अमित शाह के यूपी से निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाने के निर्देश

अमित शाह के यूपी से निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाने के निर्देश
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भले ही उत्तर प्रदेश से भी अपार जनसमर्थन मिला हो, पर सच यही है कि संगठन के नाम पर भाजपा उत्तर प्रदेश में आज भी हाशिये पर ही है। संगठन की कमजोरी के कारण ही भाजपा उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर लड़ नहीं पा रही है और लड़ाई जमीन पर नजर नहीं आ रही, इसलिए जनता झल्लाने लगी है। यह सब भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के संज्ञान में भी है, तभी उन्होंने निष्क्रिय पदाधिकारियों को तत्काल हटाने के कड़े निर्देश दिए हैं। अब भाजपा में ऐसे ही पदाधिकारी रहेंगे, जो सक्रिय हों और जमीन पर काम करने में विश्वास रखते हों।

उत्तर प्रदेश में कई बड़े दंगे हुए हैं। दंगों को लेकर विपक्ष भाजपा को निशाना बनाता रहा है, जबकि संगठन विहीन भाजपा दंगे कराने की स्थिति में ही नहीं है। दंगे आम जनता के बीच ही हो रहे हैं और आम जनता ही लड़ व मर रही है, जिसे सरकार की विफलता अधिक कहा जायेगा। जनता जैसे स्वयं लड़ रही है, वैसे ही तमाम संभावनाओं और विकल्प विहीन अवस्था के चलते उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा को कल्पना से परे समर्थन भी दे दिया, लेकिन संगठन आज भी नहीं है। अधिकांश जिलों में भाजपा की ऐसी हालत है कि जिलाध्यक्ष के आह्वान पांच हजार लोग भी मुख्यालय नहीं आ सकते। जिला, नगर और मंडल स्तर की कार्यकारिणी में जिलाध्यक्षों ने चरण वन्दना करने वालों को पदाधिकारी बना रखा है, जो भाजपा जैसी पार्टी के पदाधिकारी बन कर मान-सम्मान के साथ तमाम निजी स्वार्थों की पूर्ति कर रहे हैं।

मुरादाबाद के कांठ क्षेत्र में हुए बवाल के बाद भाजपा ने इस क्षेत्र में आंदोलन को गति देने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन असफल रही, क्योंकि इस क्षेत्र में भी संगठन है ही नहीं और जनता ने साथ नहीं दिया, सो भाजपा की तमाम चेतावनियाँ और संकल्प हवा में उड़ गये। प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेई ने मुरादाबाद के एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव के विरुद्ध आर-पार की लड़ाई का एलान करते हुए आंदोलन की रूपरेखा तय की थी, लेकिन आंदोलन तीन दिन भी नहीं चला, जिससे भाजपा की जमकर फजीहत हो रही है। यही सब कमजोरियां राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के संज्ञान में हैं और उन्होंने निष्क्रिय पदाधिकारियों को तत्काल हटाने के कड़े निर्देश दिए हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि निष्क्रिय जिलाध्यक्ष निष्क्रिय पदाधिकारियों को कैसे हटा पायेंगे?

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