विधिवत घोषणा, अब भारत रत्न भी होगा कोहिनूर

विधिवत घोषणा, अब भारत रत्न भी होगा कोहिनूर

 

  • प्रोफेसर सीएनआर राओ को भी दिया जायेगा भारत रत्न का सम्मान
महान क्रिकेटर सचिन रमेश तेंदुलकर
महान क्रिकेटर सचिन रमेश तेंदुलकर

महान क्रिकेटर सचिन रमेश तेंदुलकर भारतीयों के लिए कोहिनूर जैसे पहले से ही हैं, लेकिन अब वैधानिक तौर पर उन्हें भारत रत्न की उपाधि देने की भी विधिवत घोषणा कर दी गई है, जिससे क्रिकेट प्रेमी झूम उठे हैं। उन्हें यह सम्मान विधिवत 26 जनवरी 2014 को दिया जायेगा। भारत रत्न की उपाधि प्रोफेसर सीएनआर राओ को भी दी जायेगी।

आम आदमी से लेकर ख़ास तक सभी सचिन को भारत रत्न की उपाधि देने की मांग लंबे अर्से से कर रहे थे। विश्व विख्यात गायिका और भारत रत्न लता मंगेश्कर ने भी सचिन को यह उपाधि देने की मांग की है। इस सबको देखते हुए ही भारत सरकार को उपाधि देने के नियम में संशोधन करना पड़ा, क्योंकि नियमानुसार खिलाड़ियों को यह सम्मान देने का अब तक प्रावधान ही नहीं था।

राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता वेनू राजामोनी के अनुसार राष्ट्रपति ने सचिन को भारत रत्न देने का फैसला ले लिया है। भारत रत्न पाने वाले सचिन प्रथम खिलाड़ी होंगे। 16 वर्ष की उम्र से 24 साल तक क्रिकेट जगत में देश की पताका शिखर पर फहराते रहने वाले सचिन के अतुलनीय योगदान को लेकर उन्हें राज्य सभा सदस्य भी बनाया जा चुका है। राज्यसभा जाने वाले भी सचिन प्रथम खिलाड़ी हैं।

विधिवत घोषणा, अब भारत रत्न भी होगा कोहिनूर
विधिवत घोषणा, अब भारत रत्न भी होगा कोहिनूर

मंगल ग्रह अभियान को लेकर विश्व भर में भारतीयों का सिर ऊंचा करने वाले प्रोफेसर सीएनआर राओ को भी भारत रत्न से सम्मानित किया जायेगा। उधर सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा को कुछ लोग राजनैतिक चश्मे से भी देख रहे हैं, जिससे आलोचना करते हुए हॉकी में जादूगर के रूप में विख्यात मेजर ध्यानचंद की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। बता दें कि 15 अगस्त 1936 को बर्लिन में ध्यानचंद ने हिटलर की उपस्थिति में जर्मनी को 9-1 से ओलिम्पिक फाईनल में पराजित किया, तो हिटलर ने जर्मनी आने के लिए मुंह मांगी कीमत देने का लालच दिया था, लेकिन मेजर ध्यानचंद ने हिटलर के ऑफर को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वह पैसों के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए खेलते हैं, इतना ही नहीं विदेश में सार्वजनिक तौर पर तिरंगा फहराने वाले प्रथम भारतीय हैं, जबकि उस वक्त ब्रिटिश शासन में तिरंगा फहराना गुनाह था। बताया जाता है कि बर्लिन जाते समय वह अपने बिस्तरबंद में तिरंगा छुपा कर ले गए थे।

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