विवाह के आश्वासन पर सेक्स करना, बलात्कार नहीं

विवाह के आश्वासन पर सेक्स करना, बलात्कार नहीं
विवाह के आश्वासन पर सेक्स करना, बलात्कार नहीं
विवाह के आश्वासन पर सेक्स करना, बलात्कार नहीं

विवाह के आश्वासन पर शारीरिक संबंध स्थापित करने और विवाह न होने की स्थिति में उन संबंधों को बलात्कार जैसे गंभीर आरोप मढ़ देने के एक प्रकरण में अदालत ने आरोपी युवक को रिहा ही नहीं कर दिया, बल्कि टिप्पणी करते हुए कहा है कि विवाह से पहले शारीरिक संबंध बनाना अनैतिक और यह हर धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ है। अदालत ने यह भी कहा कि विवाह के वादे पर दो वयस्कों के बीच संभोग का हर कृत्य बलात्कार नहीं हो जाता।

नई दिल्ली में द्वारका स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने अपने फैसले में कहा है कि विवाह के वादे पर किसी व्यक्ति से लड़की शारीरिक संबंध बनाती है, तो यह उसका अपना जोखिम होता है और ऐसे जोखिम के बारे में शिक्षित महिला को ज्ञान होना चाहिए। न्यायाधीश भट्ट का मानना है कि विवाह के वादे के आश्वासन पर दो वयस्कों के बीच संभोग का हर कृत्य बलात्कार नहीं बन जाता और यदि कोई युवक वादा पूरा नहीं करता, तो उसे बलात्कार के आरोप में सजा देने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने कहा कि महिला को ऐसे कृत्य के परिणाम के बारे में पता होना चाहिए कि लड़का अपने वादे को पूरा करेगा, अन्यथा कोई गारंटी नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पंजाब निवासी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत्त युवक पर दिल्ली में एक निजी कंपनी में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करने वाली एक युवती ने मई 2011 में एफआईआर दर्ज कराई थी कि जुलाई 2006 में एक चैट वेबसाइड के माध्यम से उसकी युवक से पहचान और मुलाकात हुई। युवक ने उससे विवाह का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में विवाह करने से मना कर दिया, इसी केस में अदालत ने आज ऐतिहासिक निर्णय देते हुए युवक को रिहा करने का आदेश जारी किया है।

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