स्टेट एक्रीडिशन काउन्सिल का गठन करने के निर्देश

स्टेट एक्रीडिशन काउन्सिल का गठन करने के निर्देश
लखनऊ स्थित योजना भवन में दो दिवसीय राज्य विश्वविद्यालय कुलपति सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल बीएल जोशी एवं मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
लखनऊ स्थित योजना भवन में दो दिवसीय राज्य विश्वविद्यालय कुलपति सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल बीएल जोशी एवं मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी.एल. जोशी ने राज्य के विश्वविद्यालयों द्वारा निर्धारित समय सारणी के अनुसार परीक्षा सम्पन्न कराने एवं परिणाम घोषित करने पर बल दिया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता की दृष्टि से विभिन्न प्रशासनिक, एकेडमिक, वित्तीय आदि कार्यों के लिए जो समितियों की सुविचारित व्यवस्था लागू है, उसे कड़ाई से लागू रखने एवं नियमित रूप से संचालित रखने पर बल दिया। उन्होंने यह चिन्ता व्यक्त की कि यद्यपि सुधार हुआ है, परन्तु विश्वविद्यालयों के परीक्षाफल समय से घोषित हों, बच्चों को डिग्रियां मिलें, यह विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की आधारभूत जिम्मेदारियां हैं। विश्वविद्यालयों में यदि कोई कमियां प्रकाश में आती हैं, तो उस दृष्टि से कार्यवाही करके वित्तीय एवं एकेडमिक, प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखा जाए।
राज्यपाल आज यहां योजना भवन में दो दिवसीय राज्य विश्वविद्यालय कुलपति सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। श्री जोशी ने कहा कि सम्मेलन में विचार-विमर्श के उपरान्त कई सकारात्मक निष्कर्ष प्राप्त हुए हैं, जिन पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए उनके स्तर से भी गम्भीरता से प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को नैक मूल्यांकन के सम्बन्ध में गम्भीरता से काम करने का निर्देश दिए, क्योंकि नैक मूल्यांकन के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से विश्वविद्यालयों को कई प्रकार के अनुदान प्राप्त होते हैं। उन्होंने रैगिंग को कड़ाई से रोकने और शोध के स्तर को बढ़ाने पर भी बल दिया।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि देश की जनसंख्या में नौजवानों की संख्या अधिक है, यह खुशी की बात है। इतनी बड़ी युवा शक्ति का सही उपयोग करने की योजना बनानी चाहिए। इस युवा जनशक्ति के सभी वर्गों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि यही सच्चा समाजवाद है, जिसे आजकल की भाषा में समग्र विकास या इनक्लूसिव ग्रोथ कहा जाता है।
श्री यादव ने प्रदेश में एक डिजाइन विश्वविद्यालय की स्थापना किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थाएं प्रदेश के विकास कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उन्होंने दुग्ध विकास के क्षेत्र में राज्य की योजनाओं की लोकप्रियता की चर्चा करते हुए यह अपेक्षा की कि इस क्षेत्र में और अधिक दक्ष शिक्षित युवक विकास की गति को और तेज करने में सहभागी बनेंगे। उन्होंने विभिन्न जिलों के स्थानीय उद्योगों, शिल्पों, हस्तकलाओं और उद्योगों को चिन्हित करते हुए उन्हें सुदृढ़ करने के लिए सम्यक दृष्टि से आवश्यक उच्च शिक्षा कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में चलाए जाने पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भातखण्डे संगीत विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए इसे वित्तीय सहायता देने तथा इसका एक और परिसर प्रदेश में स्थापित करने पर सहमति जतायी। उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक भवन को संरक्षित करने के लिए आवश्यक सहायता दिए जाने पर भी सहमति व्यक्त की। उन्होंने विभिन्न सुझावों के मद्देनजर यह निर्देश दिए कि कुलसचिवों के कैडर का रिव्यू कर इसे और सुदृढ़ बनाया जाए। राज्य स्तर पर एक स्टेट एक्रीडिशन काउन्सिल के गठन करने की कार्यवाही अविलम्ब आरम्भ की जाए, जिससे शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता को मानकीकृत करने में सहायता मिलेगी। प्रदेश में इनोवेशन एवं तकनीकी विकास को विशेष गति देने के लिए ‘राज्य इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेण्टर’ की स्थापना की जाएगी तथा इसके लिए विश्व में जो अच्छे माडल हों, उनकी स्टडी करके इसकी व्यवस्था की जाए। इसमें विश्व के अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों तथा उद्योग आदि की भागीदारी की व्यवस्था भी विचारणीय होगी।
सम्मेलन में विभिन्न कुलपतियों द्वारा कुलसचिवों, वित्त अधिकारियों एवं परीक्षा नियंत्रकों की व्यवस्था प्रत्येक विश्वविद्यालय में किए जाने तथा कुलसचिवों के कैडर को रिव्यू करके उसे सुदृढ़ किए जाने पर आम सहमति हुई। विभिन्न प्रशासनिक, वित्तीय, एकेडमिक तथा सम्बद्धता संबंधी कार्यों को करने के लिए ई-इनीशिएटिव लेते हुए पारदर्शी एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था लागू करने पर भी सहमति व्यक्त की गई तथा शासन स्तर से समन्वय करने का अनुरोध किया गया।
सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि एकेडमिक सुधार की दृष्टि से पाठ्यक्रमों को प्रत्येक वर्ष परिवर्धित किया जाए, शोध की गुणवत्ता पर विशेष बल दिया जाए एवं विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में साफ्ट स्किल्स व अन्य रोजगारपरक विषयों को सम्मिलित किया जाए, जिसके लिए विश्वविद्यालयों की एकेडमिक काउन्सिल विचार करके फैसला लेगी। राज्य स्तर पर इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेण्टर की स्थापना किए जाने की नैक की भांति राज्य स्तर पर एक स्टेट एक्रीडिशन काउन्सिल बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
इससे पूर्व राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों द्वारा क्रमशः विश्वविद्यालय की आवश्यकताओं से अवगत कराया गया। इस मौके पर प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा नीरज कुमार गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्परता से काम किया जा रहा है। शिक्षकों की भर्ती के लिए उच्च शिक्षा आयोग के गठन की कार्रवाई की जा रही है। इसी प्रकार राज्य स्तर पर विश्वविद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए उच्च शिक्षा समिति का गठन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में सम्मेलन के संयोजक तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पी.सी. त्रिवेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति, राज्यपाल के प्रमुख सचिव राजीव कपूर, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव वित्त आनंद मिश्र सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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