कानून व्यवस्था संबंधी मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश बदायूं में बेअसर

कानून व्यवस्था संबंधी मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश बदायूं में बेअसर
हिस्ट्रीशीटर के दबाव में थाना चलाने वाले एसओ शमशाद अहमद
हिस्ट्रीशीटर के दबाव में थाना चलाने वाले एसओ शमशाद अहमद

बदायूं पुलिस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश सरकार को शर्मसार करा चुकी है, इसके बावजूद कार्यप्रणाली में आंशिक बदलाव भी नहीं आ रहा है। ताजा मामला थाना वजीरगंज और थाना अलापुर पुलिस की मनमानी का है। पीड़ित उच्चाधिरियों के कार्यालयों के चक्कर लगा कर थकहार चुके हैं, पर न दबंगों के विरुद्ध कार्रवाई हो रही है और न ही उन्हें बचाने वाली पुलिस के विरुद्ध कोई कार्रवाई की जा रही है।

वजीरगंज के थानाध्यक्ष शमशाद अहमद ने तो भू-माफियाओं के दबाव में एक सप्ताह पुराने मारपीट के दर्ज मुकदमे में धारा 307 ही बढ़ा दी है, ताकि पीड़ित पक्ष भू-माफियाओं के समक्ष समर्पण कर दे। बताते हैं कि कस्बा वजीरगंज निवासी राजेंद्र कुमार का बंटवारे को लेकर मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। 21 मई को रात साढ़े नौ बजे के आसपास दूसरे पक्ष के चार लोग उसकी बंद दुकान का ताला काटने लगे। पड़ोस के लोगों की सूचना पर वह दुकान पर पहुंचे और इस तरह मनमानी करने का विरोध करने लगे, तो दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। दोनों पक्ष के घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। दोनों का मेडिकल परीक्षण हुआ। साधारण मारपीट की घटना में एसओ ने राजेन्द्र पर एक सप्ताह बाद धारा 307 भी लगा दी है और भू-माफियाओं से समझौता करने का दबाव दे रहे हैं। बताते हैं कि जिला बदर, हिस्ट्रीशीटर भू-माफिया की पुलिस से सेटिंग है और पुलिस उससे लोगों की रक्षा करने की बजाये, उसके लिए काम कर रही है। इतना सब हो गया, लेकिन जिले के नये कप्तान का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी ही नहीं है।

पीड़ित अशरफ
पीड़ित अशरफ

इसी तरह अलापुर थाना क्षेत्र के कस्बा सखानूं में अशरफ के घर में दंबगों ने 1 मई को आग लगा दी, जिसमें हजारों रूपये का नुकसान हुआ। थाना अलापुर में मुकदमा भी दर्ज है, लेकिन दबंग पूरे दिन पुलिस के ही आसपास रहते हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही है, जबकि मुकदमा लिखाने के कारण दबंग अशरफ से और ज्यादा रंजिश मानने लगे हैं, जिससे उसके साथ कुछ भी कर सकते हैं, पर पुलिस एक दम बेपरवाह बनी हुई है। पीड़ित अफसरों के समक्ष भी लगातार गुहार लगा रहा है, जिसका अलापुर थाना पुलिस पर कोई असर नहीं है। कुल मिला कर मुख्यमंत्री के निर्देश बदायूं में फिलहाल बेअसर साबित हो रहे हैं।

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