साहित्यकार समाज को दिशा देता है: मुख्यमंत्री

साहित्यकार समाज को दिशा देता है: मुख्यमंत्री
 
  • समाज की एकता और लोगों को जागरूक करने में साहित्यकारों की भूमिका महत्वपूर्ण
 
  • मुख्यमंत्री द्वारा डा. सरिता शर्मा के गीत संग्रह ‘हुए आकाश तुम’ का विमोचन
कवयित्री डा. सरिता शर्मा के नवीन गीत संग्रह ‘हुए आकाश तुम’ के विमोचन कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व अन्य वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के साथ आजम खां एवं विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय
कवयित्री डा. सरिता शर्मा के नवीन गीत संग्रह ‘हुए आकाश तुम’ के विमोचन कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व अन्य वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के साथ आजम खां एवं विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि साहित्यकार समाज को दिशा देता है। समाज की एकता और लोगों को जागरूक करने में भी साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव से सीख लेते हुए समाजवादी पार्टी ने हमेशा साहित्यकारों का सम्मान किया है।
मुख्यमंत्री आज यहां अपने सरकारी आवास 5, कालिदास मार्ग लखनऊ में कवयित्री डा. सरिता शर्मा के नवीन गीत संग्रह ‘हुए आकाश तुम’ का विमोचन करने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कवि एक अच्छा इंसान भी होता है, जो चिंतन करके अपने विचारों को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने डा. सरिता शर्मा की रचना-धर्मिता की सराहना करते हुए उम्मीद जतायी कि वे इसी प्रकार भविष्य में भी साहित्य की सेवा करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि काव्य रचना एक ऐसा हुनर है, जो ईश्वरीय देन होता है।
विमोचन कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि कविता हिन्दी साहित्य के सृजन का बहुत बड़ा आधार है। उन्होंने हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में साहित्यकारों के योगदान को सराहनीय बताते हुए कहा कि पुस्तक के माध्यम से पाठकों को कवयित्री की भावनाओं की जानकारी मिलेगी।
नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने कहा कि डा. सरिता शर्मा द्वारा रचे गए साहित्य का कद बहुत ऊंचा है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार व मीडिया समाज के लिए बेहद अहम हैं। कालजयी साहित्यिक रचनाओं के सन्दर्भ में उन्होंने कहा कि अच्छी नज़्म और ग़ज़ल तारीख (इतिहास) बन जाती है, लेकिन तारीख नज़्म और ग़ज़ल नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब ही हमारी वास्तविक धरोहर है।
विकलांग कल्याण मंत्री अम्बिका चौधरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि डा. सरिता शर्मा की काव्य यात्रा का सरित प्रवाह इसी प्रकार जारी रहेगा। पूर्व मंत्री डा. अशोक बाजपेयी ने कहा कि यह काव्य संग्रह आधुनिक हिन्दी काव्य में मील का पत्थर साबित होगा।
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार साहित्यकारों का सम्मान करती है। राज्य सरकार द्वारा पुरस्कार स्वरूप साहित्यकारों को प्रदान की जा रही धनराशि शेष हिन्दी भाषी राज्यों की कुल पुरस्कार राशि से अधिक है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में जहां कहीं हिन्दी और उर्दू समझी जाती है, ऐसे स्थानों पर डा. सरिता शर्मा ने अपनी रचनाओं के माध्यम से दोनों भाषाओं का सम्मान बढ़ाया है।
उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी के अध्यक्ष मुनव्वर राना ने कहा कि ऐसे  साहित्यिक आयोजनों से देश की छवि बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि यह तय करना कठिन है कि डा. शर्मा हिन्दी की कवयित्री हैं या उर्दू की शायरा।
डा. सरिता शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्यकार जब सृजन करता है, तो अपनी रचना के प्रति समर्पित हो जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार देश की एक मात्र सरकार है, जो साहित्यकारों, कलाकारों व संस्कृति से जुड़े अन्य लोगों का सम्मान करती है। शासन और सत्ता के लोग यदि इस प्रकार मददगार रहेंगे, तो साहित्यकार अपने काम को बेहतर ढंग से कर पाएंगे। इस अवसर पर कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी, साहित्यकारगण व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सर्वेश अस्थाना ने किया।

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