सीएम द्वारा सचिवालय को ‘पेपरलेस’ किए जाने का शुभारंभ

सीएम द्वारा सचिवालय को ‘पेपरलेस’ किए जाने का शुभारंभ
 

 सचिवालय को ‘पेपरलेस’ करने का शुभारंभ करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
सचिवालय को ‘पेपरलेस’ करने का शुभारंभ करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य के शासकीय विभागों की कार्यक्षमता में वृद्धि तथा कार्यों में पारदर्शिता (गुड गवर्नेन्स) के साथ-साथ ग्रीन गवर्नेन्स की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया। प्रथम चरण में आई.टी. एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग को ‘पेपरलेस’ किये जाने का निर्णय लेते हुए अपना डिजिटल सिग्नेचर प्राप्त करने के बाद उन्होंने आई.टी. एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग द्वारा प्रस्तुत फाइल को डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा अनुमोदित किया। इस प्रकार मुख्यमंत्री ने सचिवालय को ‘पेपरलेस’ किए जाने का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री द्वारा यह कार्य अपने सरकारी आवास 5, कालिदास मार्ग, लखनऊ पर संपादित किया गया। सचिवालय को ‘पेपरलेस’ किए जाने की दिशा में राज्य सरकार का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर उन्होंने एन.आई.सी. द्वारा विकसित ई-आफिस एप्लीकेशन का उपयोग करते हुए राज्य के समस्त मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि आम नागरिकों, छात्रों इत्यादि को विभिन्न प्रकार की विभागीय सेवायें, जैसे-प्रमाणपत्र इत्यादि उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार का गतिरोध नहीं आना चाहिये। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी मण्डलायुक्त एवं जिलाधिकारी अपने स्तर पर नियमित रूप से अनुश्रवण करते हुए सरकार द्वारा विभिन्न विभागों द्वारा चलायी जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों के लाभ को निर्धारित समयावधि में आम नागरिकों, छात्रों इत्यादि को उपलब्ध करायें, जिससे उन्हें अनावश्यक रूप से विभागों/तहसीलों के चक्कर न लगाने पड़ें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनसामान्य को विभिन्न प्रकार की विभागीय सेवायें एवं सूचनायें उनके द्वार के समीप इलेक्ट्रानिक डिलीवरी प्रक्रिया से उपलब्ध कराने हेतु प्रतिबद्ध है। विभिन्न विभागों की शासकीय सेवाओं हेतु शपथ पत्र की अनिवार्यता को पहले ही राज्य सरकार द्वारा समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर स्वप्रमाणित घोषणा पत्र स्वीकार किये जाने की व्यवस्था लागू की गयी है। इससे आम जनता के समय और धन की बचत होगी।
श्री यादव ने कहा कि सचिवालय की कार्यप्रणाली को ‘पेपरलेस’ किये जाने के बाद विभागों द्वारा संचालित योजनाओं से सम्बन्धित फाइलों का मूवमेन्ट तथा निस्तारण इलेक्ट्रानिक माध्यम से त्वरित गति से होगा तथा फाइलों को तुरन्त ट्रैक भी किया जा सकेगा। इससे यह पता लग सकेगा कि कौन सी फाइल किस अधिकारी के पास कितने दिनों से लम्बित है। उन्होंने आगाह किया कि निर्धारित समय से अधिक समय लगाने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां सरकार द्वारा उक्त व्यवस्था रिकार्ड समय में विकसित तथा लागू की गयी। प्रमुख सचिव, आई.टी. एवं इलेक्ट्रानिक्स जीवेश नन्दन ने बताया कि पेपरलेस आफिस हो जाने से फाइलों के फट जाने या गुम हो जाने की सम्भावनायें समाप्त हो जायेंगी तथा इन्हें अत्यन्त सुरक्षित तरीके से लखनऊ के अत्याधुनिक ‘स्टेट डेटा सेन्टर’ में स्टोर किया जायेगा। इस योजना में उपयोग की जाने वाली एप्लीकेशन ई-आफिस एन.आई.सी. द्वारा विकसित की गयी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ‘स्टेट डेटा सेन्टर’ को वर्चुअलाइजेशन कान्सेप्ट पर आधारित आधुनिकतम तकनीक क्लाउड कम्प्यूटिंग पर स्थापित किया गया है। समस्त फाइलों के नियमित रूप से बैकअप लिये जाने तथा डिजास्टर रिकवरी साइट की उपलब्ध्ता से, राज्य इस बात से निश्चिंत रहेगा कि प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना की स्थिति में किसी भी प्रकार के डेटा की क्षति नहीं हुई है। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अहमद हसन, राजनैतिक पेंशन मंत्री राजेन्द्र चौधरी, मुख्यमंत्री के परामर्शी आमोद कुमार, विशेष सचिव मुख्यमंत्री रिग्जियान सैम्फिल, विशेष सचिव आई0टी0एवं इलेक्ट्रानिक्स जी.एस. नवीन कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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