शातिर बाबू अक्षत अशेष द्वारा की जाने लगी बदायूं लूटोत्सव की तैयारी

शातिर बाबू अक्षत अशेष द्वारा की जाने लगी बदायूं लूटोत्सव की तैयारी

 

बदायूं महोत्सव के नाम पर एक बार फिर लूटने की योजना बनने लगी है। लूटोत्सव को लेकर बैठक आयोजित की गई, जिसमें दिसंबर माह के दूसरे सप्ताह में आयोजन करने का प्रस्ताव रखा गया। बैठक में शातिर बाबू के चुनिंदा चमचे और चर्चित शराबी बाबू उपस्थित रहे, जो जिलाधिकारी के सामने आयोजन को सांस्कृतिक और पारंपरिक बताते रहे।

जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव ने मुख्य विकास अधिकारी शेषमणि पाण्डेय सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों तथा बदायूं क्लब के पदाधिकारियों के साथ मंगलवार को शिविर कार्यालय में चार दिवसीय बदायूं महोत्सव के आयोजन की रूपरेखा तय करने के लिए प्रथम बैठक की। जिलाधिकारी ने बदायूं महोत्सव में स्थानीय प्रतिभाओं को विशेष अवसर दिए जाने पर बल दिया। बदायूं महोत्सव में प्रथम बार उस्ताद निसार हुसैन के नाम से संगीत रत्न पुरस्कार भी शुरू किया जाएगा। उद्घाटन एवं समापन के लिए विशिष्ठ अतिथियों का नाम उनकी स्वीकृति मिलने के पश्चात ही तय हो सकेगा। महोत्सव में सांस्कृतिक संध्या, मुशायरा, कवि सम्मेलन, म्यूज़िकल नाइट, लोक गीत एवं नृत्य तथा कव्वाली के कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। स्वच्छ भारत अभियान विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की जायेगी। डीएम के निर्देश पर महोत्सव में पहली बार महिलाओं की पूजा थाली सजाओ प्रतियोगिता भी आयोजित होने के साथ ही रंगोली, मेंहदी, भाषण, खेलकूद, रेस, दंगल, मैराथन आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जायेंगी। बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व महेन्द्र सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन अजय कुमार श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट राज कुमार द्विवेदी, उप जिलाधिकारियों सहित अन्य तमाम अफसर उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि बदायूं महोत्सव पर 15 लाख रुपए से भी ज्यादा खर्च होते हैं, जो विभिन्न हथकंडों से जुटाये जाते हैं। रुपयों का समस्त रख-रखाव दास कॉलेज के बाबू और क्लब के सचिव अक्षत अशेष के अधीन रहता है, जिसका हिसाब कभी सार्वजनिक नहीं किया जाता। चंदा नकद लिया जाता है, जिसका कोई प्रमाण नहीं रहता। प्रायोजकों से ही इतनी मोटी रकम जमा हो जाती है, जिससे पूरा आयोजन हो जायेगा, इसके बावजूद सरकारी मदद से जिले भर में जबरन चंदा वसूला जाता है, इसीलिए बदायूं महोत्सव को आम जनता लूटोत्सव कहने लगी है, यह आयोजन कुख्यात हो गया, तो सपा सरकार में अफसरों ने रूचि दिखानी बंद कर दी, पर सत्ता परिवर्तन होते ही शातिर दिमाग लोग पुनः सक्रिय हो गये हैं।

जिलाधिकारी स्वयं अच्छी गायिका हैं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति उनकी रूचि से शातिर आयोजक परिचित हैं, इसीलिए उनके सद्गुणों का शातिर आयोजक दुरूपयोग करने में जुट गये हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आज आयोजित की गई बैठक में कुख्यात शराबी बाबू भी उपस्थित रहा, जिसकी भनक जिलाधिकारी को नहीं लगने दी। यह भी बता दें कि सपा सरकार में बदायूं महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी के पास पहुंचा, तो उन्होंने एसडीएम सदर, सिटी मजिस्ट्रेट, एडीएम और सीडीओ की अध्यक्षता में कई कमेटियां गठित कर दीं, जिस पर शातिर आयोजक घबरा गये, लेकिन अगले सप्ताह में ही उनका तबादला हो गया, उनकी जगह सीपी त्रिपाठी आये, तो कमेटियों को निष्क्रिय कर दिया गया, जिसके बाद शातिर अक्षत ने जमकर लूट की।

ज्ञात हो स्मृति वंदन नाम की संस्था द्वारा भी महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पर इस संस्था द्वारा धन का संचय स्वयं ही किया जाता है। जिले के प्रतिष्ठित लोगों से आर्थिक सहायता लेते हैं एवं प्रायोजकों से मिले धन से ही सफल आयोजन कर लेते हैं। सवाल यह है कि जब स्मृति वंदन वाले सरकारी मदद के बिना कम खर्च में बदायूं क्लब से बेहतर कार्यक्रम कर लेते हैं, तो कई गुना रुपया बदायूं क्लब वाले कहां खर्च करते हैं। स्पष्ट है कि धन का गोलमाल किया जाता है, जिसकी निगरानी के लिए तेजतर्रार अफसर को दायित्व देना चाहिए, इसके अलावा 30 अक्टूबर से स्मृति वंदन द्वारा इस्लामिया इंटर कॉलेज के प्रांगण में महोत्सव आयोजित करने की तैयारियां की जा रही हैं, इसीलिए सवाल यह भी है कि जब एक महोत्सव हाल ही में आयोजित किया जा रहा है, तो एक-दो महीने के अंतराल पर ही पुनः महोत्सव आयोजित करने की आवश्यकता ही क्या है, इससे आम जनता का क्या भला होगा? 

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