कड़ाई से रोके जायें बाल विवाह: पूनम यादव

कड़ाई से रोके जायें बाल विवाह: पूनम यादव
बदायूं स्थित विकास भवन सभागार में विचार व्यक्त करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव व सीडीओ देवेन्द्र कुमार सिंह कुशवाह।
बदायूं स्थित विकास भवन सभागार में विचार व्यक्त करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव व सीडीओ देवेन्द्र कुमार सिंह कुशवाह।
बाल विवाह सामाजिक कुरीति है, इसको रोकने के लिए सभी को सम्मिलित प्रयास करते हुए जन जागरूकता संबंधी कार्यक्रम चलाने होंगे और दोषियों पर कार्रवाई कर बाल विवाह पर अंकुश लगाना होगा।
बदायूं स्थित विकास भवन सभागार में सोमवार को उक्त विचार व्यक्त करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव ने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी इस संबंध में अपनी अपनी जिम्मेदारी का भली-भाॅंति निर्वहन करते हुए सामाजिक परम्पराओं में बदलाव लाने हेतु जनपद में जनजागरूकता कार्यक्रम चलायें।
बाल विवाह कम करने हेतु राज्य स्तरीय कार्य योजना तैयार करने के लिए यूनिसेफ द्वारा एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि अशिक्षा, जागरूकता की कमी सहित अन्य तमाम कारण है, जिससे बाल विवाह पर पूर्ण नियंत्रण नहीं लग पा रहा है, जबकि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के को बच्चा या नाबालिक मानते हुए विवाह करने पर सजा का प्रावधान है, यदि कोई व्यक्ति/समूह बाल विवाह को प्रोत्साहन देता है, अथवा बाल विवाह करवाता है, तो उसे भी सजा दिए जाने के लिए कानून बनाया गया है।
मुख्य विकास अधिकारी देवेन्द्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि बाल विवाह को रोकने हेतु न सिर्फ शिक्षा, जागरूकता ही काफी है, बल्कि इस प्रकार के समारोह आयोजित होने पर उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदारी तय नहीं की जायेगी और ऐसा न करने पर उसको दण्डित नहीं किया जाएगा, तब तक बाल विवाह की रोकथाम हेतु प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस कार्य को रोकने हेतु जिला, ब्लाक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर समितियों का गठन भी किया जा चुका है, इन समितियों को अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए बाल विवाह के रोकथाम हेतु प्रभावी कार्रवाई करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के संबंध में ग्राम प्रधान, शिक्षक, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकत्री एवं पड़ोसी आदि कोई भी शिकायत कर सकता है।
गोष्ठी में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों के सुझावों को भी सुना गया। कार्यशाला में यूनिसेफ के विक्रम सिंह, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रमाकांत शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी हरेन्द्र कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी निर्मल शर्मा और सुभाष सिंह सहित अन्य अधिकारीगण एवं समाजसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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