों से किसी प्रकार का समझौता न कर, उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित हो।
मुख्य सचिव आज शास्त्री भवन- लखनऊ स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में गृह विभाग एवं कारागार विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों के सापेक्ष चयनित होने वाले पुलिस कांस्टेबिल, उपनिरीक्षक, निरीक्षक तथा क्षेत्राधिकारियों की नियमित ट्रेनिंग के लिये प्रशिक्षण नीति बनायी जाय। उन्होंने कहा कि महिला उत्पीड़न को रोकने हेतु पुलिस महानिदेशक के अधीन एक महिला सामान्य प्रकोष्ठ का गठन किया गया है, जिसमें अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी प्रकोष्ठ के प्रभारी बनाये गये हैं। उन्होंने कहा कि थानों में दर्ज एफ0आई0आर0 पर विवेचना की कार्यवाही की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से सुनिश्चित करायें। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि अपराधिक गतिविधियों में लिप्त संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखकर ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाय। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में अप्रिय घटना घटित होने पर सम्बन्धित थाना प्रभारियों की जिम्मेदारी नियत की जाय। उन्होंने कहा कि अप्रिय घटना घटित होने पर समय से सम्बन्धित क्षेत्र की स्थानीय पुलिस न पहुंचने पर तथा आवश्यक कार्यवाही में लापरवाही बरतने पर उनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जाय।
श्री रंजन ने कारागार विभाग की समीक्षा करते हुये निर्देश दिये कि रिक्त बंदी रक्षक पदों पर यथा-शीघ्र भर्ती कराने हेतु आवश्यकतानुसार विभागीय नियमावली में संशोधन करने की कार्यवाही प्राथमिकता से सुनिश्चित करायी जाय। उन्होंने कहा कि नवसृजित जनपदों में जिला कारागारों का निर्माण कराने हेतु ग्राम समाज की भूमि अथवा शासकीय भूमि का चयन कर आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता से सुनिश्चित की जाय। उन्होंने कहा कि कारागारों में मोबाइल फोन जैमर की व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाय तथा कारागार में सुरक्षा हेतु मेटल डिटेक्टर, मुलाकातियों के आई0डी0प्रूफ लेने, सी0सी0टी0वी0 कैमरे, वायरलेस सेट तथा वीडियो कान्फ्रेन्सिंग आदि की व्यवस्था प्राथमिकता से सुनिश्चित कराने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाय। बैठक में प्रमुख सचिव गृह नीरज गुप्ता सहित अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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